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                <title>paper - Rokthok Lekhani News </title>
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                            <item>
                <title>महाराष्ट्र टीईटी पेपर लीक पर सियासत तेज, रोहित पवार ने सरकार को घेरा</title>
                                    <description><![CDATA[<p>एनसीपी (सपा) विधायक रोहित पवार ने महाराष्ट्र सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने टीचर एलिजिबिलिटी टेस्ट (टीईटी) के पेपर लीक के आरोपों के बाद परीक्षा टालने के मामले में नीट  2026 पेपर लीक विवाद का ज़िक्र किया और ज़िम्मेदार लोगों से जवाबदेही की मांग की। मीडिया से बात करते हुए पवार ने आरोप लगाया कि टीईटी पेपर लीक से निपटने का तरीका नीट  पेपर लीक पर केंद्र सरकार के रवैये जैसा ही था। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर सख़्त कार्रवाई नहीं की गई तो इसके गंभीर नतीजे हो सकते हैं।</p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/50446/politics-intensifies-on-maharashtra-tet-paper-leak-rohit-pawar-cornered"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-06/images---2026-06-28t112316.653.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>बीड :</strong> एनसीपी (सपा) विधायक रोहित पवार ने महाराष्ट्र सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने टीचर एलिजिबिलिटी टेस्ट (टीईटी) के पेपर लीक के आरोपों के बाद परीक्षा टालने के मामले में नीट  2026 पेपर लीक विवाद का ज़िक्र किया और ज़िम्मेदार लोगों से जवाबदेही की मांग की। मीडिया से बात करते हुए पवार ने आरोप लगाया कि टीईटी पेपर लीक से निपटने का तरीका नीट  पेपर लीक पर केंद्र सरकार के रवैये जैसा ही था। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर सख़्त कार्रवाई नहीं की गई तो इसके गंभीर नतीजे हो सकते हैं।</p>
<p> </p>
<p>पवार ने कहा, "जब 2026 में नीट  का पेपर दोबारा लीक हुआ, तो लोगों में भारी गुस्सा फैल गया था। केंद्र सरकार ने सिर्फ़ दिखावे के लिए सीबीआई जांच के आदेश दिए थे। ये जांचें सिर्फ़ 15-20 दिन चलीं और अब कुछ नहीं हो रहा है। हाल ही में हुए टीईटी पेपर के मामले में भी हमें वही पैटर्न देखने को मिल रहा है।" परीक्षा में गड़बड़ियों का छात्रों पर पड़ने वाले असर का ज़िक्र करते हुए उन्होंने कहा, "पिछले नीट  मामले में 22 छात्रों ने आत्महत्या की थी; अगर इतिहास दोहराया गया, तो सरकार ज़िम्मेदार होगी। उन्हें ज़िम्मेदारी लेनी चाहिए और इसमें शामिल किसी भी व्यक्ति के इस्तीफ़े की मांग करनी चाहिए, चाहे वह मंत्री हो या कोई और।" इससे पहले दिन में, महाराष्ट्र स्टेट काउंसिल ऑफ़ एग्जामिनेशन ने टीचर एलिजिबिलिटी टेस्ट (टीईटी) को टालने की घोषणा की। यह परीक्षा 28 जून को राज्य भर के 1,028 परीक्षा केंद्रों पर आयोजित होने वाली थी।</p>
<p>काउंसिल ने एक आधिकारिक बयान में कहा कि नीट  2026 परीक्षा के दौरान सामने आई गड़बड़ियों के बाद सुरक्षा के कड़े इंतज़ाम किए गए थे, फिर भी शनिवार को मिली गोपनीय जानकारी से पता चला कि भिवंडी में कुछ लोगों के पास टीईटी प्रश्न पत्र से जुड़ी जानकारी थी। महाराष्ट्र स्टेट काउंसिल ऑफ़ एग्जामिनेशन  के अनुसार, भिवंडी पुलिस की छापेमारी में पता चला कि एक अनधिकृत प्रश्न पत्र में मिले कई सवाल असली टीईटी परीक्षा के प्रश्न पत्र से मेल खाते थे। इसके बाद कथित तौर पर शामिल लोगों के ख़िलाफ़ आपराधिक मामला दर्ज किया गया है। काउंसिल ने कहा कि विस्तृत जांच के आदेश दिए गए हैं और दोबारा होने वाली परीक्षा के बारे में नई जानकारी उसकी आधिकारिक वेबसाइट के ज़रिए दी जाएगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Maharashtra</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 28 Jun 2026 11:24:06 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Online Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>मुंबई : हवाई अड्डे पर उस वक्त हड़कंप; इंडिगो की एक फ्लाइट के टॉयलेट में 'डेंजर' लिखा हुआ एक टिश्यू पेपर मिला </title>
                                    <description><![CDATA[<p>छत्रपति शिवाजी महाराज अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर उस वक्त हड़कंप मच गया जब इंडिगो की एक फ्लाइट के टॉयलेट में 'डेंजर' लिखा हुआ एक टिश्यू पेपर मिला। इस घटना के बाद विमान में सवार यात्रियों और एयरपोर्ट सुरक्षा अमले में दहशत का माहौल बन गया। आनन-फानन में फायर ब्रिगेड और बम निरोधक दस्ते को अलर्ट कर दिया गया। </p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/48880/there-was-panic-at-the-mumbai-airport-when-a-tissue"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-04/download---2026-04-01t135238.972.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>मुंबई : </strong>छत्रपति शिवाजी महाराज अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर उस वक्त हड़कंप मच गया जब इंडिगो की एक फ्लाइट के टॉयलेट में 'डेंजर' लिखा हुआ एक टिश्यू पेपर मिला। इस घटना के बाद विमान में सवार यात्रियों और एयरपोर्ट सुरक्षा अमले में दहशत का माहौल बन गया। आनन-फानन में फायर ब्रिगेड और बम निरोधक दस्ते को अलर्ट कर दिया गया। </p>
<p> </p>
<p><strong>कैसे शुरू हुआ पूरा घटनाक्रम?</strong><br />यह मामला इंडिगो की फ्लाइट संख्या 911 (मुंबई से अहमदाबाद) का है। विमान गेट नंबर 5 पर खड़ा था और अगले सफर के लिए तैयार किया जा रहा था। इसी दौरान टॉयलेट की सफाई या चेकिंग के वक्त वहां एक टिश्यू पेपर मिला जिस पर बड़े अक्षरों में 'डेंजर' लिखा था। इसे सुरक्षा के लिहाज से बड़ी धमकी माना गया और तुरंत मुंबई कंट्रोल रूम को विमान में बम होने की आशंका का संदेश भेजा गया। </p>
<p><strong>जांच में क्या निकला?</strong><br />सूचना मिलते ही सुरक्षा एजेंसियों ने मोर्चा संभाल लिया। यात्रियों को सुरक्षित दूरी पर रखकर विमान की सघन तलाशी ली गई। हालांकि घंटों की मशक्कत और जांच के बाद विमान के अंदर कोई भी संदिग्ध वस्तु या विस्फोटक नहीं मिला। पुलिस और सीआईएसएफ ने गहन जांच के बाद राहत की सांस ली और इसे एक 'हॉक्स' (अफवाह) या शरारत करार दिया।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Mumbai</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 01 Apr 2026 13:53:39 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Online Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>मुंबई में कागजों पर सिमटा प्लास्टिक बैन, धड़ल्ले से हो रहा इस्तेमाल; सर्वे में हुआ खुलासा</title>
                                    <description><![CDATA[<p>मुंबई में सिंगल-यूज प्लास्टिक पर प्रतिबंध लगे तीन साल से ज्यादा समय हो चुका है, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही कहानी बयां कर रही है। एक हालिया सर्वे के मुताबिक, शहर के 85% हिस्सों में अब भी प्रतिबंधित प्लास्टिक का इस्तेमाल या बिक्री जारी है। इससे साफ है कि नियम तो बने हैं, लेकिन उनका पालन पूरी तरह से नहीं हो पा रहा।</p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/48713/plastic-ban-restricted-to-paper-in-mumbai-is-being-used"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-03/download---2026-03-26t122343.037.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>मुंबई : </strong>मुंबई में सिंगल-यूज प्लास्टिक पर प्रतिबंध लगे तीन साल से ज्यादा समय हो चुका है, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही कहानी बयां कर रही है। एक हालिया सर्वे के मुताबिक, शहर के 85% हिस्सों में अब भी प्रतिबंधित प्लास्टिक का इस्तेमाल या बिक्री जारी है। इससे साफ है कि नियम तो बने हैं, लेकिन उनका पालन पूरी तरह से नहीं हो पा रहा।</p>
<p> </p>
<p><strong>सर्वे में क्या सामने आया</strong><br />एनजीओ टॉक्सिक्स लिंक द्वारा अप्रैल से अगस्त 2025 के बीच मुंबई, दिल्ली, गुवाहाटी और भुवनेश्वर के 560 स्थानों पर यह सर्वे किया गया। इसमें पाया गया कि कुल 84% जगहों पर सिंगल-यूज प्लास्टिक का इस्तेमाल हो रहा था। </p>
<p><strong>कहां सबसे ज्यादा इस्तेमाल हो रहा है प्लास्टिक</strong><br />सर्वे में पाया कि मुंबई में जूस की दुकानों, थोक बाजारों और सड़क किनारे विक्रेताओं के बीच प्लास्टिक बैग का इस्तेमाल सबसे ज्यादा हो रहा है। इतना ही नहीं, रेलवे स्टेशन, मॉल, पर्यटन स्थल और मेट्रो स्टेशनों पर भी करीब आधे दुकानदार प्लास्टिक बैग ग्राहकों को दे रहे हैं। धार्मिक स्थलों पर स्थिति और भी गंभीर है, जहां 90% स्थानों पर प्रतिबंधित प्लास्टिक का उपयोग जारी है।</p>
<p><strong>प्लास्टिक क्यों बना हुआ है लोगों की पहली पसंद</strong><br />टॉक्सिक्स लिंक के निदेशक रवि अग्रवाल के अनुसार, ज्यादातर जगहों पर प्रतिबंधित प्लास्टिक की मौजूदगी यह दिखाती है कि नियमों का पालन सही तरीके से नहीं हो रहा। जब तक इन उत्पादों की सप्लाई को नियंत्रित नहीं किया जाएगा, तब तक प्लास्टिक कचरे को कम करना मुश्किल होगा। पर्यावरणविद ऋषि अग्रवाल का कहना है कि प्लास्टिक आज की जिंदगी का हिस्सा बन चुका है। यह हल्का, सस्ता और सुविधाजनक है, इसलिए लोग इसे आसानी से छोड़ नहीं पा रहे। क्विक-डिलीवरी और सुविधा की संस्कृति में पर्यावरण अक्सर पीछे छूट जाता है।</p>
<p><strong>स्वास्थ्य पर भी पड़ रहा है असर</strong><br />सिंगल-यूज प्लास्टिक सिर्फ पर्यावरण ही नहीं, बल्कि इंसानी स्वास्थ्य के लिए भी खतरनाक है। यह धीरे-धीरे माइक्रोप्लास्टिक में बदलकर पानी, मिट्टी और हवा को प्रदूषित करता है, जो अंततः हमारे शरीर में पहुंचता है। प्लास्टिक में पाए जाने वाले कुछ केमिकल्स जैसे फ्थेलेट्स और बिस्फेनॉल-ए हार्मोनल गड़बड़ी और प्रजनन संबंधी समस्याएं पैदा कर सकते हैं। प्लास्टिक में पाए जाने वाले कुछ केमिकल्स जैसे फ्थेलेट्स और बिस्फेनॉल-ए हार्मोनल गड़बड़ी और प्रजनन संबंधी समस्याएं पैदा कर सकते हैं।</p>
<p><strong>जुर्माना भी नहीं बन पा रहा डर</strong><br />मुंबई में सिंगल-यूज के इस्तेमाल पर 5000 रुपये तक का जुर्माना है, लेकिन इसके बावजूद लोग इससे बच नहीं रहे। बीएमसी अधिकारियों के मुताबिक, शहर के 24 वार्डों में रोजाना औसतन एक केस दर्ज किया जाता है, जो इस समस्या की गंभीरता को दर्शाता है। बीएमसी की ओर से लगातार जागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं, लेकिन इनका असर सीमित नजर आ रहा है। खासकर अनौपचारिक क्षेत्र जैसे रेहड़ी-पटरी वालों के बीच नियमों का पालन कराना अब भी बड़ी चुनौती बना हुआ है।</p>
<p> </p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Mumbai</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 26 Mar 2026 12:25:46 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Online Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>लखनऊ: कहां गई इस थाने की 8 करोड़ की जमीन? कागजों में पूरी, एलडीए और पुलिस आमने-सामने</title>
                                    <description><![CDATA[<p>उत्‍तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से चौंकाने वाला मामला सामने आया है. जहां पुलिस विभाग को आवंटित करोड़ों की जमीन अचानक गायब हो गई. जानकारी के मुताबिक, एलडीए ने 27 जुलाई 1998 को लखनऊ के आशियाना थाने के लिए 43,201 स्क्वायर फीट जमीन आवंटित की थी. यह जमीन थाने के भवन, महिला बैरक और विवेचना कक्षा जैसी जरूरतों के लिए दी गई थी. उस वक्त यह क्षेत्र शहर से दूर, अपेक्षाकृत खाली इलाका माना जाता था. लेकिन अब, जब चारों ओर तेजी से शहरीकरण हुआ, तो यह जमीन सोने के भाव की हो गई. जिसकी कीमत आज करीब 8.5 करोड़ रुपये आंकी जा रही है.</p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/45180/lucknow-where-did-the-land-worth-rs-8-crore-of"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2025-11/download---2025-11-03t190344.492.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>लखनऊ: </strong>उत्‍तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से चौंकाने वाला मामला सामने आया है. जहां पुलिस विभाग को आवंटित करोड़ों की जमीन अचानक गायब हो गई. जानकारी के मुताबिक, एलडीए ने 27 जुलाई 1998 को लखनऊ के आशियाना थाने के लिए 43,201 स्क्वायर फीट जमीन आवंटित की थी. यह जमीन थाने के भवन, महिला बैरक और विवेचना कक्षा जैसी जरूरतों के लिए दी गई थी. उस वक्त यह क्षेत्र शहर से दूर, अपेक्षाकृत खाली इलाका माना जाता था. लेकिन अब, जब चारों ओर तेजी से शहरीकरण हुआ, तो यह जमीन सोने के भाव की हो गई. जिसकी कीमत आज करीब 8.5 करोड़ रुपये आंकी जा रही है.</p>
<p> </p>
<p><strong>नए निर्माण के दौरान हुआ खुलासा</strong><br />आशियाना थाना परिसर में नए महिला बैरक और विवेचना कक्षा के निर्माण के लिए हाल ही में नापजोख की गई. इसी दौरान यह चौकाने वाली बात सामने आई कि थाने को मिली कुल जमीन में से करीब 8673 स्क्वायर फीट क्षेत्रफल गायब है. माप में पाया गया कि थाने का वर्तमान क्षेत्रफल केवल 34,528 स्क्वायर फीट ही है. अधिकारियों के अनुसार, बची हुई जमीन पर अब किसी और का कब्जा है या उसे कहीं गलत तरीके से दर्ज कर लिया गया है. पुलिस विभाग ने जब इस पर जांच कराई, तो पाया कि थाने के आस-पास के कई भूखंड निजी स्वामित्व में हैं.</p>
<p><strong>कागजों में पूरी, हकीकत में गायब </strong><br />कागजों पर एलडीए के रिकार्ड में पूरी 43,201 स्क्वायर फीट जमीन मौजूद है. लेकिन मौके पर जब सर्वे किया गया तो हकीकत कुछ और निकली. इससे न केवल पुलिस विभाग, बल्कि प्रशासन भी हैरान है. अब सवाल यह उठ रहा है कि आखिर इतनी बड़ी जमीन का हिस्सा कैसे गायब हो गया? क्या किसी ने धीरे-धीरे कब्जा कर लिया, या फिर जमीन के सीमांकन में कभी गलती हुई थी? पुलिस अधिकारियों का कहना है कि थाने के चारों तरफ बनी कॉलोनियों और भूखंडों की जांच की जाएगी. जिन भूखंडों पर संदिग्ध निर्माण हुआ है, उनका सीमांकन फिर से कराया जाएगा.</p>
<p><strong>लखनऊ पुलिस ने मांगी एलडीए से मदद</strong><br />आशियाना थाने की गायब जमीन की खोज अब पुलिस और एलडीए के संयुक्त प्रयासों से की जाएगी. इस संबंध में पुलिस ने एलडीए को औपचारिक पत्र भेजा है. पत्र में अनुरोध किया गया है कि एलडीए पुराने नक्शे, सीमांकन रिपोर्ट और आवंटन की कॉपी साझा करे, ताकि यह पता लगाया जा सके कि 8673 स्क्वायर फीट जमीन आखिर गई कहां. एलडीए अधिकारियों का कहना है कि पुरानी फाइलें और रिकॉर्ड खंगाले जा रहे हैं. अगर किसी ने गलत तरीके से इस भूमि का कब्जा किया है, तो कार्रवाई की जाएगी.</p>
<p><strong>स्थानीय लोगों में भी चर्चा का विषय बनी घटना</strong><br />आशियाना थाने की यह जमीन विवाद अब स्थानीय लोगों में चर्चा का विषय बन गया है. इलाके के लोगों का कहना है कि आसपास की कई प्लॉटिंग कॉलोनियों में पहले भी विवाद हो चुके हैं. कुछ लोगों ने पुराने रिकॉर्ड की जांच किए बिना मकान बनवा लिए. अब इस जांच से कई और चौंकाने वाले खुलासे होने की संभावना है.</p>
<p><strong>आठ करोड़ की जमीन का रहस्य जल्द सुलझाने की कोशिश</strong><br />लखनऊ पुलिस और एलडीए अब इस “गायब जमीन” के रहस्य को सुलझाने में जुट गए हैं. अफसरों का कहना है कि यह सिर्फ एक थाने की जमीन का मामला नहीं, बल्कि शहर की भूमि प्रबंधन व्यवस्था की साख से जुड़ा सवाल है. जल्द ही नापजोख और जांच पूरी कर रिपोर्ट तैयार की जाएगी.</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>National</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 03 Nov 2025 19:04:51 +0530</pubDate>
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