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                <title>sentenced - Rokthok Lekhani News </title>
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                <description>sentenced RSS Feed</description>
                
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                <title>मुंबई : 'फिसलकर गिरा', फिर दो बार होठों पर किया किस, मुंबई के शख्स को 1 साल की जेल, जानिए पूरा मामला</title>
                                    <description><![CDATA[<p>सेशंस कोर्ट ने 34 साल के एक क्लीनर को दोषी ठहराते हुए एक साल की कड़ी सजा सुनाई। मुंबई के रहनेवाले क्लीनर पर एक सेल्सवुमन को जबरदस्ती दो बार किस करने का आरोप लगा था। क्लीनर ने दावा किया था कि पिछले साल बोरीवली (पश्चिम) के एक मॉल में हुई यह एक महज घटना था। वह गलती से फिसलकर गिर गया था। उसने कहा था कि गिरने पर स्वाभाविक प्रतिक्रिया के तौर पर ऐसा हुआ, लेकिन कोर्ट ने इस दलील को खारिज कर दिया। </p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/51821/mumbai-man-slipped-and-fell-and-then-kissed-his-lips"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-09/images---2026-09-13t122756.516.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>मुंबई :</strong> सेशंस कोर्ट ने 34 साल के एक क्लीनर को दोषी ठहराते हुए एक साल की कड़ी सजा सुनाई। मुंबई के रहनेवाले क्लीनर पर एक सेल्सवुमन को जबरदस्ती दो बार किस करने का आरोप लगा था। क्लीनर ने दावा किया था कि पिछले साल बोरीवली (पश्चिम) के एक मॉल में हुई यह एक महज घटना था। वह गलती से फिसलकर गिर गया था। उसने कहा था कि गिरने पर स्वाभाविक प्रतिक्रिया के तौर पर ऐसा हुआ, लेकिन कोर्ट ने इस दलील को खारिज कर दिया। </p>
<p> </p>
<p>सिर्फ 2 महीने चले ट्रायल में, बचाव पक्ष की दलीलों को खारिज करते हुए कोर्ट ने रितेश अरमुल्ला को आपराधिक बल का इस्तेमाल करने और साफ तौर पर यौन इरादे से अनचाहा शारीरिक संपर्क बनाने का दोषी पाया।</p>
<p><strong>कोर्ट ने क्या कहा</strong><br />जज ने कहा कि अगर बहस के लिए यह मान भी लिया जाए कि कोई व्यक्ति किसी दूसरे व्यक्ति पर फिसलकर गिर गया, तो स्वाभाविक प्रतिक्रिया उस व्यक्ति को किस करने से अलग होगी जिस पर वह गिरा है। </p>
<p><strong>कोर्ट ने कहा- हरकत जानबूझकर की गई इसके पर्याप्त सबूत</strong><br />ये अपराध भारतीय न्याय संहिता की धारा 74 (किसी महिला की गरिमा को ठेस पहुंचाने के इरादे से या यह जानते हुए कि इससे उसकी गरिमा को ठेस पहुंच सकती है, उस पर हमला करना या आपराधिक बल का इस्तेमाल करना) और धारा 75 (यौन उत्पीड़न) के तहत आते हैं।<br />एडिशनल सेशंस जज पी ए साने ने कहा कि पीड़िता की गवाही भरोसेमंद थी और उस पर अविश्वास करने का कोई कारण नहीं था। जज ने कहा कि रिकॉर्ड में ऐसी कोई बात सामने नहीं आई है कि पीड़िता आरोपी के खिलाफ गवाही क्यों देगी। इसके अलावा, रिकॉर्ड से पता चलता है कि घटना से पहले वह आरोपी को नहीं जानती थी। इसलिए इस बात की कोई संभावना नहीं है कि वह इस मामले में आरोपी को झूठा फंसाएगी। </p>
<p><strong>कोर्ट ने दी यह सजा</strong><br />आईपीसी की जगह बीएनएस (भारतीय न्याय संहिता) के आने के बाद से यह कुछ मामलों में से एक है जिसमें सजा सुनाई गई है। कोर्ट ने रितेश अरमुल्ला को धारा 74 के तहत एक साल की कड़ी सजा और 1,000 रुपये का जुर्माना, और धारा 75 के तहत एक साल की साधारण सजा और 500 रुपये का जुर्माना लगाया। दोनों सजाएं साथ-साथ चलेंगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Mumbai</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 13 Sep 2026 12:31:10 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Online Desk]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>पुणे : नसरापुर कांड में आरोपी को मृत्युदंड, अदालत का सख्त रुख</title>
                                    <description><![CDATA[<p>महाराष्ट्र के पुणे के नसरापुर में एक मासूम बच्ची के यौन शोषण व हत्या के मामले के दोषी पाए गए भीमराव कांबले (65) को पुणे जिला सत्र न्यायालय ने फांसी की सजा सुनाई है। इस मामले को लेकर मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने अदालत के फैसले का स्वागत किया है। उन्होंने इसे एतिहासिक फैसला करार दिया है। अदालत के इस निर्णय का सभी पार्टियों के नेताओं ने सराहना की है। नसरापुर कांड का मामला सोमवार को विधानसभा में भी गूंजा।</p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/50489/courts-strict-stand-on-death-sentence-to-accused-in-pune"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-07/pune-nasrapur-case-2026-06-29-10-10-31.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>पुणे : </strong>महाराष्ट्र के पुणे के नसरापुर में एक मासूम बच्ची के यौन शोषण व हत्या के मामले के दोषी पाए गए भीमराव कांबले (65) को पुणे जिला सत्र न्यायालय ने फांसी की सजा सुनाई है। इस मामले को लेकर मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने अदालत के फैसले का स्वागत किया है। उन्होंने इसे एतिहासिक फैसला करार दिया है। अदालत के इस निर्णय का सभी पार्टियों के नेताओं ने सराहना की है। नसरापुर कांड का मामला सोमवार को विधानसभा में भी गूंजा।</p>
<p> </p>
<p>मुख्यमंत्री ने सदन को बताया कि अदालत ने 60 दिन में आरोपी को सजा सुनाई है। यह राज्य का पहला ऐसा मामला है जो सबसे तेजी से सुलझाया गया है। मैं जस्टिस एसआर सालुंखे का खास तौर पर शुक्रगुजार हूं। पुलिस ने बहुत कम समय में मामले की जांच की और सबूत इकट्ठा किए गए। कोर्ट ने भी लगातार सुनवाई के बाद फैसला सुनाया है। केवल 14 दिनों में चार्जशीट फाइल की गई। सिर्फ 16 दिनों में 55 गवाहों से पूछताछ और क्रॉस-एग्जामिनेशन किया गया। मैं इस केस पर काम करने वाले एसपी संदीप सिंह गिल की टीम को बधाई देता हूं।</p>
<p>महाराष्ट्र में कानून का राजः उपमुख्यमंत्री शिंदे उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने कहा कि महाराष्ट्र में कानून का राज है और यहां अपराधियों को कोई छूट नहीं है। इस मामले में न्याय हुआ है। यह उन लोगों के लिए चेतावनी है जो महिलाओं और लड़कियों पर ज़ुल्म करते हैं। भविष्य में कोई भी ऐसा घिनौना काम करने की हिम्मत नहीं करेगा। ऐसे कातिलों के लिए समाज या कानून के राज में कोई जगह नहीं है। मजबूत हुआ न्यायपालिका पर भरोसा- सुनेत्रा पवार<br />उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार ने कहा कि हमारे पुणे जिले के नसरापुर की एक बच्ची के रेप और मर्डर के मामले में कोर्ट ने जो फ़ैसला दिया है, उससे न्याय प्रक्रिया पर भरोसा मजबूत होता है। ऐसे अमानवीय कामों की समाज में कोई जगह नहीं है। हर महिला और लड़की की सुरक्षा सरकार की सबसे बड़ी प्राथमिकता है। ऐसे अपराधों के ख़िलाफ कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए। न्याय हुआ है, लेकिन ऐसी घटनाएं दोबारा न हों, इसलिए समाज और प्रशासन को मिलकर ज्यादा सतर्क रहने की ज़रूरत है। दुष्कर्म और हत्या जैसे अमानवीय अपराधों के लिए कोई माफ़ी नहीं है। कोर्ट के फैसले से न्यायपालिका पर भरोसा और मजबूत होता है। हमारी सरकार महिलाओं की सुरक्षा के लिए प्रतिबद्ध है। ऐसे अपराधियों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई करती रहेगी।</p>
<p>जल्द हो निर्णय पर अमल- उद्धव ठाकरे शिवसेना (यूबीटी) पक्षप्रमुख उद्धव ठाकरे ने कहा कि कोर्ट ने नसरापुर मामले में सही फैसला लिया है। हालांकि, इस निर्णय को जल्द से जल्द लागू किया जाना चाहिए। नराधमों को दो चौराहे पर फांसी- सुप्रिया सुले राकांपा (एसपी) की सांसद सुप्रिया सुले ने कोर्ट, पुलिस और मुख्यमंत्री को धन्यवाद दिया। उन्होंने कहा कि एसे नराधमों को चौराहे पर फांसी दी जानी चाहिए। जिस दिन यह बुरी घटना हुई सामने आई थी, हमने तय किया था कि इस मामले में राजनीति नहीं आएगी। हम मुख्यमंत्री से मिले थे और उन्होंने हमसे वादा किया था कि आरोपी को कड़ी सजा मिलेगी।</p>
<p>न मिले हत्यारों को राहत- नीलम गोर्हे शिवसेना (शिंदे गुट) की नेता नीलम गोर्हे ने कहा कि इस सरकार ने महिलाओं के लिए कई अहम फैसले लिए हैं। ऐसे अमानवीय अपराधों में समय पर न्याय मिलना बहुत जरूरी है। इससे न्यायपालिका पर लोगों का भरोसा मज़बूत होता है। सरकार को हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में भी इस मामले की अच्छे से पैरवी करनी चाहिए, ताकि आरोपियों को कोई राहत न मिले. कोई अपील वर्षों तक लंबित न रहे.यदि महिलाओं और बच्चों पर ज़ुल्म करने वालों को तुरंत कड़ी सज़ा मिले तो समाज में कानून का डर मज़बूत होगा। मिलेगी बच्चों को सुरक्षा- संजय पुराणिक महाराष्ट्र स्टेट कमीशन फॉर प्रोटेक्शन ऑफ चाइल्ड राइट्स के चेयरमैन संजय पुराणिक ने कहा कि गंभीर अपराध में आरोपी को मौत की सजा मिलने से बच्चों की सुरक्षा के लिए मौजूद ज्यूडिशियरी सिस्टम में लोगों का भरोसा मजबूत हुआ है। बच्चों को न्याय दिलाने के लिए अलग-अलग सिस्टम के बीच जो असरदार तालमेल हुआ है, वह एक मिसाल है। इससे समाज में बच्चों के ख़िलाफ जुर्म करने वालों के लिए संदेश गया है। कानून से बचने का कोई रास्ता नहीं है। सभी माता-पिता, शिक्षकों, सामाजिक संगठनों और नागरिकों को बच्चों की सुरक्षा के बारे में जागरूक रहना चाहिए। यदि कोई जुल्म, शोषण या संदिग्ध घटना नजर आती है, तो तुरंत संबंधित एजेंसियों को सूचित करना चाहिए। बिगड़ी सोच के लिए कोई जगह नहीं- अमोल कोल्हे राकांपा (एसपी) के सांसद डॉ. अमोल कोल्हे ने कहा कि मासूम साढ़े तीन साल की बच्ची को टॉर्चर करके मारने वाले कातिल को फांसी की सजा मिला है। कोर्ट ने आरोपी को फांसी की सजा सुनाकर न्यायपालिका पर भरोसा और पक्का किया है। यह</p>
<p>छत्रपति शिवाजी महाराज का महाराष्ट्र है, जिन्होंने मां-बहनों की सम्मान के लिए धरातल तैयार किया। बिगड़ी हुई सोच के लिए इस धरती पर कोई जगह नहीं है। ऐसे अमानवीय अपराधों में सख्त सजा और समय पर इंसाफ ही समाज में कानून का डर पैदा कर सकता है। मौत की सजा चेतावनी- रोहिणी खड़से एनसीपी (एसपी) की महिला इकाई की प्रदेश अध्यक्ष रोहिणी खड़से ने कहा कि एक मासूम बच्ची के सपने, उसका बचपन और उसकी पूरी ज़िंदगी इस कातिल ने बेरहमी से छीन ली। मौत की सजा बिगड़ी हुई सोच के लिए एक चेतावनी है। एक मासूम लड़की के सपने, उसका बचपन और उसकी पूरी ज़िंदगी इस कातिल ने बेरहमी से छीन ली। वो दर्द कभी भरा नहीं जा सकता। यह सज़ा सिर्फ़ एक आरोपी को दी गई सज़ा नहीं है, बल्कि हर उस बिगड़ी हुई सोच के लिए चेतावनी है जो औरतों और लड़कियों पर ज़ुल्म करने की हिम्मत करती है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Maharashtra</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 01 Jul 2026 11:53:37 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Online Desk]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>मुंबई : नितेश राणे को सिंधुदुर्ग कोर्ट ने दी एक महीने की जेल, मुंबई-गोवा हाइवे पर NHAI इंजीनियर पर फेंका था कीचड़</title>
                                    <description><![CDATA[<p>सिंधुदुर्ग की अदालत ने महाराष्ट्र के मंत्री नितेश राणे को 2019 के एक मामले में दोषी ठहराया। यह मामला तब का है जब नितेश राणे विपक्ष में थे और उन्होंने NHAI के एक इंजीनियर पर कीचड़ फेंका था। अदालत ने उन्हें एक महीने की जेल की सज़ा सुनाई और कहा कि कानून बनाने वालों को कानून अपने हाथ में नहीं लेना चाहिए।अदालत ने कहा कि कानून निर्माताओं को कानून अपने हाथ में नहीं लेना चाहिए। घटना के वक्त राणे विपक्ष के नेता थे। हालांकि, अदालत ने राणे की सजा निलंबित कर दी और उन्हें हाई कोर्ट में अपील करने का समय दिया, जबकि इस मामले में 29 अन्य आरोपियों को बरी कर दिया गया। </p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/49540/mumbai-sindhudurg-court-gives-one-month-jail-to-nitesh-rane"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-04/download---2026-04-28t114303.120.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>मुंबई :</strong> सिंधुदुर्ग की अदालत ने महाराष्ट्र के मंत्री नितेश राणे को 2019 के एक मामले में दोषी ठहराया। यह मामला तब का है जब नितेश राणे विपक्ष में थे और उन्होंने NHAI के एक इंजीनियर पर कीचड़ फेंका था। अदालत ने उन्हें एक महीने की जेल की सज़ा सुनाई और कहा कि कानून बनाने वालों को कानून अपने हाथ में नहीं लेना चाहिए।अदालत ने कहा कि कानून निर्माताओं को कानून अपने हाथ में नहीं लेना चाहिए। घटना के वक्त राणे विपक्ष के नेता थे। हालांकि, अदालत ने राणे की सजा निलंबित कर दी और उन्हें हाई कोर्ट में अपील करने का समय दिया, जबकि इस मामले में 29 अन्य आरोपियों को बरी कर दिया गया। <br />अतिरिक्त सत्र न्यायालय के न्यायाधीश वी एस देशमुख ने कहा कि हालांकि नितीश राणे का इरादा घटिया काम और जनता को हो रही असुविधा के खिलाफ आवाज उठाना था, लेकिन उन्हें किसी लोक सेवक को सार्वजनिक रूप से अपमानित या बेइज्जत नहीं करना चाहिए था। </p>
<p> </p>
<p><strong>अदालत ने क्या कहा</strong><br />न्यायाधीश ने कहा कि यदि ऐसी घटनाएं होती रहीं, तो लोक सेवक गरिमा के साथ अपने कर्तव्यों का निर्वहन नहीं कर पाएंगे। अदालत ने कहा कि ऐसी प्रवृत्ति पर अंकुश लगाना समय की मांग है। पूर्व केंद्रीय मंत्री नारायण राणे के पुत्र नितेश राणे उन 30 लोगों में शामिल थे जिन पर दंगा, लोक सेवक को कार्य करने से रोकने के लिए हमला करने और आपराधिक साजिश रचने सहित विभिन्न अपराधों के आरोप लगाए गए थे। घटना के समय वह कांग्रेस में थे। </p>
<p><strong>कई आरोपों से नितेश राणे बरी</strong><br />अदालत ने अधिकांश आरोपों के समर्थन में अपर्याप्त साक्ष्य पाए जाने के कारण नितेश राणे सहित सभी आरोपियों को इन अपराधों से बरी कर दिया। हालांकि, अदालत ने नितेश राणे को धारा 504 (सार्वजनिक शांति भंग करने के उद्देश्य से जानबूझकर अपमान करना) के तहत दोषी पाया और उन्हें एक महीने जेल की सजा सुनाई।</p>
<p><strong>मुंबई-गोवा राजमार्ग को लेकर हुई थी घटना</strong><br />राणे, जो उस समय कांग्रेस विधायक थे, ने चार जुलाई, 2019 को मुंबई-गोवा राजमार्ग के चौड़ीकरण कार्य का निरीक्षण करने के लिए भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण के अनुमंडल अभियंता प्रकाश शेडेकर को कंकावली में गड नदी पर बने पुल पर बुलाया था। अभियोजन पक्ष के अनुसार, सड़क निर्माण की खराब गुणवत्ता और जलभराव से नाराज नितेश राणे और उनके समर्थकों ने अभियंता का विरोध किया। उन्होंने शेडेकर पर कीचड़ वाला पानी डाला और उन्हें सार्वजनिक रूप से कीचड़ में चलने के लिए मजबूर किया। अदालत ने रिकॉर्ड में मौजूद सबूतों की जांच करने के बाद पाया कि शिकायतकर्ता (पीड़ित) भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण में उच्च पद पर कार्यरत थे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Maharashtra</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 28 Apr 2026 11:44:48 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Online Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>मुंबई : चर्चित जाह्नवी कुकरेजा मर्डर केस में दोषी को उम्रकैद की सजा</title>
                                    <description><![CDATA[<p>55वीं सेशंस कोर्ट ने चर्चित जाह्नवी कुकरेजा मर्डर केस में अहम फैसला सुनाया। कोर्ट ने पीड़िता की हत्या के मामले में उसके दोस्त जोगधंकर को दोषी करार देते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई। हालांकि, मामले में एक अन्य आरोपी दिया पाडलकर को कोर्ट ने बरी कर दिया। यह मामला 19 साल की जाह्नवी कुकरेजा की हत्या से जुड़ा था। 1 जनवरी 2021 को मुंबई के खार इलाके में जाह्नवी कुकरेजा अपने दोस्तों के साथ एक बिल्डिंग की छत पर नए साल की पार्टी में गई थी। इसी दौरान किसी बात को लेकर दोस्तों में बहस हो गई, जिसने बाद में हिंसा का रूप ले लिया।</p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/47391/mumbai-convict-sentenced-to-life-imprisonment-in-jhanvi-kukreja-murder"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-02/download---2026-02-01t122153.985.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>मुंबई :</strong> 55वीं सेशंस कोर्ट ने चर्चित जाह्नवी कुकरेजा मर्डर केस में अहम फैसला सुनाया। कोर्ट ने पीड़िता की हत्या के मामले में उसके दोस्त जोगधंकर को दोषी करार देते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई। हालांकि, मामले में एक अन्य आरोपी दिया पाडलकर को कोर्ट ने बरी कर दिया। यह मामला 19 साल की जाह्नवी कुकरेजा की हत्या से जुड़ा था। 1 जनवरी 2021 को मुंबई के खार इलाके में जाह्नवी कुकरेजा अपने दोस्तों के साथ एक बिल्डिंग की छत पर नए साल की पार्टी में गई थी। इसी दौरान किसी बात को लेकर दोस्तों में बहस हो गई, जिसने बाद में हिंसा का रूप ले लिया। आरोप था कि जोगधंकर और दिया पाडलकर ने मिलकर जाह्नवी पर हमला कर उसकी हत्या कर दी। इसके बाद उसके शव को घसीटते हुए नीचे लाया। कोर्ट में प्रॉसिक्यूशन ने कहा कि यह सब जोगधंकर और पाडलकर के रिश्तों को लेकर हुआ था। </p>
<p> </p>
<p>पीड़िता और उनके परिवार के एडवोकेट त्रिवंकुमार कर्णानी ने बताया कि कोर्ट ने खुले तौर पर यह रिकॉर्ड किया कि आरोपी नंबर 2, दिया पाडलकर अपराध स्थल पर थी और आरोपी नंबर 1, जोगधंकर के साथ मौजूद थी, जिसे आजीवन कारावास की सजा मिली, लेकिन दिया को शक के लाभ के तहत बरी किया गया। कोर्ट ने दिया के होंठ पर चोट और अस्पताल में दिए गए झूठे बयान को भी रिकॉर्ड किया।</p>
<p>एडवोकेट त्रिवंकुमार कर्णानी ने आगे कहा कि वे जल्द ही फैसले की सर्टिफाइड कॉपी प्राप्त करेंगे और उसके आधार पर दिया पाडलकर की बरी के पीछे की वजहों का विश्लेषण करेंगे। इसके बाद वे जरूरी कानूनी कार्रवाई करते हुए इस फैसले को चुनौती देंगे।</p>]]></content:encoded>
                
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                <pubDate>Sun, 01 Feb 2026 12:27:50 +0530</pubDate>
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