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                <title>investigating - Rokthok Lekhani News </title>
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                <description>investigating RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>मुंबई: लोकभवन में ड्यूटी पर तैनात SRPF कांस्टेबल ने गोली मारकर की आत्महत्या, जांच में जुटी पुलिस</title>
                                    <description><![CDATA[<p>हाई सिक्योरिटी क्षेत्र स्थित महाराष्ट्र लोकभवन से एक दुखद घटना सामने आई है. यहां ड्यूटी पर तैनात स्टेट रिजर्व पुलिस फोर्स ग्रुप-16, कोल्हापुर के कॉन्स्टेबल अमलदार कौस्तुभ सांगले ने कथित तौर पर अपनी सर्विस गन से खुद को गोली मारकर आत्महत्या कर ली. इस  घटना के बाद पूरे लोकभवन परिसर में हड़कंप मच गया. सूचना मिलते ही मालाबार हिल पुलिस स्टेशन की टीम मौके पर पहुंची और जांच शुरू कर दी. घटना के समय लोकभवन के भीतर मुंबई पुलिस के अधिकारी भी तैनात थे. पुलिस को इस मामले में कोई सुसाइड नोट नहीं मिला है और न ही आत्महत्या के कारणों का अभी कुछ पता चल सका है. </p>
<p> </p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/50586/srpf-constable-on-duty-in-mumbai-lok-bhavan-commits-suicide"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-07/768-512-27088528-644-27088528-1783401795869.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>मुंबई : </strong>हाई सिक्योरिटी क्षेत्र स्थित महाराष्ट्र लोकभवन से एक दुखद घटना सामने आई है. यहां ड्यूटी पर तैनात स्टेट रिजर्व पुलिस फोर्स ग्रुप-16, कोल्हापुर के कॉन्स्टेबल अमलदार कौस्तुभ सांगले ने कथित तौर पर अपनी सर्विस गन से खुद को गोली मारकर आत्महत्या कर ली. इस  घटना के बाद पूरे लोकभवन परिसर में हड़कंप मच गया. सूचना मिलते ही मालाबार हिल पुलिस स्टेशन की टीम मौके पर पहुंची और जांच शुरू कर दी. घटना के समय लोकभवन के भीतर मुंबई पुलिस के अधिकारी भी तैनात थे. पुलिस को इस मामले में कोई सुसाइड नोट नहीं मिला है और न ही आत्महत्या के कारणों का अभी कुछ पता चल सका है. </p>
<p> </p>
<p><strong>जांच में जुटी पुलिस</strong><br />इस घटना के बाद मौके पर मुंबई पुलिस के जॉइंट कमिश्नर मनोज शर्मा भी पहुंचे हैं. पुलिस सभी पहलुओं से मामले की जांच कर रही है. मामले में विस्तृत जानकारी का इंतजार है. सूत्रों ने बताया कि कौस्तुभ शाम 6 बजे से रात 9 बजे की शिफ्ट में थे. उनकी लोकभवन के टावर 2 पर ड्यूटी थी. यहां हर 3 घंटे में शिफ्ट बदलती है. इसी बीच एक रूम नुमा जगह पर कौस्तुभ ने खुद की सर्विस गन से एक गोली मार ली. </p>
<p><strong>कैसे सामने आई आत्महत्या की खबर</strong><br />कौस्तुभ के पास एसएलआर थी, जिससे उन्होंने अपने आपको गोली मारी है. एसएलआर का एक राउंड (गोली) 7.62 एमएम है. आत्महत्या का पत तब चला जब कौस्तुभ को रिलीव करने उनका सहकर्मी आया. सहकर्मी ने जब खून देखा तो तुरंत बाकियों को इसकी जानकारी दी, जिसके तुररंत बाद उस जगह को सील कर जांच शुरू कर दी गई. सूत्रों का दावा है कि कौस्तुभ शराब पिया करता था और डिप्रेशन में भी था. हालांकि, पुलिस आत्महत्या के कारणों का पता लगाने में जुटी है.</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Mumbai</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 07 Jul 2026 13:27:15 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Online Desk]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>मुंबई जाने के लिए एयरपोर्ट पहुंचे यात्री के बैग से मिले चार कारतूस, पुलिस जांच में जुटी</title>
                                    <description><![CDATA[<p>लाल बहादुर शास्त्री अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे पर सुरक्षा जांच के दौरान एक यात्री के हैंड बैग से चार जिंदा कारतूस बरामद हुआ. सीआईएसएफ के जवानों ने तत्काल यात्री को पकड़कर पूछताछ शुरू कर दी. पूछताछ के बाद सीआईएसएफ ने यात्री को पुलिस को सौंपा दिया. हालांकि, बाद में यात्री द्वारा वैध शस्त्र लाइसेंस दिखाया गया और भूलवश कारतूस लेकर आने की बात स्वीकार किया.  </p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/47524/four-cartridges-found-in-the-bag-of-a-passenger-who"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-02/download---2026-02-06t141251.730.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>वाराणसी :</strong> लाल बहादुर शास्त्री अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे पर सुरक्षा जांच के दौरान एक यात्री के हैंड बैग से चार जिंदा कारतूस बरामद हुआ. सीआईएसएफ के जवानों ने तत्काल यात्री को पकड़कर पूछताछ शुरू कर दी. पूछताछ के बाद सीआईएसएफ ने यात्री को पुलिस को सौंपा दिया. हालांकि, बाद में यात्री द्वारा वैध शस्त्र लाइसेंस दिखाया गया और भूलवश कारतूस लेकर आने की बात स्वीकार किया.  </p>
<p> </p>
<p>32 बोर के चार जिंदा कारतूस बरामद: जानकारी के अनुसार, बलिया जनपद के बेल्थरा रोड (ग्राम चौकियां) निवासी 55 वर्षीय मंजूर आलम खा स्पाइसजेट की फ्लाइट संख्या एसजी-330 से वाराणसी से मुंबई जाने के लिए एयरपोर्ट पहुंचे थे. मंजूर के हैंड बैग को जब सुरक्षा जांच के लिए स्कैनर मशीन में डाला गया तो सीआईएसएफ जवानों को उसमें संदिग्ध वस्तु दिखाई दी. तलाशी लेने पर बैग के अंदर से 32 बोर के चार जिंदा कारतूस बरामद किए गए. </p>
<p>कारतूस मिलते ही सुरक्षाकर्मियों ने यात्री को विमान में सवार होने से रोक दिया और फूलपुर थाना पुलिस को सूचित किया. पूछताछ के दौरान मंजूर आलम ने बताया कि उनके पास शस्त्र का वैध लाइसेंस है और वे गलती से कारतूस बैग में ही भूल गए थे. </p>
<p>पुलिस आगे की कार्रवाई में जुटी: फूलपुर थाना अध्यक्ष इंस्पेक्टर अतुल कुमार सिंह ने बताया कि यात्री को हिरासत में लेकर संबंधित दस्तावेजों का सत्यापन किया गया. उन्होंने पुष्टि की कि यात्री के पास मौजूद शस्त्र लाइसेंस पूरी तरह वैध है. यात्री ने अपनी गलती स्वीकार की है कि वह भूलवश कारतूस हैंड बैग में लेकर एयरपोर्ट पहुंच गया था. पुलिस ने बरामद कारतूसों को कब्जे में लेकर आगे की कार्रवाई में जुट गई है.</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Mumbai</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 06 Feb 2026 14:14:05 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Online Desk]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>मुंबई : शीना बोरा मर्डर केस में पूर्व जांच अधिकारी से दोबारा पूछताछ की मंज़ूरी </title>
                                    <description><![CDATA[<p>मुंबई की एक स्पेशल CBI कोर्ट ने शीना बोरा मर्डर केस में पूर्व जांच अधिकारी नितिन अलंकुरे से दोबारा पूछताछ करने की एजेंसी की अर्जी को कुछ हद तक मंज़ूरी दे दी है। उनकी मुख्य पूछताछ रिकॉर्ड होने के सात साल बाद और अब तक 143 गवाहों से पूछताछ हो चुकी है। यह आदेश 28 नवंबर को स्पेशल जज डॉ. जे. पी. दारकर ने दिया था।शीना बोराअलंकुरे से 2018 में सरकारी गवाह के तौर पर पूछताछ हुई थी।</p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/45914/mumbai--permission-granted-to-re-examine-former-investigating-officer-in-sheena-bora-murder-case"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2025-12/download---2025-12-02t120904.973.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>मुंबई : </strong>मुंबई की एक स्पेशल CBI कोर्ट ने शीना बोरा मर्डर केस में पूर्व जांच अधिकारी नितिन अलंकुरे से दोबारा पूछताछ करने की एजेंसी की अर्जी को कुछ हद तक मंज़ूरी दे दी है। उनकी मुख्य पूछताछ रिकॉर्ड होने के सात साल बाद और अब तक 143 गवाहों से पूछताछ हो चुकी है। यह आदेश 28 नवंबर को स्पेशल जज डॉ. जे. पी. दारकर ने दिया था।शीना बोराअलंकुरे से 2018 में सरकारी गवाह के तौर पर पूछताछ हुई थी। उन्होंने शीना बोरा के दो पासपोर्ट ज़ब्त करने, गवाह राहुल मुखर्जी से मिले एक मोबाइल हैंडसेट और निकाले गए फ़ोन डेटा वाली CD बनाने के बारे में गवाही दी थी। उनकी मुख्य पूछताछ उसी साल बंद कर दी गई थी, और गवाह को बाद में सिर्फ़ क्रॉस-एग्जामिनेशन के लिए बुलाया गया था।</p>
<p> </p>
<p>CBI ने मुख्य पूछताछ फिर से शुरू करने की मांग करते हुए कहा कि कुछ डॉक्यूमेंट्स और चीज़ें – जिनमें पासपोर्ट, मोबाइल फ़ोन, संबंधित CDs, फॉरवर्डिंग लेटर और मार्क किए गए एग्ज़िबिट्स शामिल हैं – गवाह को दिखाने की ज़रूरत है। इंद्राणी मुखर्जी और सह-आरोपियों के बचाव पक्ष के वकील ने इस कदम का विरोध किया और कहा कि यह एक दशक की देरी के बाद कमियों को पूरा करने की कोशिश है। </p>
<p>जज दारकेकर ने एजेंसी की उस रिक्वेस्ट को खारिज कर दिया जिसमें मुख्य जांच को पहले बंद करने को रद्द करने की बात कही गई थी, लेकिन सीमित री-एग्जामिनेशन की इजाज़त दी गई थी, यह कहते हुए कि एविडेंस एक्ट का सेक्शन 138 प्रॉसिक्यूशन को क्रॉस-एग्जामिनेशन के दौरान उठने वाले मामलों पर सफाई मांगने का अधिकार देता है। कोर्ट ने कहा कि बचाव पक्ष पेश किए गए किसी भी नए मटीरियल पर गवाह से आगे क्रॉस-एग्जामिनेशन करने का अधिकार रखेगा।</p>
<p>री-एग्जामिनेशन के दायरे पर सुप्रीम कोर्ट के उदाहरण का हवाला देते हुए, कोर्ट ने कहा कि आरोपी को कोई नुकसान नहीं होगा, खासकर इसलिए क्योंकि कई संबंधित आर्टिकल पहले ही एक स्वतंत्र पंच गवाह के ज़रिए सबूत में मार्क किए जा चुके थे। कोर्ट ने माना कि प्रॉसिक्यूशन की रिक्वेस्ट मामले में कमियों को भरने के लिए नहीं थी और री-एग्जामिनेशन की इजाज़त देने से मामले को उसकी मेरिट के आधार पर तय करने में मदद मिलेगी।इसलिए कोर्ट ने मुख्य गवाही को फिर से खोलने से इनकार करते हुए बताए गए डॉक्यूमेंट्स और आर्टिकल्स पर री-एग्जामिनेशन की इजाज़त दी, और पार्टियों को उसी के अनुसार काम करने का निर्देश दिया।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Mumbai</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 02 Dec 2025 12:09:56 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Online Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>मुंबई : बैंक लोन डिफॉल्ट मामलों की जांच; हाई कोर्ट ने एनफोर्समेंट डायरेक्टरेट की अटैचमेंट को बहाल किया</title>
                                    <description><![CDATA[<p>विजय माल्या की बंद हो चुकी किंगफिशर एयरलाइंस लिमिटेड के ₹9,200 करोड़ के बैंक लोन डिफॉल्ट मामलों की जांच कर रही एनफोर्समेंट डायरेक्टरेट की मुंबई यूनिट को राहत देते हुए, कर्नाटक हाई कोर्ट ने आईडीबीआई बैंक से कथित तौर पर ₹750 करोड़ के बकाया लोन से जुड़े एक मामले की जांच करते हुए बेंगलुरु के एक फ्लैट की एनफोर्समेंट डायरेक्टरेट की अटैचमेंट को बहाल कर दिया है।किंगफिशर एयरलाइंस की जांच में बेंगलुरु के फ्लैट की एनफोर्समेंट डायरेक्टरेट की अटैचमेंट कानूनी है: कर्नाटक हाई कोर्ट ने अपने 14 नवंबर के आदेश में फ्लैट की अटैचमेंट को "कानूनी" बताते हुए, अपीलेट ट्रिब्यूनल, (प्रिवेंशन ऑफ मनी-लॉन्ड्रिंग एक्ट), नई दिल्ली के अगस्त 2019 के आदेश के खिलाफ एजेंसी की चुनौती को बरकरार रखा, जिसने इसे रद्द कर दिया था।</p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/45645/high-court-reinstates-enforcement-directorates-attachment-to-investigate-mumbai-bank"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2025-11/download---2025-11-21t103529.593.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>मुंबई : </strong>विजय माल्या की बंद हो चुकी किंगफिशर एयरलाइंस लिमिटेड के ₹9,200 करोड़ के बैंक लोन डिफॉल्ट मामलों की जांच कर रही एनफोर्समेंट डायरेक्टरेट की मुंबई यूनिट को राहत देते हुए, कर्नाटक हाई कोर्ट ने आईडीबीआई बैंक से कथित तौर पर ₹750 करोड़ के बकाया लोन से जुड़े एक मामले की जांच करते हुए बेंगलुरु के एक फ्लैट की एनफोर्समेंट डायरेक्टरेट की अटैचमेंट को बहाल कर दिया है।किंगफिशर एयरलाइंस की जांच में बेंगलुरु के फ्लैट की एनफोर्समेंट डायरेक्टरेट की अटैचमेंट कानूनी है: कर्नाटक हाई कोर्ट ने अपने 14 नवंबर के आदेश में फ्लैट की अटैचमेंट को "कानूनी" बताते हुए, अपीलेट ट्रिब्यूनल, (प्रिवेंशन ऑफ मनी-लॉन्ड्रिंग एक्ट), नई दिल्ली के अगस्त 2019 के आदेश के खिलाफ एजेंसी की चुनौती को बरकरार रखा, जिसने इसे रद्द कर दिया था।</p>
<p> </p>
<p>कोर्ट ने बताया कि फ्लैट यूनाइटेड ब्रुअरीज (होल्डिंग्स) लिमिटेड का था जिसे तब माल्या कंट्रोल करते थे, जिसमें अटैचमेंट के समय किंगफिशर एयरलाइंस लिमिटेड पूरी तरह से मालिकाना हक वाली सब्सिडियरी थी। इसमें यह भी कहा गया कि यूबीएचएल का एक लोकल डेवलपर के साथ पहले का ‘एग्रीमेंट टू सेल’, जिसने सितंबर 2011 तक लगभग ₹18.38 करोड़ का पेमेंट किया था, कानूनी तौर पर सही नहीं था क्योंकि यह एक अनरजिस्टर्ड एग्रीमेंट था, और टाइटल ट्रांसफर नहीं हुआ था।8,321 स्क्वेयर फीट का फ्लैट, नंबर 7ए, बेंगलुरु के किंगफिशर टावर में कुछ अंडर-कंस्ट्रक्शन फ्लैट्स में से एक था, जिसे एनफोर्समेंट डायरेक्टरेट ने 11 जून, 2016 को पीएमएलए एक्ट के प्रोविज़न के अनुसार अटैच किया था। एनफोर्समेंट डायरेक्टरेट द्वारा फ्लैट के प्रोविज़नल अटैचमेंट को पहले दिसंबर 2016 में एडजुडिकेटिंग अथॉरिटी, पीएमएलए द्वारा कन्फर्म किया गया था।पीड़ित डेवलपर ने एडजुडिकेटिंग अथॉरिटी के ‘कन्फर्मेशन’ को अपीलेट ट्रिब्यूनल के सामने चैलेंज किया, जिसने प्रोविज़नल अटैचमेंट ऑर्डर को कैंसल कर दिया। इसके बाद एनफोर्समेंट डायरेक्टरेट ने अक्टूबर 2019 में अपीलेट ट्रिब्यूनल के ऑर्डर के खिलाफ हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया।हाई कोर्ट ने एनफोर्समेंट डायरेक्टरेट के पक्ष में दो खास सवालों पर फैसला सुनाया, जो अपीलेट ट्रिब्यूनल के ऑर्डर के खिलाफ एजेंसी की अपील में थे:</p>
<p>1. क्या डेवलपर की फर्म को अनरजिस्टर्ड ‘एग्रीमेंट टू सेल’ के आधार पर फ्लैट का मालिक कहा जा सकता है? 2. क्या फ्लैट को पीएमएलए, 2002 के सेक्शन 2(1)(यू) के प्रोविजन के तहत ‘क्राइम से हुई कमाई’ के तौर पर अटैच किया जा सकता है?कोर्ट ने कहा कि अनरजिस्टर्ड एग्रीमेंट टू सेल होने से पहले ही फ्लैट के लिए “लगभग पूरी कीमत” का पेमेंट “इन ट्रांजैक्शन की सच्चाई और असलियत पर बहुत बड़ा शक पैदा करेगा”। कोर्ट ने कहा, “सेल डीड के रजिस्ट्रेशन के बिना, अचल प्रॉपर्टी में कोई अधिकार, टाइटल, इंटरेस्ट ट्रांसफर नहीं किया जा सकता है।” “एक सेल कॉन्ट्रैक्ट (एग्रीमेंट टू सेल), जो कन्वेयंस का रजिस्टर्ड डीड नहीं है, वह ट्रांसफर ऑफ़ प्रॉपर्टी एक्ट की ज़रूरतों को पूरा नहीं करेगा।” कोर्ट ने फैसला सुनाया कि डेवलपर की फर्म का फ्लैट पर कोई टाइटल नहीं था, और प्रॉपर्टी यूबीएचएल की थी।हाई कोर्ट ने आगे फैसला सुनाया, “एनफोर्समेंट डायरेक्टरेट के पास ऊपर बताई गई प्रॉपर्टी को अटैच करने का पूरा अधिकार था… क्योंकि यह पीएमएलए, 2002 के सेक्शन 2(1)(यू) के तहत बताए गए क्राइम से हुई कमाई की वैल्यू के बराबर थी। हमारा यह भी मानना ​​है कि बैंकों के कंसोर्टियम के पक्ष में प्रॉपर्टीज़ को वापस लाने की कार्रवाई पेंडिंग होने और इस अपील के पेंडिंग होने के बावजूद सेल डीड के रजिस्ट्रेशन के लिए ऑफिशियल लिक्विडेटर का नो ऑब्जेक्शन एक सही काम नहीं था।”</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>National</category>
                                    

                <link>https://www.rokthoklekhani.com/article/45645/high-court-reinstates-enforcement-directorates-attachment-to-investigate-mumbai-bank</link>
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                <pubDate>Fri, 21 Nov 2025 10:36:26 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Online Desk]]></dc:creator>
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