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                <title>malnutrition - Rokthok Lekhani</title>
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                <title>कुपोषण से निपटने के लिए सामुदायिक रसोई चलाने की मांग पर आदेश देने से उच्चतम न्यायालय का इनकार...  </title>
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                        <![CDATA[<p style="text-align:justify;">न्यायमूर्ति बेला एम त्रिवेदी और न्यायमूर्ति पंकज मिथल की पीठ ने कहा कि वैकल्पिक कल्याण योजनाओं के कार्यान्वयन को सुनिश्चित करने के लिए यह राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के लिए खुला है। पीठ ने कहा, "लोगों को किफायती मूल्य पर पर्याप्त मात्रा में भोजन की पहुंच सुनिश्चित करने के लिए भारत संघ और राज्यों द्वारा राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम और अन्य कल्याणकारी योजनाएं लागू की जा रही हैं। हम इस संबंध में कोई और निर्देश जारी करने का प्रस्ताव नहीं करते हैं।"</p>]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/28846/supreme-court-refuses-to-give-order-on-the-demand-of-running-community-kitchens-to-tackle-malnutrition"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2024-02/download-(17).jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली :</strong> उच्चतम न्यायालय ने भूख और कुपोषण से निपटने के लिए सामुदायिक रसोई स्थापित करने की योजना बनाने की मांग वाली याचिका पर कोई भी निर्देश देने से गुरुवार को यह कहते हुए इनकार कर दिया कि राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (एनएफएसए) और अन्य केन्द्र एवं राज्य द्वारा कल्याणकारी योजनाएं क्रियान्वित की जा रही हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">न्यायमूर्ति बेला एम त्रिवेदी और न्यायमूर्ति पंकज मिथल की पीठ ने कहा कि वैकल्पिक कल्याण योजनाओं के कार्यान्वयन को सुनिश्चित करने के लिए यह राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के लिए खुला है। पीठ ने कहा, "लोगों को किफायती मूल्य पर पर्याप्त मात्रा में भोजन की पहुंच सुनिश्चित करने के लिए भारत संघ और राज्यों द्वारा राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम और अन्य कल्याणकारी योजनाएं लागू की जा रही हैं। हम इस संबंध में कोई और निर्देश जारी करने का प्रस्ताव नहीं करते हैं।"<br /><br />पीठ ने अपने आदेश में कहा कि हमने इस बात की जांच नहीं की है कि क्या सामुदायिक रसोई की अवधारणा एनएफएसए के उद्देश्य को प्राप्त करने के लिए राज्यों के लिए बेहतर या समझदार विकल्प है। इसके बजाय, हम वैकल्पिक कल्याण योजनाओं के कार्यान्वयन को सुनिश्चित करने के लिए इसे राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के लिए खुला छोड़ देंगे।</p>]]>
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                <pubDate>Thu, 22 Feb 2024 16:45:52 +0530</pubDate>
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                <title>पालघर जिले में भूख और कुपोषण से दस दिनों में दो बच्चियों की मौत...</title>
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                        <![CDATA[पालघर जिले में भूख और कुपोषण से आदिवासियों के बच्चों की मौतें विकास की पोल खोलने के लिए काफी है। कुपोषण मिटाने को लेकर राज्य व केंद्र सरकार के तमाम अभियान यहां के आदिवासी बाहुल्य इलाकों में लाचार नजर आ रहे हैं। ]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/17083/two-girls-died-in-palghar-district-due-to-hunger-and-malnutrition-in-ten-days"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2023-01/download-(7)10.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>पालघर : </strong>पालघर जिले में भूख और कुपोषण से आदिवासियों के बच्चों की मौतें विकास की पोल खोलने के लिए काफी है। कुपोषण मिटाने को लेकर राज्य व केंद्र सरकार के तमाम अभियान यहां के आदिवासी बाहुल्य इलाकों में लाचार नजर आ रहे हैं। कुपोषण एक फिर मोखाडा इलाके में अपना कहर बरपा रहा है। यहां 10 दिनों में कुपोषण ने 2 बच्चों की बलि ले ली है। दोनों बच्चे सावर्डे गांव के रहने वाले हैं और इनके नाम दुर्गा निंबारे और रेणुका मुकने है।</p>
<p style="text-align:justify;">बच्चों की मौत के बाद आरोप लग रहे हैं कि मृतक बच्चों को कुपोषित न दिखे इसके लिए इनके वजन अधिक लिखे गए थे। पालक मंत्री से मामले कार्रवाई की मांग की गई है। इस घटना से आक्रोशित ग्राम पंचायत उपसरपंच, सदस्यों व ग्रामीणों ने गहन जांच कर दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है। मिली जानकारी के अनुसार दुर्गा कल्पेश निंबारे (11 माह) की तबीयत खराब रहती थी।</p>
<p style="text-align:justify;">इसलिए, उसके माता-पिता ने दिसंबर में उसे इलाज के लिए खोडाला प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती कराया गया। तबियत बिगड़ने के बाद उसे इलाज के लिए जव्हार के उपजिला अस्पताल में भर्ती कराया गया। इलाज के दौरान दुर्गा की अस्पताल में मौत हो गई। इसी तरह रेणुका मुकने (3 महीने की) कुपोषण से मौत हो गई। रेणुका के परिजन कुछ महीनों से भिवंडी में रहकर मजदूरी करते थे। सावर्डे के एक ही आंगनबाड़ी क्षेत्र में दस दिन के अंदर दो कुपोषित बच्चों की मौत से हड़कंप मच गया है। </p>
<p style="text-align:justify;">जानकारी सामने आई है किमृतिका दुर्गा निंबारे की दिसंबर माह में आंगनबाड़ी में उपस्थिति के दौरान बच्ची का वजन 9 किलो 100 ग्राम लिखा गया। जिससे यह साबित होता था कि बच्ची कुपोषित नहीं हैं, जबकि जब दुर्गा को अस्पताल में भर्ती कराया गया तो उनका वजन सिर्फ 6 किलो ही था। आरोप है कि उन्हें बच्ची के कुपोषित और पोषाहार देने संबंधी उन्हे कोई सूचना नहीं दी गई।</p>
<p style="text-align:justify;">उपसरपंच हनुमंत पादिर ने कहा कि पोषण आहार कुपोषित बच्चों तक पहुंचे इसकी व्यवस्था की जाए। मृतकों की मौत की जांच कर दोषियों पर सख्त कार्यवाही की जाए। जिला परिषद के सीईओ भानूदास पालवे ने कहा कि दोनो बच्चे बीमार थे उनकी मौत की जांच के आदेश दिए गए है। कुपोषण के खात्मे के लिए हर संभव प्रयास किए जा रहे है।</p>]]>
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                <pubDate>Tue, 17 Jan 2023 12:26:12 +0530</pubDate>
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