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                <title>granted - Rokthok Lekhani News </title>
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                            <item>
                <title>मुंबई: पुलिस की बड़ी चूक, 'गिरफ्तारी का आधार' न बताने पर आरोपी सौतेले पिता को मिली जमानत</title>
                                    <description><![CDATA[<p>बॉम्बे हाई कोर्ट ने पॉक्सो एक्ट और रेप के गंभीर आरोपों में गिरफ्तार एक आरोपी सौतेले पिता को नियमित जमानत दे दी है. अदालत ने कहा कि गिरफ्तारी के समय आरोपी को गिरफ्तारी के आधार   नहीं बताए गए थे, जो कि संविधान और कानून के तहत अनिवार्य है. इसी कारण अदालत ने आरोपी को जमानत देने का आदेश पारित किया. </p>
<p> </p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/50815/big-mistake-of-mumbai-police-accused-stepfather-gets-bail-for"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-07/images---2026-07-18t114944.670.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>मुंबई : </strong>बॉम्बे हाई कोर्ट ने पॉक्सो एक्ट और रेप के गंभीर आरोपों में गिरफ्तार एक आरोपी सौतेले पिता को नियमित जमानत दे दी है. अदालत ने कहा कि गिरफ्तारी के समय आरोपी को गिरफ्तारी के आधार   नहीं बताए गए थे, जो कि संविधान और कानून के तहत अनिवार्य है. इसी कारण अदालत ने आरोपी को जमानत देने का आदेश पारित किया. </p>
<p> </p>
<p>यह मामला वडगांव मावल पुलिस स्टेशन में दर्ज वर्ष 2023 के अपराध क्रमांक 719 से जुड़ा है. इस मामले में आरोपी पर भारतीय दंड संहिता की धारा 376, 354, 504 और पॉक्सो एक्ट की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है. आरोप है कि पीड़ित बच्चों के साथ पहले उनके जैविक माता-पिता और बाद में उनके सौतेले पिता द्वारा यौन उत्पीड़न किया गया था.</p>
<p><strong>गिरफ्तारी और कानूनी प्रक्रिया का घटनाक्रम</strong><br />मामले में तीन आरोपी हैं. पहला आरोपी बच्चों का जैविक पिता, दूसरा आरोपी (आवेदक) उनका सौतेला पिता और तीसरी आरोपी उनकी जैविक मां है. आवेदक को 15 दिसंबर 2023 को गिरफ्तार किया गया था. उसकी जमानत याचिका सितंबर 2025 में सत्र न्यायालय ने खारिज कर दी थी, जिसके बाद उसने बॉम्बे हाईकोर्ट का रुख किया.</p>
<p><strong>हाई कोर्ट में दलीलें और सरकारी पक्ष की स्वीकारोक्ति</strong><br />आरोपी की ओर से हाईकोर्ट में दलील दी गई कि उसे गिरफ्तारी के आधार नहीं बताए गए थे और वह 15 दिसंबर 2023 से जेल में बंद है. वहीं, सरकारी पक्ष ने अदालत को बताया कि विशेष मामले में 20 जून 2026 को आरोप तय किए जा चुके हैं, लेकिन अभी तक किसी भी गवाह का बयान दर्ज नहीं किया गया है. सबसे महत्वपूर्ण बात यह रही कि जांच अधिकारी के निर्देश पर सरकारी वकील ने अदालत को बताया कि आरोपी को गिरफ्तारी के समय गिरफ्तारी के आधार उपलब्ध नहीं कराए गए थे. </p>
<p><strong>सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला</strong><br />सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के ‘मिहिर राजेश शाह बनाम महाराष्ट्र राज्य’ मामले में दिए गए फैसले का हवाला दिया. सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि किसी भी अपराध में गिरफ्तार व्यक्ति को उसकी गिरफ्तारी के आधार लिखित रूप में और उसकी समझ की भाषा में बताना अनिवार्य है. यदि ऐसा नहीं किया जाता है तो गिरफ्तारी और उसके बाद की न्यायिक हिरासत अवैध मानी जा सकती है और आरोपी को रिहा किए जाने का अधिकार प्राप्त हो सकता है. </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Mumbai</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 18 Jul 2026 11:50:03 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Online Desk]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>मुंबई : 2011 मुंबई धमाका मामला: आरोपियों को 15 साल बाद जमानत </title>
                                    <description><![CDATA[<h6>मुंबई की एक विशेष अदालत ने वर्ष 2011 के मुंबई ट्रिपल बम धमाकों के आरोपी नकी अहमद शेख और हारून नायक को जमानत दे दी है। दोनों आरोपी पिछले 15 वर्षों से जेल की सलाखों के पीछे थे।</h6>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/49125/mumbai-2011-mumbai-blasts-case-accused-get-bail-after-15"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-04/download---2026-04-11t105312.100.jpg" alt=""></a><br /><h6><strong>मुंबई : </strong>मुंबई की एक विशेष अदालत ने वर्ष 2011 के मुंबई ट्रिपल बम धमाकों के आरोपी नकी अहमद शेख और हारून नायक को जमानत दे दी है। दोनों आरोपी पिछले 15 वर्षों से जेल की सलाखों के पीछे थे।</h6>
<h6> </h6>
<h6><strong>'इंतजार की भी सीमा होती है'</strong><br />मामले की सुनवाई करते हुए विशेष न्यायाधीश सत्यनारायण आर नवंदर ने संविधान के अनुच्छेद 21 का हवाला दिया। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि किसी भी आरोपी को अनिश्चितकाल के लिए जेल में नहीं रखा जा सकता, खासकर तब जब मुकदमा खत्म होने के आसार जल्द नजर न आ रहे हों। अदालत ने कहा कि 'त्वरित सुनवाई' का अधिकार केवल कानून की किताबों में लिखने के लिए नहीं है, बल्कि इसे धरातल पर उतारना भी जरूरी है।</h6>
<h6><strong>15 साल की कैद और अभी भी 100 गवाह बाकी</strong><br />हैरानी की बात यह है कि 2011 में हुई इन गिरफ्तारियों के आठ साल बाद, यानी 2019 में जाकर आरोप तय किए गए थे। हालांकि अब इस मामले की सुनवाई दैनिक आधार पर चल रही है, लेकिन इसकी रफ्तार अब भी चिंता का विषय है। </h6>
<h6>अदालत के सामने पेश किए गए आंकड़ों के मुताबिक,अब तक कुल 203 गवाहों के बयान दर्ज किए जा चुके हैं। अभी भी 100 से अधिक गवाहों से पूछताछ बाकी है। मुकदमे की वर्तमान गति को देखते हुए इसे पूरा होने में अभी कई साल और लग सकते हैं। इसी आधार पर अदालत ने माना कि आरोपियों को और अधिक समय तक सलाखों के पीछे रखना उनके मौलिक अधिकारों का उल्लंघन होगा।</h6>
<h6><strong>हाईकोर्ट के आदेश का बना आधार</strong><br />अदालत ने यह भी गौर किया कि बॉम्बे हाईकोर्ट पहले ही इस मामले के अन्य सह-आरोपियों को इसी तरह की देरी के आधार पर जमानत दे चुका है। समानता के सिद्धांत को बरकरार रखते हुए, विशेष मकोका अदालत ने नकी अहमद और हारून नायक को 1,00,000 रुपये के निजी मुचलके और कुछ सख्त शर्तों के साथ रिहा करने का आदेश दिया। </h6>
<h6>13 जुलाई 2011 को मुंबई एक बार फिर दहल उठी थी। शहर के ओपेरा हाउस, जवेरी बाजार और दादर जैसे व्यस्त इलाकों में सिलसिलेवार बम धमाके हुए थे। इस आतंकी हमले में 27 मासूमों की जान गई थी। वहीं,  130 से अधिक लोग गंभीर रूप से घायल हुए थे।</h6>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Mumbai</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 11 Apr 2026 10:55:24 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Online Desk]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>मुंबई स्लम फ्री; प्राइवेट डेवलपर्स और शिवशाही पुनर्वास प्रोजेक्ट लिमिटेड के बीच स्पेशल पर्पस व्हीकल्स बनाने को मंज़ूरी</title>
                                    <description><![CDATA[<p>महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे मुंबई को झुग्गी-मुक्त शहर बनाने की दिशा में एक कदम उठाया है। उन्होंने बालासाहेब ठाकरे शहरी जन कल्याण अभियान की घोषणा की। इस पहल का उद्देश्य झुग्गी-झोपड़ियों के पुनर्विकास में तेजी लाना है और साथ ही नए अवैध अतिक्रमणों को रोकने के लिए एडवांस एनईटीआरएम (नेटवर्क फॉर एनक्रोचमेंट ट्रैकिंग एंड रिपोर्टिंग फॉर मुंबई) तकनीक को लागू करना है।</p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/48847/approval-to-form-special-purpose-vehicles-between-mumbai-slum-free"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-03/download---2026-03-31t132315.335.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>मुंबई : </strong>महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे मुंबई को झुग्गी-मुक्त शहर बनाने की दिशा में एक कदम उठाया है। उन्होंने बालासाहेब ठाकरे शहरी जन कल्याण अभियान की घोषणा की। इस पहल का उद्देश्य झुग्गी-झोपड़ियों के पुनर्विकास में तेजी लाना है और साथ ही नए अवैध अतिक्रमणों को रोकने के लिए एडवांस एनईटीआरएम (नेटवर्क फॉर एनक्रोचमेंट ट्रैकिंग एंड रिपोर्टिंग फॉर मुंबई) तकनीक को लागू करना है। उन्होंने कहा कि बालासाहेब ठाकरे की जन्म शताब्दी के दौरान शुरू किया गया यह महत्वपूर्ण अभियान, दिवंगत नेता के शहर के लिए दृष्टिकोण को एक उपयुक्त श्रद्धांजलि है। </p>
<p> </p>
<p>राज्य सरकार के इस फैसले से झुग्गी-झोपड़ी पुनर्विकास प्रक्रिया को काफी गति मिलने की उम्मीद है, जिससे नागरिकों के लिए सुसज्जित और सुरक्षित आवासों में स्थानांतरित होने का मार्ग प्रशस्त होगा। उन्होंने कहा कि हम इस मिशन के माध्यम से बालासाहेब ठाकरे के झुग्गी-मुक्त मुंबई के सपने को साकार करने के लिए दृढ़ संकल्पित हैं। </p>
<p><strong>ऐसे इलाकों को प्राथमिकता</strong><br />उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के अनुसार, इस अभियान में 50 एकड़ से अधिक क्षेत्रफल वाले उन क्षेत्रों को प्राथमिकता दी जाएगी जहां 51 प्रतिशत से अधिक क्षेत्र झुग्गी-झोपड़ी वाला है। झुग्गी-झोपड़ी क्लस्टर पुनर्विकास योजना को झुग्गी पुनर्वास प्राधिकरण द्वारा निजी, सरकारी और अर्ध-सरकारी भूमि के बड़े भूखंडों पर लागू किया जाएगा।</p>
<p><strong>मैपिंग और बायोमेट्रिक सत्यापन</strong><br />सभी झुग्गीवासियों का सटीक मानचित्रण और बायोमेट्रिक सत्यापन किया जाएगा। उन्होंने आगे कहा कि क्रियान्वयन को सुव्यवस्थित करने के लिए बृहन्मुंबई नगर निगम, मुंबई महानगर क्षेत्र विकास प्राधिकरण और महाप्रीत जैसी एजेंसियों के साथ समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर किए जाएंगे। </p>
<p>निवासियों के लिए एक बड़ी राहत देते हुए सरकार ने पुनर्निर्मित मकानों का न्यूनतम आकार बढ़ाने का निर्णय लिया है। अब सभी पात्र निवासियों को 300 वर्ग फुट के अपार्टमेंट मिलेंगे। मौजूदा पुरानी परियोजनाओं को भी इन नए मानकों के अनुरूप उन्नत किया जाएगा। उपमुख्यमंत्री ने कहा कि मुंबईमें नई झुग्गियों के निर्माण को रोकने के लिए सरकार एनईटीआरएम योजना शुरू कर रही है।  </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Mumbai</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 31 Mar 2026 13:25:09 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Online Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>मुंबई : मुंबईकरों को हल्के में लिया गया, सिर्फ़ कॉन्ट्रैक्ट पर ध्यान दिया गया; सिस्टम को निष्पक्ष बनाएँगे  - मेयर रितु तावड़े </title>
                                    <description><![CDATA[<p>बीएमसी की मेयर रितु तावड़े (53) ने कहा कि वह बीएमसी पर ठेकेदारों के एक गुट की पकड़ को तोड़ने के लिए दृढ़ हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि शिवसेना (यूबीटी) और कांग्रेस ने बृहन्मुंबई नगर निगम में अपने कार्यकाल के दौरान मुंबईकरों को हल्के में लिया। ``उनका ध्यान कभी भी शासन पर नहीं था—उनका सारा ध्यान ठेकों पर था।</p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/48600/mumbai-mumbaikars-were-taken-lightly-only-contract-was-considered-will"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-03/download---2026-03-21t123045.994.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>मुंबई : </strong>बीएमसी की मेयर रितु तावड़े (53) ने कहा कि वह बीएमसी पर ठेकेदारों के एक गुट की पकड़ को तोड़ने के लिए दृढ़ हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि शिवसेना (यूबीटी) और कांग्रेस ने बृहन्मुंबई नगर निगम में अपने कार्यकाल के दौरान मुंबईकरों को हल्के में लिया। ``उनका ध्यान कभी भी शासन पर नहीं था—उनका सारा ध्यान ठेकों पर था। स्टैंडिंग कमेटी में इन पार्टियों के बीच आपसी समझ थी, जिसकी वजह से उन्हीं ठेकेदारों को बार-बार मौके मिलते रहे। हम इस गहरी जड़ें जमा चुके सिंडिकेट को तोड़ने, सिस्टम को खोलने और इसे निष्पक्ष बनाने के लिए दृढ़ हैं," उन्होंने जोर देकर कहा। इंटरव्यू के कुछ अंश:</p>
<p> </p>
<p>मेयर के तौर पर आपकी मुख्य चुनौतियां क्या रही हैं? शिवसेना (यूबीटी) और कांग्रेस ने अपने कार्यकाल के दौरान मुंबईकरों को हल्के में लिया। उनकी प्राथमिकता कभी भी शासन नहीं थी—उनकी प्राथमिकता ठेके, टेंडर और पर्दे के पीछे की आपसी समझ थी। नतीजतन, 2014 से कई ज़रूरी नागरिक मुद्दे अटके पड़े हैं, जिन्हें अब मैं सुलझाने का काम कर रही हूं। हालांकि मेयर को पहला नागरिक कहा जाता है, लेकिन मैं खुद को मुंबईकरों का पहला ``सेवक" मानती हूं। मेरी सबसे बड़ी चुनौती—और ज़िम्मेदारी—मुंबई को वैसा बनाना है, जिसके उसके नागरिक सचमुच हकदार हैं।</p>
<p><br />मुंबई को चार साल बाद मेयर मिला है, इसलिए नागरिकों को आपसे बहुत उम्मीदें हैं। हर दिन कई लोग बहुत उम्मीद लेकर आपसे मिलने आते हैं। आपका अनुभव कैसा रहा है? जिस दिन से, यानी 11 फरवरी को मैंने पद संभाला, उसी दिन से मैंने यह तय कर लिया था कि जो भी लोग मेरे ऑफिस आएंगे, मैं उन सभी से मिलूंगी। मैं रोज़ाना अपने केबिन में 200 से 250 नागरिकों से खुद बातचीत करती हूं, और जब तक लाइन में खड़े आखिरी व्यक्ति की बात नहीं सुन लेती, तब तक अपनी जगह से नहीं उठती। पहले नागरिकों को इस तरह की पहुंच नहीं दी जाती थी—कई लोगों को तो अपनी शिकायतें लेकर मेयर के ऑफिस में कदम रखने की भी इजाज़त नहीं थी। मैंने इस स्थिति को बदल दिया है। मैं हर मुद्दे को सुनती हूं और जहां भी मुमकिन होता है, संबंधित अधिकारियों को सीधे फोन करके मौके पर ही उसका समाधान कर देती हूं। आज लोग तुरंत नतीजे देख रहे हैं, और यह बात कि मैं काम करवा सकती हूं, लोगों के बीच चर्चा का विषय बन गई है। इसलिए, ज़्यादा से ज़्यादा मुंबईकर इस भरोसे के साथ आगे आ रहे हैं कि आखिरकार उनकी आवाज़ सुनी जाएगी। जब आपने पदभार संभाला, तो आपने 100-दिन की कार्ययोजना की घोषणा की थी। अब तक क्या काम हुआ है?</p>
<p><br />बीएमसी में हमने जिन 21 मुख्य मुद्दों को अपने एजेंडा में शामिल किया था, उनमें से कई मुद्दे पहले ही सुलझा लिए गए हैं, और बाकी मुद्दों पर तेज़ी से काम चल रहा है। पूरी तरह से पारदर्शिता लाने के लिए, हमने यह फ़ैसला किया है कि इस साल से, कक्षा 1 से 8 तक के छात्रों को बांटे जाने वाले सभी 27 शैक्षणिक सामानों की खरीद 'गवर्नमेंट ई-मार्केटप्लेस' के ज़रिए की जाएगी। यह पहले की टेंडर-आधारित व्यवस्था की जगह लेगा, जिसमें अनियमितताओं की गुंजाइश रहती थी। हमने मुंबई के लिए 365-दिन का सफ़ाई अभियान भी शुरू किया है, जिसमें नागरिकों, पार्षदों, अस्पतालों और स्कूलों को शामिल करके इसे सचमुच एक 'जन-आंदोलन' बनाया गया है। साफ़-सुथरी सोसाइटियां अपने काम को बीएमसी पोर्टल पर अपलोड कर सकती हैं और 10 लाख रुपये से लेकर 25 लाख रुपये तक की इनामी राशि जीत सकती हैं। जो पार्षद यह सुनिश्चित करेंगे कि उनके वार्ड कूड़ेदान-मुक्त रहें, उन्हें नागरिक बुनियादी ढांचे को और मज़बूत करने के लिए 1 करोड़ रुपये की अतिरिक्त धनराशि मिलेगी। गाद निकालने जैसे महत्वपूर्ण कार्यों में जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए, हमने 'इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ़ टेक्नोलॉजी - बॉम्बे' द्वारा 'थर्ड-पार्टी ऑडिट' अनिवार्य कर दिया है। हमारा लक्ष्य स्पष्ट है—पारदर्शिता, जन-भागीदारी और ज़मीनी स्तर पर दिखाई देने वाले परिणाम।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Mumbai</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 21 Mar 2026 12:33:27 +0530</pubDate>
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