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                <title>मुंबई: ड्रग्स मनी लॉन्ड्रिंग केस में बड़ी कार्रवाई, मुंबई में 5.88 करोड़ की कीमत के 7 फ्लैट्स अटैच</title>
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                        <![CDATA[<p>मुंबई में ड्रग्स से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए PMLA के तहत फैसल शेख, अल्फिया शेख और अन्य आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई में 5.88 करोड़ की कीमत की 7 अचल संपत्तियां अस्थायी रूप से अटैच कर दी हैं. यह कार्रवाई ईडी के मुंबई जोनल ऑफिस ने NDPS केस में की है.</p>
<p> </p>]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/47796/big-action-in-mumbai-drugs-money-laundering-case-7-flats"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-02/download---2026-02-17t120343.650.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>मुंबई: </strong>मुंबई में ड्रग्स से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए PMLA के तहत फैसल शेख, अल्फिया शेख और अन्य आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई में 5.88 करोड़ की कीमत की 7 अचल संपत्तियां अस्थायी रूप से अटैच कर दी हैं. यह कार्रवाई ईडी के मुंबई जोनल ऑफिस ने NDPS केस में की है.</p>
<p> </p>
<p><strong>NCB की शिकायत पर शुरू हुई जांच, ‘MD' सप्लाई का नेटवर्क </strong><br />यह केस NCB मुंबई की शिकायत के आधार पर शुरू हुआ था, जो NDPS एक्ट की धाराओं के तहत दर्ज है. जांच में सामने आया कि मुख्य आरोपी फैसल शेख प्रतिबंधित ड्रग मेफेड्रोन (MD) की खरीद कुख्यात ड्रग तस्कर सलीम डोला से करता था. फैसल शेख और उसकी पत्नी अल्फिया शेख ने MD ड्रग्स की सप्लाई के लिए एक संगठित नेटवर्क बनाया हुआ था. यह ड्रग्स सामिया खान, नासिर यासीन खान, अजीम अबू सलीम खान उर्फ अजीम भाऊ जैसे लोगों को बेची जाती थीं, जो आगे अपने ग्राहकों तक पहुंचाते थे.</p>
<p><strong>कैश को वैध दिखाने की कोशिश, निजी खाते और फर्जी फर्में</strong><br />जांच में यह भी सामने आया कि फैसल और अल्फिया शेख ड्रग्स की बिक्री से कमाए गए नकद पैसे को अपने निजी बैंक खातों में जमा करते थे, ताकि उसे कानूनी कमाई के रूप में दिखाया जा सके. आरोपियों ने अपने और सहयोगियों के नाम पर फर्में भी खोल रखी थीं. इनका कोई वास्तविक व्यवसाय नहीं था, बल्कि इन्हें ‘प्रोसीड्स ऑफ क्राइम' को घुमाने और सफेद दिखाने के लिए इस्तेमाल किया जाता था.</p>
<p><strong>शेल कंपनियों और कई खातों से ‘रूटिंग'—फ्लैट्स की खरीद</strong><br />ईडी के मुताबिक, ड्रग्स से कमाए गए कैश का कुछ हिस्सा फैसल और अल्फिया अपने करीबी सहयोगी फैजान मोहम्मद शफ़ी शेख को देते थे. उसने अपनी प्रोप्रायटरशिप फर्म ‘Faiz Impex, मुंबई' और अन्य सहयोगियों के जरिए यह रकम कई बैंक खातों और शेल कंपनियों में घुमाई. इस रकम का एक हिस्सा बाद में मुख्य आरोपियों और उनके परिवार के खातों में वापस लाया गया और उसी पैसे से अचल संपत्तियां खरीदी गईं.</p>
<p><strong>पहले की जब्ती: नकद, सोना, लग्जरी कारें और खाते</strong><br />इससे पहले 8 अक्टूबर 2025 को ईडी ने PMLA के तहत छापेमारी की थी. उस दौरान ₹42 लाख नकद, करीब 1.6 किलोग्राम सोने के गहने (लगभग ₹1.76 करोड़ कीमत), 3 सेकेंड‑हैंड लग्ज़री गाड़ियाँ (लगभग ₹56 लाख कीमत), 12 बैंक खाते जब्त या फ्रीज किए गए थे.  </p>
<p><strong>फ्लो‑चार्ट तैयार, आगे की जांच जारी</strong><br />ईडी के अनुसार, फैसल और अल्फिया शेख द्वारा तैयार किया गया मनी‑ट्रेल नेटवर्क काफी सुनियोजित था, जिसका पूरा फ्लो‑चार्ट एजेंसी ने तैयार कर लिया है. फिलहाल मामले में आगे की जांच जारी है. यह कार्रवाई एक बार फिर दिखाती है कि ड्रग्स के धंधे से कमाए गए पैसे को छिपाने के लिए मनी लॉन्ड्रिंग का जाल कैसे बिछाया जाता है, हालांकि जांच एजेंसियाँ लगातार ऐसे नेटवर्क पर शिकंजा कस रही हैं.</p>]]>
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                                                            <category>Mumbai</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 17 Feb 2026 12:04:38 +0530</pubDate>
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                        <![CDATA[Online Desk]]>
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                <title>नई दिल्ली : बंगाल के मंत्री ने अयोग्य शिक्षकों को भर्ती कर कमाए करोड़ों रुपये, ईडी ने अटैच की है 641 करोड़ की प्रॉपर्ट</title>
                                    <description>
                        <![CDATA[<p>पश्चिम बंगाल में हुए शिक्षक भर्ती घोटाले की परतें धीरे-धीरे खुल रही हैं। मंत्री, विधायक, अफसर और दूसरे व्यक्तियों ने शिक्षकों की भर्ती में करोड़ों रुपये कमा लिए। ईडी ने अब प्राथमिक शिक्षकों के भर्ती घोटाले में विधायक और सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम, वस्त्र एवं सुधार प्रशासन प्रभारी मंत्री चंद्रनाथ सिन्हा पर शिकंजा कसा है।</p>]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/46694/new-delhi-bengal-minister-earned-crores-of-rupees-by-recruiting"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-01/download---2026-01-03t180456.629.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>नई दिल्ली :  </strong>पश्चिम बंगाल में हुए शिक्षक भर्ती घोटाले की परतें धीरे-धीरे खुल रही हैं। मंत्री, विधायक, अफसर और दूसरे व्यक्तियों ने शिक्षकों की भर्ती में करोड़ों रुपये कमा लिए। ईडी ने अब प्राथमिक शिक्षकों के भर्ती घोटाले में विधायक और सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम, वस्त्र एवं सुधार प्रशासन प्रभारी मंत्री चंद्रनाथ सिन्हा पर शिकंजा कसा है। चंद्रनाथ सिन्हा की 3.65 करोड़ रुपये की अचल संपत्तियों को धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए), 2002 के तहत 31.12.2025 को अस्थायी रूप से जब्त किया गया है। योग्य एवं वास्तविक उम्मीदवारों को परे हटाकर अयोग्य और तय मापदंडों पर खरे न उतरने वाले युवाओं को सरकारी नौकरी दे दी गई। प्राथमिक शिक्षकों की भर्ती में निष्पक्षता का पालन नहीं किया गया। आपराधिक साजिश के जरिए करोड़ों रुपये की संपत्ति एकत्रित की गई। इसकी मदद से आरोपियों ने चल-अचल प्रॉपर्टी खरीद ली।</p>
<p>  </p>
<p>सीबीआई द्वारा भारतीय दंड संहिता, 1860 और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की विभिन्न धाराओं के तहत दर्ज एफआईआर के आधार पर ईडी ने इस मामले की जांच शुरू की थी। इस मामले में प्राथमिक शिक्षकों की अवैध नियुक्ति, अयोग्य, गैर-सूचीबद्ध और निम्न श्रेणी के उम्मीदवारों को नियुक्ति का प्रस्ताव देना शामिल रहा। योग्य एवं वास्तविक उम्मीदवारों को निष्पक्षता का पालन किए बिना, आपराधिक साजिश रचकर और संबंधित नियमों का उल्लंघन करते हुए अयोग्य लोगों को नौकरी दी गई। सीबीआई ने कोलकाता उच्च न्यायालय के निर्देशों पर एफआईआर दर्ज की थी। </p>
<p>इससे पहले, चंद्रनाथ सिन्हा के खिलाफ धन शोधन के अपराध के लिए कोलकाता स्थित विशेष न्यायालय (पीएमएलए) में 6 अगस्त, 2025 को छठी पूरक अभियोग शिकायत दर्ज की गई थी। चंद्रनाथ सिन्हा के आवासीय परिसर में 22 मार्च, 2024 को तलाशी ली गई थी, जिसमें 41 लाख रुपये नकद और अन्य आपत्तिजनक दस्तावेज जब्त किए गए थे। जांच में चंद्रनाथ सिन्हा के बैंक खातों में बड़ी मात्रा में नकदी जमा होने का भी पता चला। जांच के दौरान यह भी पता चला कि चंद्रनाथ सिन्हा ने बोलपुर, बीरभूम के आसपास के क्षेत्र में अपने परिवार के सदस्यों का इस्तेमाल उनके नाम पर अचल संपत्तियां हासिल करने के लिए किया था, जिन्हें अस्थायी रूप से ईडी द्वारा अब जब्त कर लिया गया है। </p>
<p>इससे पहले, पश्चिम बंगाल के विधायक और पूर्व शिक्षा मंत्री पार्थ चटर्जी की करीबी सहयोगी अर्पिता मुखर्जी के परिसरों पर तलाशी अभियान के दौरान ईडी ने 49.80 करोड़ रुपये नकद और 5.08 करोड़ रुपये के सोने के आभूषण बरामद कर जब्त किए थे। ईडी ने तत्कालीन शिक्षा विभाग के प्रभारी मंत्री पार्थ चटर्जी और उनकी करीबी सहयोगी अर्पिता मुखर्जी सहित सात लोगों को गिरफ्तार किया था। इस मामले में कुल मिलाकर 95 करोड़ रुपये (लगभग) के 6 अस्थायी कुर्की आदेश (पीएओ) जारी किए जा चुके हैं। <br />नवीनतम अस्थायी कुर्की के साथ कुर्क की गई कुल संपत्ति 98.65 करोड़ रुपये से अधिक हो गई है।</p>
<p>इस मामले में पश्चिम बंगाल के विधायक और पूर्व शिक्षा प्रभारी मंत्री पार्थ चटर्जी, अर्पिता मुखर्जी और विधायक माणिक भट्टाचार्य सहित 54 व्यक्तियों/संस्थाओं के खिलाफ आरोप तय किए गए हैं। इनके खिलाफ विशेष न्यायालय में मुकदमा चल रहा है। इसके अलावा, पीटीआरएस मामले में वर्तमान में कुल जब्ती और कुर्की लगभग 154.91 करोड़ रुपये है, जो आरोपी व्यक्तियों और संबंधित संस्थाओं के नाम पर है। एसएससी सहायक शिक्षक भर्ती और ग्रुप 'सी' और 'डी' स्टाफ भर्ती घोटालों से संबंधित मामलों में, ईडी ने लगभग 486 करोड़ रुपये की संपत्तियां जब्त की हैं। भर्ती घोटाले के मामलों में ईडी कोलकाता द्वारा की गई कुल कुर्की लगभग 641 करोड़ रुपये है।</p>]]>
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                                                            <category>National</category>
                                    

                <link>https://www.rokthoklekhani.com/article/46694/new-delhi-bengal-minister-earned-crores-of-rupees-by-recruiting</link>
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                <pubDate>Sat, 03 Jan 2026 18:06:24 +0530</pubDate>
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                        <![CDATA[Online Desk]]>
                    </dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>मुंबई : बैंक फ्रॉड के मामलों में अपनी मनी लॉन्ड्रिंग जांच के तहत प्रोविजनल तौर पर 1,452.51 करोड़ की संपत्ति अटैच</title>
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                        <![CDATA[<p>एनफोर्समेंट डायरेक्टरेट ने रिलायंस कम्युनिकेशंस लिमिटेड, रिलायंस कमर्शियल फाइनेंस लिमिटेड और रिलायंस होम फाइनेंस लिमिटेड से जुड़े बैंक फ्रॉड के कथित मामलों में अपनी मनी लॉन्ड्रिंग जांच के तहत प्रोविजनल तौर पर ₹1,452.51 करोड़ की संपत्ति अटैच की है। मामले से जुड़े अधिकारियों ने यह जानकारी दी।एनफोर्समेंट डायरेक्टरेट ने आरकॉम, ग्रुप की कंपनियों के खिलाफ जांच में ₹1,452 करोड़ की संपत्ति अटैच की।अधिकारियों ने बताया कि अटैच की गई संपत्तियों में नवी मुंबई में धीरूभाई अंबानी नॉलेज सिटी  और मिलेनियम बिजनेस पार्क की बिल्डिंग्स के साथ-साथ पुणे, चेन्नई और भुवनेश्वर में प्लॉट और बिल्डिंग्स शामिल हैं।एनफोर्समेंट डायरेक्टरेट ने पहले जांच के सिलसिले में ₹7,545 करोड़ से ज़्यादा की संपत्ति अटैच की थी। अधिकारियों ने बताया कि हाल की अटैचमेंट के साथ, अटैच की गई संपत्तियों की कुल कीमत बढ़कर ₹8,997 करोड़ हो गई है। </p>]]>
                    </description>
                
                                    <content:encoded>
                        <![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/45647/mumbai-bank-has-provisionally-attached-assets-worth-rs-145251-crore"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2025-11/download---2025-11-21t103901.913.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>मुंबई : </strong>एनफोर्समेंट डायरेक्टरेट ने रिलायंस कम्युनिकेशंस लिमिटेड, रिलायंस कमर्शियल फाइनेंस लिमिटेड और रिलायंस होम फाइनेंस लिमिटेड से जुड़े बैंक फ्रॉड के कथित मामलों में अपनी मनी लॉन्ड्रिंग जांच के तहत प्रोविजनल तौर पर ₹1,452.51 करोड़ की संपत्ति अटैच की है। मामले से जुड़े अधिकारियों ने यह जानकारी दी।एनफोर्समेंट डायरेक्टरेट ने आरकॉम, ग्रुप की कंपनियों के खिलाफ जांच में ₹1,452 करोड़ की संपत्ति अटैच की।अधिकारियों ने बताया कि अटैच की गई संपत्तियों में नवी मुंबई में धीरूभाई अंबानी नॉलेज सिटी  और मिलेनियम बिजनेस पार्क की बिल्डिंग्स के साथ-साथ पुणे, चेन्नई और भुवनेश्वर में प्लॉट और बिल्डिंग्स शामिल हैं।एनफोर्समेंट डायरेक्टरेट ने पहले जांच के सिलसिले में ₹7,545 करोड़ से ज़्यादा की संपत्ति अटैच की थी। अधिकारियों ने बताया कि हाल की अटैचमेंट के साथ, अटैच की गई संपत्तियों की कुल कीमत बढ़कर ₹8,997 करोड़ हो गई है। </p>
<p> </p>
<p>एनफोर्समेंट डायरेक्टरेट की जांच सेंट्रल ब्यूरो ऑफ़ इन्वेस्टिगेशन  द्वारा आरकॉम, इंडस्ट्रियलिस्ट अनिल अंबानी और दूसरों के खिलाफ इंडियन पीनल कोड और प्रिवेंशन ऑफ़ करप्शन एक्ट की अलग-अलग धाराओं के तहत दर्ज किए गए केस पर आधारित है। अधिकारियों ने कहा कि आरकॉम, जो पहले अनिल अंबानी के रिलायंस ग्रुप का हिस्सा थी, और ग्रुप की दूसरी कंपनियों ने कथित तौर पर 2010-2012 और उसके बाद घरेलू और विदेशी लेंडर्स से लोन लिया, जिसमें से ₹40,185 करोड़ बकाया हैं, जबकि नौ बैंकों ने अब तक ग्रुप के लोन अकाउंट्स को फ्रॉड घोषित कर दिया है।</p>
<p>एनफोर्समेंट डायरेक्टरेट के मुताबिक, एक ग्रुप कंपनी ने कुछ बैंकों से जो लोन लिए थे, उनका इस्तेमाल दूसरी ग्रुप कंपनियों ने दूसरे बैंकों से लिए लोन चुकाने के लिए किया, और ऐसे फंड्स को रिलेटेड पार्टियों को ट्रांसफर किया गया या म्यूचुअल फंड्स में इन्वेस्ट किया गया, जो लोन सैंक्शन लेटर्स के टर्म्स एंड कंडीशंस का उल्लंघन था। एनफोर्समेंट डायरेक्टरेट के एक अधिकारी ने कहा, “खासकर, आरकॉम और उसकी ग्रुप कंपनियों ने लोन की एवरग्रीनिंग के लिए ₹13,600 करोड़ से ज़्यादा डायवर्ट किए; ₹12,600 करोड़ से ज़्यादा जुड़े हुए लोगों को डायवर्ट किए गए और ₹1,800 करोड़ से ज़्यादा फिक्स्ड डिपॉजिट, म्यूचुअल फंड वगैरह में इन्वेस्ट किए गए, जिन्हें ग्रुप एंटिटीज़ में री-रूटिंग के लिए काफी हद तक लिक्विडेट कर दिया गया।” “एनफोर्समेंट डायरेक्टरेट ने जुड़े हुए लोगों को फंड देने के मकसद से बिल-डिस्काउंटिंग का भी बड़े पैमाने पर गलत इस्तेमाल पकड़ा है।</p>
<p>एनफोर्समेंट डायरेक्टरेट को शक है कि कुछ लोन कथित तौर पर फॉरेन आउटवर्ड रेमिटेंस के ज़रिए इंडिया के बाहर भी साइफन किए गए थे।अधिकारी ने कहा, “एनफोर्समेंट डायरेक्टरेट इन फाइनेंशियल क्राइम करने वालों का एक्टिवली पीछा कर रहा है और क्राइम से हुई कमाई उनके सही दावेदारों को वापस दिलाने के लिए कमिटेड है।”एनफोर्समेंट डायरेक्टरेट के लेटेस्ट अटैचमेंट पर जवाब देते हुए, रिलायंस ग्रुप के एक स्पोक्सपर्सन ने बताया, “रिलायंस ग्रुप यह साफ करना चाहता है कि एनफोर्समेंट डायरेक्टरेट की अपनी मीडिया रिलीज़ के मुताबिक, अटैच किए गए एसेट्स रिलायंस कम्युनिकेशंस के हैं, जो 2019 से – यानी पिछले छह सालों से रिलायंस ग्रुप का हिस्सा नहीं रहा है।”स्पोक्सपर्सन ने कहा कि आरकॉम छह साल से ज़्यादा समय से कॉर्पोरेट इन्सॉल्वेंसी रिज़ॉल्यूशन प्रोसेस से गुज़र रहा था और इसके रिज़ॉल्यूशन से जुड़े सभी मामले अभी नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल और सुप्रीम कोर्ट के सामने हैं।स्पोक्सपर्सन ने कहा, “आरकॉम को अभी एनसीएलटी/ कमिटी ऑफ़ क्रेडिटर्स और बैंकों/लेंडर्स के एक कंसोर्टियम की देखरेख में एक रिज़ॉल्यूशन प्रोफेशनल मैनेज कर रहा है। अनिल अंबानी किसी भी तरह से रिलायंस कम्युनिकेशंस से जुड़े नहीं हैं और उन्होंने छह साल पहले 2019 में इस्तीफा दे दिया था।”स्पोक्सपर्सन ने साफ किया कि अटैचमेंट ऑर्डर का रिलायंस इंफ्रास्ट्रक्चर और रिलायंस पावर के ऑपरेशन्स, परफॉर्मेंस या भविष्य की संभावनाओं पर कोई खास असर नहीं पड़ेगा।</p>]]>
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                                                            <category>Mumbai</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 21 Nov 2025 10:40:11 +0530</pubDate>
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                <title>मुंबई : मनी लॉन्ड्रिंग जाँच में लोढ़ा डेवलपर्स लिमिटेड की 59 करोड़ रुपये की संपत्ति अस्थायी रूप से कुर्क</title>
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                        <![CDATA[<p>प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने डेवलपर राजेंद्र लोढ़ा द्वारा कंपनी के निदेशक मंडल में रहते हुए लोढ़ा डेवलपर्स लिमिटेड (एलडीएल) को कथित तौर पर 100 करोड़ रुपये से अधिक का गलत नुकसान पहुँचाने के मामले में अपनी मनी लॉन्ड्रिंग जाँच के सिलसिले में लगभग 59 करोड़ रुपये की संपत्ति अस्थायी रूप से कुर्क की है। </p>]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/45479/lodha-developers-ltds-assets-worth-rs-59-crore-temporarily-attached"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2025-11/download---2025-11-15t113620.281.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>मुंबई : </strong>प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने डेवलपर राजेंद्र लोढ़ा द्वारा कंपनी के निदेशक मंडल में रहते हुए लोढ़ा डेवलपर्स लिमिटेड (एलडीएल) को कथित तौर पर 100 करोड़ रुपये से अधिक का गलत नुकसान पहुँचाने के मामले में अपनी मनी लॉन्ड्रिंग जाँच के सिलसिले में लगभग 59 करोड़ रुपये की संपत्ति अस्थायी रूप से कुर्क की है। </p>
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<p><strong>लोढ़ा धोखाधड़ी मामला: </strong><br />ईडी ने 59 करोड़ रुपये की संपत्ति कुर्क कीशहर और आसपास के इलाकों में 14 ठिकानों पर की गई तलाशी के दौरान नकदी, बैंक बैलेंस और सावधि जमा के रूप में चल संपत्तियाँ कुर्क की गईं। अधिकारियों ने बताया कि ईडी की मुंबई इकाई ने तलाशी के दौरान कई आपत्तिजनक दस्तावेज़, डिजिटल उपकरण और कथित तौर पर कई करोड़ रुपये मूल्य की अचल संपत्तियों का विवरण भी ज़ब्त किया। अधिकारियों ने बताया कि लोढ़ा के साथ धोखाधड़ी मामले में आरोपियों से जुड़े परिसरों की तलाशी ली गई।राजेंद्र लोढ़ा ने 1990 में एलडीएल के साथ काम करना शुरू किया और 2015 में कंपनी के निदेशक बने।</p>
<p>2021 में, वे प्रमोटर भी बन गए और उन्हें कंपनी के लिए ज़मीन खरीदने का अधिकार दिया गया, हालाँकि ज़मीन बेचने का नहीं। कंपनी की एक शिकायत के आधार पर, इस साल सितंबर में एनएम जोशी मार्ग पुलिस ने उनके बेटे साहिल, बी नरसाना, एन वडोर, आर नरसाना, एन मेनन, एन देसाई, ए कांबले, एस सिंह और विनोद पाटिल के खिलाफ मामला दर्ज किया था।पुलिस द्वारा दर्ज की गई प्राथमिकी (एफआईआर) के अनुसार, लोढ़ा और अन्य आरोपियों ने एलडीएल की कई संपत्तियाँ सस्ते दामों पर बेचीं, जिससे कंपनी को ₹100 करोड़ से अधिक का नुकसान हुआ। तदनुसार, उन पर भारतीय न्याय संहिता की संबंधित धाराओं के तहत धोखाधड़ी, पद का दुरुपयोग, संपत्ति की अनधिकृत बिक्री और झूठे दस्तावेज़ तैयार करने का मामला दर्ज किया गया। प्राथमिकी दर्ज होने के तुरंत बाद लोढ़ा को गिरफ्तार कर लिया गया।ईडी की जाँच से पता चला कि लोढ़ा कंपनी के स्वामित्व वाली अचल संपत्तियों की कम कीमत पर अनधिकृत बिक्री और हस्तांतरण के माध्यम से एलडीएल के धन और संपत्तियों को इधर-उधर करने या गबन करने में शामिल थे। </p>
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<p>ईडी अधिकारियों ने कहा कि ये संपत्तियाँ निदेशक मंडल की मंज़ूरी के बिना, उनसे जुड़ी प्रॉक्सी संस्थाओं और व्यक्तियों को बेची गईं।ईडी अधिकारियों ने बताया कि लोढ़ा बढ़ी हुई कीमतों पर ज़मीन खरीदने के लिए समझौता ज्ञापन (एमओयू) बनाने और बाद में विक्रेताओं के माध्यम से बढ़ी हुई राशि की हेराफेरी करने में भी शामिल थे।जुलाई 2025 में, एलडीएल को पता चला कि लोढ़ा के पास कथित तौर पर उनकी आय के ज्ञात स्रोतों से ज़्यादा संपत्ति थी, जिसमें 5,900 वर्ग मीटर का एक प्लॉट भी शामिल था, जिसे उन्होंने अगस्त 2023 में एस. जाधव नामक एक व्यक्ति को ₹88 लाख में बेच दिया था। ईडी ने अपनी जाँच के दौरान पाया कि आगामी विरार-अलीबाग मल्टी-मॉडल कॉरिडोर के पास स्थित इस प्लॉट को दस महीनों के भीतर ₹10.88 करोड़ की भारी-भरकम कीमत पर फिर से बेच दिया गया था। अधिकारियों ने बताया कि जब एलडीएल ने लोढ़ा से उनकी सम्पत्तियों के बारे में ब्यौरा मांगा तो उन्होंने कंपनी से इस्तीफा दे दिया।<br /> </p>]]>
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                                                            <category>Mumbai</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 15 Nov 2025 11:37:08 +0530</pubDate>
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