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                <title>Commission - Rokthok Lekhani News </title>
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                <title>मुंबई : SIR से नाम कटा तो वोटर लिस्ट में कैसे जुड़वाएं? चुनाव आयोग ने जारी किया पूरा प्रोसेस</title>
                                    <description><![CDATA[<p>महाराष्ट्र में एसआइआर प्रक्रिया अगले चरण में पहुंच गई है। चुनाव आयोग ने प्रारूप वोटर लिस्ट जारी कर दी है। इसमें राज्य में 2 करोड़ से अधिक लोगों के नाम नहीं है। मुंबई में ऐसे करीब 36 लाख लोग हैं जिनका नाम मतदाता सूची में नहीं है। चुनाव आयोग के एक अधिकारी ने बताया कि अभी भी लोगों के पास एक नियमित प्रक्रिया पूरी कर वोटर लिस्ट में अपना नाम शामिल करवा सकते हैं।</p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/51666/if-your-name-is-removed-from-mumbai-sir-how-to"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-09/images---2026-09-03t104826.960.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>मुंबई: </strong>महाराष्ट्र में एसआइआर प्रक्रिया अगले चरण में पहुंच गई है। चुनाव आयोग ने प्रारूप वोटर लिस्ट जारी कर दी है। इसमें राज्य में 2 करोड़ से अधिक लोगों के नाम नहीं है। मुंबई में ऐसे करीब 36 लाख लोग हैं जिनका नाम मतदाता सूची में नहीं है। चुनाव आयोग के एक अधिकारी ने बताया कि अभी भी लोगों के पास एक नियमित प्रक्रिया पूरी कर वोटर लिस्ट में अपना नाम शामिल करवा सकते हैं। ड्राफ्ट वोटर लिस्ट पर 31 अगस्त से 30 सितंबर 2026 तक दावे और आपत्तियां दर्ज कराई जा सकती हैं। जिन पात्र मतदाताओं के नाम ड्राफ्ट सूची में शामिल नहीं हैं, वे निर्धारित प्रक्रिया के तहत नाम जोड़ने के लिए आवेदन कर सकते हैं।</p>
<p> </p>
<p>1 अक्टूबर 2026 को या उससे पहले 18 वर्ष की आयु पूरी करने वाले नए मतदाता भी फॉर्म-6 और संबंधित घोषणा-पत्र के जरिए नाम जुड़वाने के लिए आवेदन कर सकते हैं। आवेदन की जांच के बाद निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी पात्र मतदाताओं के नाम अंतिम सूची में शामिल करने पर निर्णय लेंगे। किसी नाम पर आपत्ति होने पर फॉर्म-7 और नाम, पता, उम्र या लिंग जैसी प्रविष्टियों में सुधार के लिए फॉर्म-8 के जरिए आवेदन किया जा सकता है। सजेशन-ऑब्जेक्शन पर सुनवाई और अन्य प्रक्रिया के बाद 4 नवंबर 2026 को अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित की जाएगी।</p>
<p>आवश्यक दस्तावेज पूरे नहीं होने के कारण आवेदन खारिज होने पर मतदाता दस्तावेजों की पूर्ति कर दोबारा आवेदन कर सकता है। इसके अलावा लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा 24 के तहत अपील का भी प्रावधान है। वोटर लिस्ट में नाम जुड़वाने के लिए फॉर्म नंबर छह के साथ यह दस्तावेज होंगे जमा किया जा सकता है। इसमें किसी केंद्रीय, राज्य सरकार, सार्वजनिक उपक्रम द्वारा नियमित कर्मचारी, पेंशनर को जारी पहचान पत्र, पेंशन भुगतान आदेश, भारत में किसी सरकारी, स्थानीय निकाय बैंक डाकघर, एलआइसी, सार्वजनिक उपक्रम द्वारा एक सितंबर 1987 से पूर्व जारी कोई पहचान पत्र, प्रमाण-पत्र, दस्तावेज़। सक्षम प्राधिकारी द्वारा जारी जन्म प्रमाण-पत्र। पासपोर्ट। किसी मान्यता प्राप्त बोर्ड, विश्वविद्यालय द्वारा जारी मैट्रिक शैक्षणिक प्रमाण-पत्र। सक्षम राज्य प्राधिकारी द्वारा जारी स्थायी निवास प्रमाण-पत्र। वन अधिकार प्रमाण-पत्र। सक्षम प्राधिकारी द्वारा जारी ओबीसी, एससी, एसटी या अन्य जाति प्रमाण-पत्र। राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (जहां उपलब्ध हो)। राज्य, स्थानीय निकाय द्वारा तैयार पारिवार रजिस्टर शामिल है।</p>
<p><strong>महाराष्ट्र में SIR पर राहुल गांधी ने साधा निशाना :</strong><br />महाराष्ट्र में एसआईआर पर लोकसभा में नेता विपक्ष राहुल गांधी ने निशाना साधा है। उन्होंने कहा है कि मैंने पहले ही कहा था कि यह वोट चोरी है। राहुल गांधी ने पूछा है कि कौन सी लिस्ट सही थी लोकसभा, विधानसभा या फिर मौजूदा वोटर लिस्ट है इसका एक ही लक्ष्य सिर्फ BJP की जीत। वहीं शरद पवार गुट की सांसद सुप्रिया सुले ने कहा कि हर वोटर चेक कर लें कि उनका नाम वोटर लिस्ट में है या नहीं। संविधान के ज़रिए हर नागरिक को एक वोट का अधिकार है। इस अधिकार को न खोएं। हर किसी को चेक कर लेना चाहिए कि उनका नाम वोटर लिस्ट में है या नहीं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Mumbai</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 03 Sep 2026 10:49:40 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Online Desk]]></dc:creator>
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                <title>मुंबई: शिवसेना विवाद में उद्धव गुट का चुनाव आयोग पर निशाना</title>
                                    <description><![CDATA[<p>सर्वोच्च न्यायालय ने मंगलवार को महाराष्ट्र विधानसभा अध्यक्ष द्वारा संविधान की दसवीं अनुसूची के तहत शिवसेना के एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाले गुट के विधायकों को अयोग्य घोषित करने से इनकार करने को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई की। उद्धव ठाकरे गुट ने तर्क दिया कि विधायी विंग में विभाजन को अपने आप में राजनीतिक दल में विभाजन नहीं माना जा सकता है।</p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/51305/uddhav-group-targets-election-commission-in-mumbai-shiv-sena-controversy"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-08/photo.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>मुंबई: </strong>सर्वोच्च न्यायालय ने मंगलवार को महाराष्ट्र विधानसभा अध्यक्ष द्वारा संविधान की दसवीं अनुसूची के तहत शिवसेना के एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाले गुट के विधायकों को अयोग्य घोषित करने से इनकार करने को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई की। उद्धव ठाकरे गुट ने तर्क दिया कि विधायी विंग में विभाजन को अपने आप में राजनीतिक दल में विभाजन नहीं माना जा सकता है। शिवसेना (यूबीटी) की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिबल ने कहा कि भारतीय चुनाव आयोग (ईसीआई) चुनाव चिन्ह (आरक्षण और आवंटन) आदेश के अनुच्छेद 15 के तहत अधिकार क्षेत्र का प्रयोग तभी कर सकता है जब राजनीतिक दल में विभाजन के परिणामस्वरूप दो प्रतिद्वंद्वी गुट बन जाएं। चुनाव चिह्न (आरक्षण एवं आवंटन) आदेश, 1968 के अनुच्छेद 15 के तहत चुनाव आयोग को मान्यता प्राप्त राजनीतिक दल के प्रतिद्वंद्वी समूहों या गुटों द्वारा दल के नाम और चुनाव चिह्न पर दावा किए जाने पर विवादों का निपटारा करने का अधिकार दिया गया है। आयोग का निर्णय सभी प्रतिद्वंद्वी गुटों पर बाध्यकारी होगा।</p>
<p> </p>
<p>उन्होंने तर्क दिया कि विधायी दल की एक अलग बैठक इस तरह के विभाजन का कारण नहीं बन सकती। "चुनाव आयोग का कहना है कि शिवसेना में फूट पड़ने का संकेत विधायक दल की अलग बैठक का आयोजन था। विधायक दल की अलग बैठक का आयोजन कभी भी पार्टी में फूट का कारण नहीं बन सकता," सिबल ने कहा। भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और वी मोहना की पीठ भारतीय चुनाव आयोग के शिंदे गुट को आधिकारिक शिवसेना के रूप में मान्यता देने के फैसले को चुनौती देने वाली एक अलग याचिका पर भी सुनवाई कर रही थी।उद्धव ठाकरे गुट की ओर से पेश होते हुए सिबल ने तर्क दिया कि वैधानिक योजना एक राजनीतिक दल और उसके विधायी विंग के बीच अंतर करती है।लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 29ए और चुनाव चिह्न आदेश का हवाला देते हुए, सिबल ने प्रस्तुत किया कि विभाजन की आवश्यकता मूल राजनीतिक दल के स्तर पर पूरी होनी चाहिए।</p>
<p>सिबल के अनुसार, ईसीआई अनुच्छेद 15 के तहत कार्यवाही का उपयोग यह निर्धारित करने के लिए नहीं कर सकता था कि पार्टी का संविधान स्वयं लोकतांत्रिक था या नहीं।उन्होंने कहा, "ईसीआई केवल एक न्यायाधिकरण है। यह संविधान के लोकतांत्रिक या अलोकतांत्रिक स्वरूप का फैसला नहीं कर सकता।"सिबल ने तर्क दिया कि भले ही पार्टी के संविधान को अलोकतांत्रिक माना जाए, इसका परिणाम केवल पार्टी के पंजीकरण से संबंधित कार्रवाई हो सकता है, न कि उसके चुनावी चिन्ह को ऐसे गुट को हस्तांतरित करना जो स्वयं उसी संगठनात्मक संरचना का हिस्सा हो।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Mumbai</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 12 Aug 2026 10:21:39 +0530</pubDate>
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                <title>मुंबई: वोटर लिस्ट रिवीजन में बदलाव, चुनाव आयोग ने जारी किया नया कार्यक्रम</title>
                                    <description><![CDATA[<p>भारत निर्वाचन आयोग ने महाराष्ट्र में 1 अक्टूबर 2026 को अर्हता तिथि मानते हुए विशेष संक्षिप्त मतदाता सूची पुनरीक्षण कार्यक्रम के संशोधित कार्यक्रम की घोषणा की है। संशोधित कार्यक्रम के अनुसार, बूथ लेवल अधिकारी 30 जून से 17 अगस्त 2026 तक घर-घर जाकर मतदाताओं का सत्यापन करेंगे। वहीं, मतदान केंद्रों के युक्तिकरण और पुनर्गठन का कार्य भी 17 अगस्त 2026 तक पूरा कर लिया जाएगा। </p>
<p> </p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/51216/changes-in-mumbai-voter-list-revision-election-commission-released-new"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-08/images---2026-08-08t111044.043.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>मुंबई: </strong>भारत निर्वाचन आयोग ने महाराष्ट्र में 1 अक्टूबर 2026 को अर्हता तिथि मानते हुए विशेष संक्षिप्त मतदाता सूची पुनरीक्षण कार्यक्रम के संशोधित कार्यक्रम की घोषणा की है। संशोधित कार्यक्रम के अनुसार, बूथ लेवल अधिकारी 30 जून से 17 अगस्त 2026 तक घर-घर जाकर मतदाताओं का सत्यापन करेंगे। वहीं, मतदान केंद्रों के युक्तिकरण और पुनर्गठन का कार्य भी 17 अगस्त 2026 तक पूरा कर लिया जाएगा। </p>
<p> </p>
<p>मतदाता सूची का प्रारूप (ड्राफ्ट) 24 अगस्त 2026 को प्रकाशित किया जाएगा। इसके बाद 24 अगस्त से 23 सितंबर 2026 तक दावे और आपत्तियां स्वीकार की जाएंगी। प्राप्त दावों और आपत्तियों की सुनवाई तथा उनका निपटारा 24 अगस्त से 22 अक्टूबर 2026 के बीच किया जाएगा। सभी प्रक्रियाएं पूरी होने के बाद महाराष्ट्र की अंतिम मतदाता सूची 27 अक्टूबर 2026 को प्रकाशित की जाएगी। यह जानकारी भारत निर्वाचन आयोग द्वारा जारी संशोधित कार्यक्रम के माध्यम से दी गई है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Maharashtra</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 08 Aug 2026 11:11:33 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Online Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>नई दिल्ली : 'चुनाव आयोग को नियुक्ति के पूरे अधिकार, नए आदेश की जरूरत नहीं'; टीएमसी को सुप्रीम कोर्ट से झटका</title>
                                    <description><![CDATA[<p>पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव की मतगणना से पहले टीएमसी को सुप्रीम कोर्ट से एक बड़ झटका लगा है। चुनाव आयोग द्वारा वोटों की गिनती के लिए मुख्य रूप से केंद्र सरकार और पीएसयू के कर्मचारियों को तैनात करने के निर्देश के खिलाफ तृणमूल कांग्रेस ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था। इस अहम मुद्दे को सुलझाने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने आज टीएमसी की याचिका पर सुनवाई की।</p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/49631/new-delhi-election-commission-has-full-powers-of-appointment-no"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-05/download---2026-05-02t131314.131.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>नई दिल्ली :</strong> पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव की मतगणना से पहले टीएमसी को सुप्रीम कोर्ट से एक बड़ झटका लगा है। चुनाव आयोग द्वारा वोटों की गिनती के लिए मुख्य रूप से केंद्र सरकार और पीएसयू के कर्मचारियों को तैनात करने के निर्देश के खिलाफ तृणमूल कांग्रेस ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था। इस अहम मुद्दे को सुलझाने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने आज टीएमसी की याचिका पर सुनवाई की। विवाद पर सुप्रीम कोर्ट ने कोई भी नया आदेश पारित करने से साफ इनकार कर दिया है। दरअसल, चुनाव आयोग ने अदालत को आश्वासन दिया है कि वह अपने 13 अप्रैल के परिपत्र (सर्कुलर) का पूरी तरह से पालन करेगा।</p>
<p> </p>
<p>तृणमूल कांग्रेस के मुताबिक, इस सर्कुलर में मतगणना प्रक्रिया में केंद्र सरकार के कर्मचारियों के साथ-साथ राज्य सरकार के कर्मचारियों की तैनाती का भी प्रावधान है। चुनाव आयोग के वकील के इस बयान के बाद, सुप्रीम कोर्ट ने केवल यह दोहराया कि चुनौती दिए गए सर्कुलर को लागू किया जाएगा और मामले में आगे कोई अन्य आदेश देने से मना कर दिया। साथ ही यह भी कहा कि चुनाव आयोग को नियुक्ति के पूरे अधिकार हैं।</p>
<p><strong>फर्क नहीं पड़ता कि अधिकारी केंद्र का है- सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी</strong><br />सुनवाई के दौरान जस्टिस बागची ने यह भी कहा कि मतगणना के दौरान वहां हर राजनीतिक दल के चुनाव एजेंट मौजूद रहेंगे। इसलिए, इससे कोई खास फर्क नहीं पड़ता कि पर्यवेक्षक केंद्र सरकार का नामित अधिकारी है या नहीं। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि अधिकारियों की तैनाती पूरी तरह से चुनाव आयोग की अपनी संतुष्टि पर निर्भर करती है, क्योंकि वहां सभी पार्टियों के एजेंट मौजूद होंगे। <br />क्या है पूरा मामला?<br />यह पूरा मामला वोटों की गिनती करने वाले कर्मचारियों की नियुक्ति से जुड़ा हुआ है। चुनाव आयोग ने निर्देश दिया था कि बंगाल में वोटों की गिनती के लिए केंद्रीय कर्मचारियों को मतगणना पर्यवेक्षक (सुपरवाइजर) बनाया जाएगा। टीएमसी इस फैसले का विरोध कर रही है। उनका मानना है कि इस प्रक्रिया में राज्य सरकार के कर्मचारियों को भी बराबर शामिल किया जाना चाहिए। इसी आदेश को चुनौती देने के लिए टीएमसी ने अर्जी दी थी, जिस पर जस्टिस नरसिम्हा और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की बेंच ने सुनवाई की। </p>
<p><strong>सुप्रीम कोर्ट के जजों ने नियमों को लेकर क्या स्पष्ट किया? </strong><br />मामले की सुनवाई के दौरान जस्टिस जॉयमाल्या बागची ने नियमों को लेकर स्थिति साफ की।<br />उन्होंने कहा कि नियमों में यह विकल्प पूरी तरह से खुला है कि काउंटिंग सुपरवाइजर और काउंटिंग असिस्टेंट केंद्र सरकार के भी हो सकते हैं और राज्य सरकार के भी।<br />कोर्ट ने कहा कि जब यह विकल्प खुला हुआ है, तो हम यह बिल्कुल नहीं कह सकते कि चुनाव आयोग का यह नोटिफिकेशन नियमों के खिलाफ है।<br />जस्टिस बागची ने यह भी स्पष्ट किया कि चुनाव आयोग के पास यह अधिकार है कि वह कह सकता है कि दोनों अधिकारी केंद्र सरकार के ही होंगे। <br /> कपिल सिब्बल ने कोर्ट में क्या दलील दी? <br />टीएमसी की तरफ से पेश हुए वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने चुनाव आयोग के सर्कुलर (परिपत्र) पर सवाल उठाए।<br />सिब्बल ने कोर्ट में दलील दी कि चुनाव आयोग के सर्कुलर में खुद ऐसा स्पष्ट तौर पर नहीं कहा गया है कि केवल केंद्रीय कर्मचारी ही होंगे।<br />टीएमसी का तर्क है कि चुनाव आयोग का यह कदम जानबूझकर राज्य सरकार के कर्मचारियों को गिनती से दूर रखने के लिए उठाया गया है। <br />सुप्रीम कोर्ट ने टीएमसी की दलीलों पर क्या जवाब दिया?<br />वकील सिब्बल की दलीलों पर जस्टिस बागची ने तुरंत अपना पक्ष रखा। उन्होंने ने कहा कि अगर चुनाव आयोग ने ऐसा कहा भी होता, तब भी हम उन्हें इस बात के लिए गलत नहीं ठहरा सकते थे। इसका मुख्य कारण यह है कि नियम साफ तौर पर कहते हैं कि मगणना के लिए केंद्र सरकार या राज्य सरकार के अधिकारियों को नियुक्त किया जा सकता है।  </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Mumbai</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 02 May 2026 13:15:36 +0530</pubDate>
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