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                <title>drown - Rokthok Lekhani</title>
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                <title>दिवा की आधी आबादी मानसून के दौरान डूबेगी ?</title>
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                        <![CDATA[<p style="text-align:justify;">दिवा प्रति वर्ष की भांति इस वर्ष भी मानसून से पूर्व बड़े पैमाने पर नाला सफाई अभियान चलाया गया। मनपा आयुक्त सौरभ राव द्वारा खुद नालों की सफाई का निरीक्षण किया गया। इसके बावजूद दिवा स्थित वक्रतुंड नगर नाला, मुंब्रा देवी कालोनी नाला, बेडेकर नगर नाला तथा रिलायंस टावर नाला आदि के सफाई की पोल खुल गई है।</p>]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/31561/will-half-the-population-of-diva-drown-during-monsoon"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2024-06/diva.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>दिवा : </strong>दिवा प्रति वर्ष की भांति इस वर्ष भी मानसून से पूर्व बड़े पैमाने पर नाला सफाई अभियान चलाया गया। मनपा आयुक्त सौरभ राव द्वारा खुद नालों की सफाई का निरीक्षण किया गया। इसके बावजूद दिवा स्थित वक्रतुंड नगर नाला, मुंब्रा देवी कालोनी नाला, बेडेकर नगर नाला तथा रिलायंस टावर नाला आदि के सफाई की पोल खुल गई है।</p>
<p style="text-align:justify;">अन्य नालों की जेसीपी की मदद से नालों के सफाई करने और अंदर जामे कचरों को बाहर निकालने के बजाय ऊपर ऊपर हाथ की सफाई की गई है। वक्रतुंड स्थित नाले में इतने कचरे भरे हुए हैं कि वह नाला कम कचरों का नाला ज्यादा दिखाई दे रहा है। दिवा के सभी नाले खाड़ी में मिलते हैं। बरसात के दौरान नालों में भरे कचरे खाड़ी में बह जाते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">अगर कही फंस गए तो नालों का पानी ओवर फ्लो होकर वस्तियों में घुस जाता है। प्रतिवर्ष नालों का पानी घरों में घुसने और घर में रखे सामानों के खराब होने की घटनाएं देखने को मिलती रही है। नालों की सफाई ठीक ढंग से हो, यह देखना मनपा अधिकारियों का काम है।</p>
<p style="text-align:justify;">दिवा में जिस तरह की साफ सफाई हुई है, उसके लिए दिवा प्रभाग समिति के सहायक आयुक्त अक्षय गुड़दे को जिम्मेदार माना जा रहा है। शिवसेना यूबीटी के शहर संगठक रोहिदास मुंडे ने गुडदे पर ठेकेदारों के साथ मिली भगत का आरोप लगाया है और मुख्यमंत्री, मनपा आयुक्त को ट्वीट कर गुड़दे के निलंबन की मांग की है।</p>]]>
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                                                            <category>Mumbai</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 10 Jun 2024 14:18:03 +0530</pubDate>
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                        <![CDATA[Online Desk]]>
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                <title>ग्लोबल वार्मिंग :  मुंबई, कोलकाता, दुबई, लंदन और न्यूयॉर्क समेत दुनिया के 36 बड़े शहर जल्द ही गहरे समंदर में डूब सकते हैं</title>
                                    <description>
                        <![CDATA[<p>समुद्र के स्तर में बेतहाशा बढ़ोतरी के बीच विशेषज्ञों ने एक भयावह भविष्यवाणी की है. एक रिपोर्ट के मुताबिक दुनिया भर के 36 प्रमुख शहरों पर सबसे पहले खतरा मंडरा रहा है. इस लिस्ट में सैन फ्रांसिस्को और न्यूयॉर्क शहर सहित अमेरिका के 10 प्रमुख शहर शामिल हैं.<br />वहीं इस लिस्ट में भारत के मुंबई और कोलकाता के साथ बांग्लादेश के ढाका का नाम भी शामिल है.</p>]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/28808/global-warming--36-big-cities-of-the-world-including-mumbai--kolkata--dubai--london-and-new-york-may-soon-drown-in-the-deep-sea"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2024-02/download-(2)27.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली : </strong>मुंबई, कोलकाता, दुबई, लंदन और न्यूयॉर्क समेत दुनिया के 36 बड़े शहर जल्द ही गहरे समंदर में डूब सकते हैं. ग्लोबल वार्मिंग और उससे जुड़े खतरे अब तक के सबसे ऊपरी स्तर पर पहुंच गए हैं. भूवैज्ञानिकों और पारिस्थितिकीविदों ने शुरू में जो सोचा था, महासागरों के पानी का स्तर उससे भी ज्यादा और तेजी के साथ बढ़ रहा है.</p>
<p style="text-align:justify;">समुद्र के स्तर में बेतहाशा बढ़ोतरी के बीच विशेषज्ञों ने एक भयावह भविष्यवाणी की है. एक रिपोर्ट के मुताबिक दुनिया भर के 36 प्रमुख शहरों पर सबसे पहले खतरा मंडरा रहा है. इस लिस्ट में सैन फ्रांसिस्को और न्यूयॉर्क शहर सहित अमेरिका के 10 प्रमुख शहर शामिल हैं.<br />वहीं इस लिस्ट में भारत के मुंबई और कोलकाता के साथ बांग्लादेश के ढाका का नाम भी शामिल है.</p>
<p style="text-align:justify;">समुद्र का स्तर बढ़ने और बार-बार आने वाली बाढ़ से दुनिया भर के 36 शहरों में रहने वाले 22 करोड़ से अधिक लोगों पर असर होगा. कुछ मामलों में तो इन पर पहले से ही असर हो रहा है. अगर समुद्र का स्तर 1.5 मीटर बढ़ जाता है, तो घनी आबादी वाले या सबसे लोकप्रिय पर्यटक आकर्षणों वाले शहर सबसे पहले समंदर के पानी में डूब सकते हैं. यह हालात वैश्विक तापमान 5.4 डिग्री फारेनहाइट बढ़ने पर पैदा होने की भविष्यवाणी की गई है.</p>
<p style="text-align:justify;">सबसे पहले डूबने वाले शहरों की लिस्ट में टोक्यो टॉप पर है, जहां लगभग 37,435,100 लोग रहते हैं. इसके ठीक बाद भारत में मुंबई दूसरे स्थान पर है. सपनों के शहर मुंबई में महालक्ष्मी मंदिर, मन्नत और पर्यटकों के दूसरे आकर्षणों में मछलियों और समुद्री जीवों को देखने का खतरा होगा. इन शहरों में दुनिया भर के पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र थाईलैंड का बैंकाक और यूएई का दुबई भी शामिल है.</p>
<p style="text-align:justify;">दुनिया के जो 36 शहर सबसे पहले पानी के अंदर समा जाएंगे, उनके नाम को TheSwiftest.com के शोधकर्ताओं ने क्लाइमेट सेंट्रल के कोस्टल रिस्क स्क्रीनिंग टूल का उपयोग करके तय किया है. इसके लिए इंटरैक्टिव मैप का उपयोग किया गया को जोखिम वाले इलाकों के आधार पर मानचित्र तैयार करता है. </p>]]>
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                <pubDate>Wed, 21 Feb 2024 10:51:14 +0530</pubDate>
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                        <![CDATA[Online Desk]]>
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            <item>
                <title>...अब बारिश में नहीं डूबेंगी सेंट्रल रेलवे की पटरियां, रेलवे पर जाली से रुकेगा जलजमाव</title>
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                        <![CDATA[मध्य रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी शिवाजी सुतार ने बताया कि ट्रैक के बीच में जाली लगाने से पानी निकासी में काफी मदद मिलेगी। इसके अलावा जो पानी बहकर समंदर में जाता है, उसमें बहुत सारा प्लास्टिक और अन्य कचरा चला जाता है, वह भी कम होगा। सुतार ने बताया कि कई बार कचरा इतना बढ़ जाता है कि कल्वर्ट इत्यादि में निकासी का मार्ग अवरुद्ध हो जाता है और ट्रैक पर जलभराव का स्तर बढ़ने लगता है।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/20446/----now-the-tracks-of-central-railway-will-not-drown-in-the-rain--water-logging-will-stop-on-the-railway"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2023-05/pic-(1).jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>मुंबई: </strong>मॉनसून में ट्रेनों का परिचालन प्रभावित न हो, इसके लिए रेलवे ने तैयारियां शुरू कर दी हैं। नाला सफाई, कल्वर्ट सफाई, ट्रैक को उठाने, जलजमाव वाले एरिया में पंप लगाने इत्यादि का काम हो रहा है। बारिश के दौरान ट्रैक पर जमा पानी को निकालने के लिए जो ट्रैक के बीच में नालियां बनीं होती हैं, उनमें अक्सर कचरा या प्लास्टिक अटक जाने से परेशानी होती है। इससे बचने के लिए अब रेलवे ने लोहे की जालियां लगाने का निर्णय लिया है।<br /><br />मध्य रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी शिवाजी सुतार ने बताया कि ट्रैक के बीच में जाली लगाने से पानी निकासी में काफी मदद मिलेगी। इसके अलावा जो पानी बहकर समंदर में जाता है, उसमें बहुत सारा प्लास्टिक और अन्य कचरा चला जाता है, वह भी कम होगा। सुतार ने बताया कि कई बार कचरा इतना बढ़ जाता है कि कल्वर्ट इत्यादि में निकासी का मार्ग अवरुद्ध हो जाता है और ट्रैक पर जलभराव का स्तर बढ़ने लगता है।<br /><br />मध्य रेलवे फिलहाल दादर से सीएसएमटी के बीच उन एरिया में जाली लगाने का काम कर रही है, जहां शहरी इलाकों से नीचा ट्रैक है। भायखला, चुनाभट्टी और चिंचपोकली में ये काम किया जा चुका है। सीएसएमटी और मस्जिद में भी लगाया जाएगा।</p>]]>
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                                                            <category>Mumbai</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 02 May 2023 11:45:24 +0530</pubDate>
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                        <![CDATA[Online Desk]]>
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            <item>
                <title>बीएमसी का लापरवाही बढ़ा सकती है मुंबईकरों की मुश्किलें...इस साल भी मॉनसून में डूबेगी मुंबई! </title>
                                    <description>
                        <![CDATA[बीएमसी प्रशासन के तमाम दावों के बावजूद हर साल बारिश में मुंबईकरों को परेशानियां झेलनी पड़ती हैं। बारिश के दौरान जगह-जगह जल-जमाव, सड़कों एवं रेलवे ट्रैक पर पानी भर जाता हैं। इसके बावजूद बीएमसी सबक नहीं लेती है। इस साल मुंबई में नाला-सफाई के लिए जारी 31 टेंडर बीएमसी अब तक फाइनल नहीं कर पाई है। ऐसे में, छोटे-बड़े नालों एवं नदियों की सफाई का काम समय पर पूरा होना मुश्किल है। मंगलवार को विधानसभा में मुंबई के नाला-सफाई का मुद्दा भी गूंजा।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/18575/negligence-of-bmc-can-increase-the-problems-of-mumbaikars----mumbai-will-drown-in-monsoon-this-year-too"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2023-03/download-(15).jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>मुंबई:</strong> बीएमसी प्रशासन के तमाम दावों के बावजूद हर साल बारिश में मुंबईकरों को परेशानियां झेलनी पड़ती हैं। बारिश के दौरान जगह-जगह जल-जमाव, सड़कों एवं रेलवे ट्रैक पर पानी भर जाता हैं। इसके बावजूद बीएमसी सबक नहीं लेती है। इस साल मुंबई में नाला-सफाई के लिए जारी 31 टेंडर बीएमसी अब तक फाइनल नहीं कर पाई है। ऐसे में, छोटे-बड़े नालों एवं नदियों की सफाई का काम समय पर पूरा होना मुश्किल है। मंगलवार को विधानसभा में मुंबई के नाला-सफाई का मुद्दा भी गूंजा।</p>
<p style="text-align:justify;">मुंबई बीजेपी अध्यक्ष आशीष शेलार एवं पराग अलवणी ने नाला-सफाई में देरी का मुद्दा उठाया। लिखित जवाब में मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने कहा कि नाला-सफाई का काम जल्द शुरू होने की उम्मीद है। इस बाबत बीएमसी में पूर्व नेता विपक्ष कांग्रेस के रवि राजा ने कहा कि अब तक नाला सफाई का काम शुरू हो जाना चाहिए था। लेकिन कमिश्नर आई.एस. चहल नाला-सफाई का टेंडर भी सरकार से पूछ कर निकाल रहे हैं। अब तक टेंडर नहीं फाइनल हुआ, क्योंकि टेंडर फाइनल होने के बाद करीब एक सप्ताह से पंद्रह दिन वर्क ऑर्डर जारी करने में लगता है। ऐसे में, 15 से 20 मार्च से पहले नाला-सफाई का काम शुरू होने की उम्मीद नहीं है।</p>
<p style="text-align:justify;">इस साल पहली बारिश में ही मुंबई में बाढ़ जैसी स्थिति उत्पन्न हो जाएगी, इसके लिए पूरी तरह से कमिश्नर जिम्मेदार होंगे।   मुंबई में नाला सफाई का काम मार्च के पहले सप्ताह में शुरू हो जाता है। लेकिन इस साल अभी तक टेंडर ही नहीं फाइनल हुआ है। मुंबई में छोटे-बड़े नालों एवं नदियों की सफाई के लिए बीएमसी ने 31 टेंडर जारी किया है। मीठी नदी से कीचड़ हटाने के लिए 3 टेंडर जारी किए गए हैं। बीएमसी नालों की सफाई पर इस साल 180 करोड़ रुपये खर्च कर रही है, जो पिछले साल के 150 करोड़ रुपये से 30 करोड़ रुपये ज्यादा है। बीएमसी तीन चरणों में नालों की सफाई का काम करती है।</p>
<p style="text-align:justify;">बारिश के पहले 31 मई तक करीब 75 प्रतिशत नाला सफाई का लक्ष्य रखती थी, जबकि इस साल 80 प्रतिशत नाला-सफाई का दावा किया जा रहा है। दूसरे चरण में मॉनसून के दौरान 1 जून से 30 सितंबर तक 10 प्रतिशत नालों की सफाई होगी। मॉनसून के बाद तीसरे चरण में 1 अक्टूबर से 31 दिसंबर के बीच बाकी 10 प्रतिशत नालों की सफाई की जाएगी। नालों की सफाई होने से बारिश का पानी तेजी से समंदर में चला जाता है, जिससे जल-जमाव की स्थिति नहीं होती।</p>
<p style="text-align:justify;">मुंबई में 309 बड़े नाले हैं, जिनकी लंबाई 290 किलोमीटर है। छोटे नालों की संख्या 1508 है, जिसकी लंबाई 605 किमी है। बीएमसी के अनुसार बीएमसी मुख्यालय के इर्द गिर्द लगभग 32 किलोमीटर लंबे बड़े नाले हैं। पूर्वी उप नगर में करीब 100 किलोमीटर लंबे बड़े नाले हैं। पश्चिमी उपनगर में तकरीबन 140 किलोमीटर लंबे बड़े नाले हैं। वहीं, सड़क के नीचे 3134 किलोमीटर लंबी ड्रेनेज लाइन है। समस्या से बचने के लिए बीएमसी हर साल सैकड़ों करोड़ रुपये खर्च कर नालों की सफाई करती है, लेकिन समय से नालों की सफाई न होने से भारी बारिश के समय जगह-जगह बाढ़ जैसी स्थिति पैदा हो जाती है। पिछले साल मॉनसून से पहले बीएमसी कमिश्नर चहल ने 114 प्रतिशत नालों की सफाई का दावा किया था, लेकिन मुंबई के ऊंचाई वाले इलाकों में भी जल-जमाव हुआ था।</p>]]>
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                                                            <category>Mumbai</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 01 Mar 2023 11:09:06 +0530</pubDate>
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