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                <title>मुंबई: 'पूरा मुंबई गंदगी से भरा है': कचरे की समस्या पर हाईकोर्ट सख्त, बीएमसी को फटकार; किसे दी कार्रवाई की चेतावनी?</title>
                                    <description><![CDATA[<p>मुंबई की सड़कों पर जगह-जगह कचरा जमा होने को लेकर बॉम्बे हाईकोर्ट ने गुरुवार को नगर निकाय को कड़ी फटकार लगाई। अदालत ने कहा कि 'पूरा शहर गंदगी से भरा है' और स्थिति में सुधार नहीं होने पर वार्ड के अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की चेतावनी दी।  </p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/51791/mumbai-is-full-of-filth-high-court-is-strict-on"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-09/images---2026-09-11t123706.614.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>मुंबई: </strong>मुंबई की सड़कों पर जगह-जगह कचरा जमा होने को लेकर बॉम्बे हाईकोर्ट ने गुरुवार को नगर निकाय को कड़ी फटकार लगाई। अदालत ने कहा कि 'पूरा शहर गंदगी से भरा है' और स्थिति में सुधार नहीं होने पर वार्ड के अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की चेतावनी दी।  </p>
<p>कांजुरमार्ग डंपिंग ग्राउंड के आसपास प्रदूषण से जुड़ी कई याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति गिरीश कुलकर्णी और न्यायमूर्ति नीला गोखले की पीठ ने बृहन्मुंबई नगर निगम (बीएमसी) को आड़े हाथ लिया। पीठ ने कहा कि 'पूरा नगर निकाय तंत्र निष्क्रिय है।'</p>
<p><strong>हाईकोर्ट ने पीएम मोदी के किस सुझाव का किया जिक्र?</strong><br />अदालत ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से कुछ समय पहले दिए गए सुझाव का जिक्र करते हुए सफाई का संदेश फैलाने के लिए सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स की मदद लेने की सलाह भी दी। पीठ ने कहा, 'हर जगह सिर्फ गंदगी है। हम बीएमसी अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई करेंगे। लगता है कि तंत्र काम नहीं कर रहा है। आपको एक उचित एसओपी की जरूरत है। हम खुद को अंतरराष्ट्रीय शहर कैसे कह सकते हैं?'</p>
<p>हाईकोर्ट ने कहा कि नगर आयुक्त और वरिष्ठ अधिकारियों ने कुछ कदम उठाए हैं, लेकिन जमीन पर स्थिति में ज्यादा सुधार दिखाई नहीं दे रहा है। पीठ ने कहा कि वार्ड अधिकारी भी कथित तौर पर काम नहीं कर रहे हैं। अदालत ने महाराष्ट्र सरकार को सार्वजनिक सड़कों पर कचरा फेंकने या गंदगी करने वालों पर भारी जुर्माना लगाने और उनके खिलाफ आपराधिक मुकदमा चलाने पर विचार करने का सुझाव दिया।</p>
<p><strong>बॉम्बे हाईकोर्ट ने बीएमसी को दी क्या चेतावनी?</strong><br />पीठ ने कहा, 'यह गंभीर मामला है। यह बहुत पीड़ादायक है। शहर में कुछ ऐसे स्थान चिह्नित हैं, जहां हमेशा कचरे के ढेर दिखाई देते हैं और फिर भी संबंधित वार्ड अधिकारी कोई कार्रवाई नहीं करते।' अदालत ने कहा, 'अब हम इन अधिकारियों को भी जवाबदेह और जिम्मेदार ठहराएंगे। उनके खिलाफ भी कार्रवाई होनी चाहिए। पूरा शहर गंदगी से भरा है। बहुत हो गया। बीएमसी हमें झूठे आश्वासन दे रही है।'<br />पीठ ने कहा कि उसके पास अब बीएमसी आयुक्त को व्यवस्था सुधारने और जिम्मेदारी तय करने का निर्देश देने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा है। अदालत ने कहा, 'ऐसा लगता है कि पूरा नगर निकाय तंत्र निष्क्रिय है। किसी के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की जाती। अब हम कड़ा आदेश पारित करेंगे। एक सीमा होती है।'</p>
<p><strong>कचरे को लेकर सख्त कदम उठाने के निर्देश</strong><br />अदालत ने बीएमसी को अपनी मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) पेश करने का आदेश दिया। साथ ही 26 वार्डों में सार्वजनिक सड़कों की सफाई और स्वच्छता की जिम्मेदारी संभालने वाले सभी अधिकारियों की सूची देने को कहा। हाईकोर्ट ने कहा, 'जैसे ही हमें सड़क पर कोई कचरा या गंदगी मिलेगी, हम संबंधित अधिकारी को हटा देंगे। वे सार्वजनिक सेवा में रहने के लायक नहीं हैं।'</p>
<p>अदालत ने नगर निकाय से कचरा अलग-अलग करने की व्यवस्था को लेकर भी सख्त कदम उठाने को कहा। पीठ ने कहा कि वह बीएमसी को एक आदर्श नगर निगम के रूप में देखना चाहती है, लेकिन ऐसा होता नजर नहीं आ रहा है। मामले की अगली सुनवाई 7 अक्तूबर को होगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Mumbai</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 11 Sep 2026 12:38:15 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Online Desk]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>मुंबई : आदिवासी छात्रों की मांगों पर महाराष्ट्र सरकार का बड़ा फैसला खत्म हुआ अनशन </title>
                                    <description><![CDATA[<p>महाराष्ट्र में आदिवासी छात्रों के लंबे आंदोलन के बाद आखिरकार राज्य सरकार ने उनकी मांगों को स्वीकार कर लिया है। मुख्यमंत्री **देवेंद्र फडणवीस** के नेतृत्व वाली सरकार ने प्रदर्शनकारी छात्रों के प्रतिनिधिमंडल से बातचीत के बाद उनकी सभी प्रमुख मांगों को मानने का फैसला किया। इसके बाद छात्रों का अनशन खत्म होने की उम्मीद जताई जा रही है। आदिवासी छात्रों का यह आंदोलन केवल छात्रावास और शिक्षा व्यवस्था तक सीमित नहीं था, बल्कि इसमें सरकारी नौकरियों में अनुसूचित जनजाति वर्ग के उम्मीदवारों की भर्ती और आदिवासी बच्चों की सुरक्षा से जुड़े मुद्दे भी शामिल थे।</p>
<p> </p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/51605/big-decision-of-maharashtra-government-on-the-demands-of-mumbai"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-08/images---2026-08-30t120701.209.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>मुंबई : </strong>महाराष्ट्र में आदिवासी छात्रों के लंबे आंदोलन के बाद आखिरकार राज्य सरकार ने उनकी मांगों को स्वीकार कर लिया है। मुख्यमंत्री **देवेंद्र फडणवीस** के नेतृत्व वाली सरकार ने प्रदर्शनकारी छात्रों के प्रतिनिधिमंडल से बातचीत के बाद उनकी सभी प्रमुख मांगों को मानने का फैसला किया। इसके बाद छात्रों का अनशन खत्म होने की उम्मीद जताई जा रही है। आदिवासी छात्रों का यह आंदोलन केवल छात्रावास और शिक्षा व्यवस्था तक सीमित नहीं था, बल्कि इसमें सरकारी नौकरियों में अनुसूचित जनजाति वर्ग के उम्मीदवारों की भर्ती और आदिवासी बच्चों की सुरक्षा से जुड़े मुद्दे भी शामिल थे।</p>
<p> </p>
<p><strong>क्यों आंदोलन कर रहे थे एसटी छात्र?</strong><br /> महाराष्ट्र के आदिवासी छात्रों ने पुणे, नागपुर और नासिक समेत कई शहरों में अनशन शुरू किया था। इस आंदोलन की बड़ी वजह गढ़चिरौली जिले के एक आदिवासी आवासीय स्कूल में हुई दर्दनाक घटना थी, जहां सांप के काटने से तीन आदिवासी छात्राओं की मौत हो गई थी। इस घटना के बाद छात्रों ने आदिवासी आश्रम स्कूलों और छात्रावासों की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाए थे। छात्रों का आरोप था कि आदिवासी बच्चों के लिए बनाए गए आवासीय स्कूलों और छात्रावासों में मूलभूत सुविधाओं की कमी है। सुरक्षा व्यवस्था कमजोर होने के कारण बच्चों की जान खतरे में पड़ रही है।</p>
<p><strong>छात्रों की प्रमुख मांगें क्या थीं? </strong><br />आंदोलन कर रहे एसटी छात्रों की कई मांगें थीं। इनमें सबसे अहम मांगें थीं— * आदिवासी छात्रों के लिए सुरक्षित और बेहतर छात्रावास व्यवस्था * आश्रम स्कूलों में सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम * सरकारी सेवाओं में एसटी उम्मीदवारों की भर्ती प्रक्रिया को तेज करना * छात्रों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराना * शिक्षा संस्थानों में जरूरी संसाधन मुहैया कराना छात्रों का कहना था कि सरकार आदिवासी बच्चों के अधिकारों और सुरक्षा को प्राथमिकता दे।</p>
<p><strong>सरकार ने कैसे किया समाधान? </strong><br />आदिवासी विकास मंत्री **अशोक उइके** ने जानकारी दी कि मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने आंदोलन कर रहे छात्रों के प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात के बाद उनकी मांगों को स्वीकार कर लिया है। सरकार ने भरोसा दिया कि छात्रों की समस्याओं पर गंभीरता से काम किया जाएगा। मंत्री ने बताया कि सरकार तीन महीने बाद दोबारा समीक्षा बैठक करेगी, जिसमें यह देखा जाएगा कि लिए गए फैसलों को जमीन पर कितना लागू किया गया है और कहीं कोई समस्या तो नहीं आ रही।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Mumbai</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 30 Aug 2026 12:08:07 +0530</pubDate>
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                <title>मुंबई : चीनी के बढ़ते दाम पर महाराष्ट्र सरकार का कदम, केंद्र को लिखा पत्र</title>
                                    <description><![CDATA[<p>चीनी की कीमतें बढ़ने से आमजनों में गुस्सा बढ़ता जा रहा है। साथ ही सियासी घमाशान भी मचने के आसार हैं। इस बीच महाराष्ट्र सरकार ने केंद्र सरकार को पत्र लिखा है। पत्र में मांग की गई है कि खाने व कर्मशियल उपयोग के लिए चीनी की कीमतें अलग-अलग रखी जाएं। चीनी की बढ़ी कीमतों का सीधा असर आम जनता पर पड़ रहा है। त्योहारों के मौसम में चीनी की बढ़ती कीमतों की वजह से आम ग्राहकों का घरेलू बजट लडखड़ा गया है। क्योंकि 50 रुपये प्रति किलो मिलने वाली चीनी सीधे 65 से 70 रुपये प्रति किलो पर पहुंच गई है।</p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/51545/maharashtra-governments-action-on-rising-sugar-prices-letter-written-to"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-08/images---2026-08-25t122101.564.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>मुंबई: </strong>चीनी की कीमतें बढ़ने से आमजनों में गुस्सा बढ़ता जा रहा है। साथ ही सियासी घमाशान भी मचने के आसार हैं। इस बीच महाराष्ट्र सरकार ने केंद्र सरकार को पत्र लिखा है। पत्र में मांग की गई है कि खाने व कर्मशियल उपयोग के लिए चीनी की कीमतें अलग-अलग रखी जाएं। चीनी की बढ़ी कीमतों का सीधा असर आम जनता पर पड़ रहा है। त्योहारों के मौसम में चीनी की बढ़ती कीमतों की वजह से आम ग्राहकों का घरेलू बजट लडखड़ा गया है। क्योंकि 50 रुपये प्रति किलो मिलने वाली चीनी सीधे 65 से 70 रुपये प्रति किलो पर पहुंच गई है।</p>
<p> </p>
<p>सहकारिता मंत्री बाबासाहेब पाटिल ने इस संबंध में केंद्र सरकार को पत्र लिखा है। उन्होंने मांग की है कि खाने के लिए चीनी का कोटा और कमर्शियल इस्तेमाल के लिए चीनी का कोटा अलग-अलग होना चाहिए। खाने की चीनी की कीमतें कम होनी चाहिए। गन्ने की एफआरपी और चीनी के एमएसपी को जोड़ना होगा. तभी उत्पादक बचेंगे और गन्ना किसानों को कीमत मिलेगी।</p>
<p>सहकारिता मंत्री पाटिल के मुताबिक चाय और खाने के लिए 10 फीसदी चीनी इस्तेमाल होती है। जबकि बिस्कुट, कोल्ड ड्रिंक्स और दूसरे कमर्शियल कामों के लिए बड़ी मात्रा में चीनी की जरूरत होती है। इसलिए केंद्र सरकार को एक प्रस्ताव भेजा गया है। इसमें मांग की गई है कि आम जनता को जितनी चीनी की आवश्यकता होती है, उसका कोटा अलग रखा जाए और उसकी कीमतें अलग रखी जाएं। केंद्र सरकार चीनी इंपोर्ट की योजना भी बना रही है, ताकि त्योहारी सीजन में लोगों को राहत मिल सके।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Maharashtra</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 25 Aug 2026 12:21:42 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Online Desk]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>मुंबई: एफडीए का मुंबई क्रिकेट एसोसिएशन परिसरों पर एक्शन, 5 आउटलेट्स के फूड लाइसेंस सस्पेंड</title>
                                    <description><![CDATA[<p>महाराष्ट्र के खाद्य एवं औषधि प्रशासन ने मुंबई क्रिकेट एसोसिएशन परिसर में मौजूद 5 रेस्टोरेंट के लाइसेंस निलंबित कर दिए हैं। यह कार्रवाई खाद्य सुरक्षा के नियमों के कथित उल्लंघन और साफ-सफाई, रख-रखाव व रेफ्रिजरेशन में भारी कमियां पाए जाने के बाद की गई है। ब</p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/51543/mumbai-fdas-action-on-mumbai-cricket-association-premises-food-license"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-08/images---2026-08-25t121754.990.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>मुंबई: </strong>महाराष्ट्र के खाद्य एवं औषधि प्रशासन ने मुंबई क्रिकेट एसोसिएशन परिसर में मौजूद 5 रेस्टोरेंट के लाइसेंस निलंबित कर दिए हैं। यह कार्रवाई खाद्य सुरक्षा के नियमों के कथित उल्लंघन और साफ-सफाई, रख-रखाव व रेफ्रिजरेशन में भारी कमियां पाए जाने के बाद की गई है। बता दें कि एफडीए की तरफ से चलाए जा रहे एक राज्यव्यापी अभियान के तहत कुल 11 खाद्य प्रतिष्ठानों के लाइसेंस निलंबित किए गए हैं, जिनमें अकेले 5 आउटलेट्स एमसीए परिसर के शामिल हैं।</p>
<p> </p>
<p><strong>राज्यभर में एफडीए की बड़ी कार्रवाई </strong><br />गौर करने वाली बात यह है कि इस अभियान के दौरान  एफडीए ने राज्य भर में 45 होटलों, रेस्तरां, भोजनालयों और ढाबों का निरीक्षण किया। इस दौरान 25 जगहों पर छापे मारे गए और 33 प्रतिष्ठानों को सुधार नोटिस जारी किए गए।</p>
<p>ध्यान रहे कि एफडीए अधिकारियों ने 20 अगस्त को एमसीए को परिसरों का निरीक्षण किया था, जिसके बाद आउटलेट्स पर कार्रवाई की गई। इसमें परमिट रूम, पवेलियन, मेडिटेरेनियन, ओरिएंटल स्विंग और क्बवे एंड पेस्ट्री काउंटर शामिल है। </p>
<p><strong>स्वच्छता के मानकों में पाई गई कमियां</strong><br />गौरतलब है कि इन सभी आउटलेट्स पर फूड हैंडलिंग (खाना संभालने के तरीके), स्टोरेज (भंडारण), रेफ्रिजरेशन और स्वच्छता के मानकों में गंभीर कमियां पाई गईं, जिसके चलते प्रशासन ने यह कड़ा कदम उठाया है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Mumbai</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 25 Aug 2026 12:19:36 +0530</pubDate>
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