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                <title>lakh - Rokthok Lekhani News </title>
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                            <item>
                <title>मुंबई : 1 लाख से अधिक टैक्सी ड्राइवरों ने सीखी कामकाजी मराठी, यात्रियों से अब स्थानीय भाषा में करेंगे संवाद</title>
                                    <description><![CDATA[<p>महाराष्ट्र में यात्रियों और टैक्सी चालकों के बीच बेहतर संवाद स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल सामने आई है। राज्य में 1 लाख से अधिक टैक्सी ड्राइवरों ने कामकाजी मराठी का प्रशिक्षण पूरा कर लिया है। इस पहल का उद्देश्य स्थानीय भाषा में संवाद को बढ़ावा देना, यात्रियों की सुविधा बढ़ाना और सेवा की गुणवत्ता में सुधार करना है। प्रशिक्षण पूरा करने के बाद चालक अब मराठी में सामान्य बातचीत, दिशा-निर्देश समझने, यात्रियों की जरूरतों को बेहतर ढंग से जानने और स्थानीय प्रशासन से जुड़े आवश्यक संवाद करने में सक्षम होंगे। </p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/51192/mumbai-more-than-1-lakh-taxi-drivers-have-learned-working"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-08/image_f982a1c81.png" alt=""></a><br /><p><strong>मुंबई : </strong>महाराष्ट्र में यात्रियों और टैक्सी चालकों के बीच बेहतर संवाद स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल सामने आई है। राज्य में 1 लाख से अधिक टैक्सी ड्राइवरों ने कामकाजी मराठी का प्रशिक्षण पूरा कर लिया है। इस पहल का उद्देश्य स्थानीय भाषा में संवाद को बढ़ावा देना, यात्रियों की सुविधा बढ़ाना और सेवा की गुणवत्ता में सुधार करना है। प्रशिक्षण पूरा करने के बाद चालक अब मराठी में सामान्य बातचीत, दिशा-निर्देश समझने, यात्रियों की जरूरतों को बेहतर ढंग से जानने और स्थानीय प्रशासन से जुड़े आवश्यक संवाद करने में सक्षम होंगे। </p>
<p> </p>
<p>क्यों शुरू की गई यह पहल? महाराष्ट्र के प्रमुख शहरों, विशेषकर मुंबई, पुणे, ठाणे और नवी मुंबई में बड़ी संख्या में विभिन्न राज्यों से आए टैक्सी चालक काम करते हैं। ऐसे में भाषा संबंधी दिक्कतें कई बार यात्रियों और चालकों के बीच संवाद में बाधा बनती थीं। इसी समस्या को दूर करने के लिए कामकाजी मराठी का प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू किया गया, ताकि चालक रोजमर्रा के संवाद में मराठी का प्रभावी उपयोग कर सकें।</p>
<p><strong>प्रशिक्षण में क्या सिखाया गया?</strong><br />कार्यक्रम के तहत टैक्सी चालकों को मराठी भाषा की बुनियादी समझ और रोजमर्रा के उपयोग से जुड़े विषय सिखाए गए, जिनमें— यात्रियों का स्वागत करना। गंतव्य और मार्ग से जुड़ी बातचीत। किराया और भुगतान संबंधी संवाद। आपातकालीन परिस्थितियों में आवश्यक बातचीत। स्थानीय प्रशासन और यातायात से जुड़े सामान्य शब्द। यात्रियों को क्या होगा फायदा? इस पहल से यात्रियों को कई लाभ मिलने की उम्मीद है— स्थानीय भाषा में बेहतर संवाद। यात्रा के दौरान कम भ्रम।</p>
<p><strong>सेवा की गुणवत्ता में सुधार</strong><br /> पर्यटकों और स्थानीय नागरिकों के लिए अधिक सुविधाजनक अनुभव। भाषा और रोजगार का संतुलन विशेषज्ञों का मानना है कि स्थानीय भाषा का ज्ञान सेवा क्षेत्र में कार्यरत लोगों के लिए अतिरिक्त कौशल के रूप में काम करता है। इससे न केवल ग्राहकों का अनुभव बेहतर होता है, बल्कि चालकों के लिए भी रोजगार के अवसर मजबूत हो सकते हैं। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Maharashtra</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 07 Aug 2026 13:56:21 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Online Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>मुंबई : आवास की आस लगाए बैठे हैं करीब डेढ़ लाख मिल कामगार </title>
                                    <description><![CDATA[<p>मुंबई की पहचान रहीं कपड़ा मिलों के बंद होने के बाद उजड़े हजारों परिवार आज भी अपने आशियाने का इंतजार कर रहे हैं। वर्षों पहले मिल कामगारों और उनके वारिसों को घर देने का वादा करने वाली सरकार अब तक अधिकांश पात्र परिवारों को छत उपलब्ध नहीं करा सकी है। हालत यह है कि करीब डेढ़ लाख मिल कामगार आज भी आवास की आस लगाए बैठे हैं, जबकि सरकार ने अब समाधान के नाम पर निजी बिल्डरों के दरवाजे खटखटाने शुरू कर दिए हैं।</p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/50975/nearly-15-lakh-mill-workers-are-waiting-for-housing-in"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-07/images---2026-07-27t130151.421.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>मुंबई :</strong> मुंबई की पहचान रहीं कपड़ा मिलों के बंद होने के बाद उजड़े हजारों परिवार आज भी अपने आशियाने का इंतजार कर रहे हैं। वर्षों पहले मिल कामगारों और उनके वारिसों को घर देने का वादा करने वाली सरकार अब तक अधिकांश पात्र परिवारों को छत उपलब्ध नहीं करा सकी है। हालत यह है कि करीब डेढ़ लाख मिल कामगार आज भी आवास की आस लगाए बैठे हैं, जबकि सरकार ने अब समाधान के नाम पर निजी बिल्डरों के दरवाजे खटखटाने शुरू कर दिए हैं।<br />म्हाडा के मुंबई मंडल ने बोरीवली, ठाणे, मीरा-भायंदर और उलवे में निजी डेवलपर्स की आवासीय परियोजनाओं से घर खरीदने के लिए रुचि निविदाएं (ईओआई) आमंत्रित की हैं। यह कदम सरकार की उस विफलता की ओर इशारा करता है कि इतने वर्षों में वह मिल कामगारों के लिए स्वयं पर्याप्त आवासीय परियोजनाएं विकसित नहीं कर सकी।</p>
<p> </p>
<p>मिल कामगारों के पुनर्वास के लिए तीन चरणों में करीब पौने दो लाख आवेदन प्राप्त हुए थे, लेकिन अब तक लॉटरी के जरिए केवल १६–१७ हजार परिवारों को ही घर मिल पाए हैं। कुछ हजार और परिवारों को घर मिलने की संभावना है, मगर इसके बाद भी लगभग डेढ़ लाख पात्र परिवार अब भी अपने अधिकार की छत से वंचित हैं।</p>
<p>सरकार ने पहले शेलू और वांगणी जैसे दूरस्थ इलाकों में आवास उपलब्ध कराने की कोशिश की, लेकिन रोजगार, परिवहन और बुनियादी सुविधाओं के अभाव के कारण बड़ी संख्या में कामगारों ने उन घरों को स्वीकार करने से इनकार कर दिया। मिल कामगार संगठनों का कहना है कि जिन लोगों ने मुंबई के विकास में अपना जीवन खपा दिया, उन्हें शहर से दूर भेजना उनके साथ अन्याय है। उनकी मांग है कि पुनर्वास मुंबई या उसके आसपास ही किया जाए। अब निजी बिल्डरों से घर लेने की प्रक्रिया शुरू की गई है। निविदा की शर्तों के अनुसार परियोजनाएं कम से कम एक एकड़ क्षेत्र में विकसित हों, सभी सरकारी मंजूरियां प्राप्त हों, रेलवे स्टेशन के निकट हों तथा सड़क, पानी और अन्य नागरिक सुविधाओं से लैस हों।</p>
<p><strong>मुंबई में घर चाहिए, दूर नहीं</strong><br />शेलू और वांगणी जैसे दूरस्थ क्षेत्रों के घर बड़ी संख्या में कामगारों ने ठुकरा दिए। उनका कहना है कि रोज़गार, परिवहन और बुनियादी सुविधाओं से दूर पुनर्वास स्वीकार्य नहीं है। संगठनों की मांग है कि मिल कामगारों को मुंबई या उसके आसपास ही स्थायी आवास उपलब्ध कराया जाए।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Maharashtra</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 27 Jul 2026 13:02:53 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Online Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>मुंबई : महाराष्ट्र के डिप्टी स्पीकर सचिन अहीर के घर 2.65 की चोरी, मुंबई के खार वाले फ्लैट से गोल्ड और डायमंड गायब</title>
                                    <description><![CDATA[<p>महाराष्ट्र के विधानपरिषद के उपसभापति सचिन अहीर के घर से 5 साल में 2.65 करोड़ रुपये के कीमती सामान की चोरी होने का मामला सामने आया है। पुलिस ने शिकायत के आधार पर एक आरोपी गिरफ्तार किया गया है जबकि तीन फरार आरोपियों की तलाश जारी है। पुलिस के अनुसार, शिवसेना शिंदे गुट के एमएलसी और महाराष्ट्र के विधानपरिषद के उपसभापति सचिन अहीर के घर से पिछले 5 साल में 2.7 करोड़ रुपये के कीमती सामान की चोरी हुई है। चोरी गए सामान में 100 ग्राम का सोने का बिस्किट, हीरे जड़े सोने के कंगन, हीरे जड़ी सोने की अंगूठी, पांच हीरे के हार, हीरे की अंगूठियां, चांदी के गिलास, चांदी की थालियां और लोटे शामिल हैं। साथ ही नकद पैसे भी चोरी हुए हैं।</p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/50943/mumbai-265-rupees-stolen-from-maharashtra-deputy-speaker-sachin-ahirs"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-07/dfsdfadg.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>मुंबई : </strong>महाराष्ट्र के विधानपरिषद के उपसभापति सचिन अहीर के घर से 5 साल में 2.65 करोड़ रुपये के कीमती सामान की चोरी होने का मामला सामने आया है। पुलिस ने शिकायत के आधार पर एक आरोपी गिरफ्तार किया गया है जबकि तीन फरार आरोपियों की तलाश जारी है। पुलिस के अनुसार, शिवसेना शिंदे गुट के एमएलसी और महाराष्ट्र के विधानपरिषद के उपसभापति सचिन अहीर के घर से पिछले 5 साल में 2.7 करोड़ रुपये के कीमती सामान की चोरी हुई है। चोरी गए सामान में 100 ग्राम का सोने का बिस्किट, हीरे जड़े सोने के कंगन, हीरे जड़ी सोने की अंगूठी, पांच हीरे के हार, हीरे की अंगूठियां, चांदी के गिलास, चांदी की थालियां और लोटे शामिल हैं। साथ ही नकद पैसे भी चोरी हुए हैं।</p>
<p> </p>
<p>13 अक्टूबर 2025 को कथित शॉर्ट सर्किट से लगी आग में घर क्षतिग्रस्त हो गया था, इसके बाद परिवार ने शुरू में यह माना कि घरेलू खर्च के लिए निकाले गए नकदी भी आग में जलकर नष्ट हो गए थे। बाद में जब सीसीटीवी फुटेज की जांच की गई तो पता चला कि रिकॉर्डिंग के कुछ हिस्से गायब थे, जिससे संदेह और बढ़ गया। घर में चार घरेलू नौकरों ने पिछले पांच सालों में व्यवस्थित तरीके से लगभग 2.65 करोड़ रुपये की नकदी, सोने के गहने और अन्य कीमती सामान चोरी किया है।</p>
<p><strong>घर का नौकर प्रवीण रमेश सोलंकी अरेस्ट</strong><br />वर्ली पुलिस ने अज्ञात आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। मुंबई क्राइम ब्रांच ने चोरी मामले में प्रवीण रमेश सोलंकी को गिरफ्तार किया। कोर्ट ने आरोपी को 28 जुलाई तक क्राइम ब्रांच की कस्टडी में भेज दिया है। वहीं, पुलिस ने इस चौंकाने वाले मामले में घर के नौकर प्रवीण रमेश सोलंकी को गिरफ्तार किया है।</p>
<p><strong>24 सालों से सचिन अहीर के घर पर नौकर है प्रवीण</strong><br />वह पिछले 24 सालों से अहीर के घर पर काम कर रहा है। पुलिस के मुताबिक, सोलंकी ने चोरी का सामान बेचने और उससे मिली रकम को अपने साथियों में बांटने की बात कबूल कर ली है। सचिन अहीर ने मुंबई क्राइम ब्रांच में शिकायत दर्ज कराई थी। क्राइम ब्रांच के डीसीपी राजतिलक रोशन की देखरेख में जांच चल रही है। पुलिस इस मामले में फरार तीन आरोपियों की तलाश कर रही है।</p>
<p>कृष्णा ने बताया कि हालांकि वे फिल्म इंडस्ट्री में काम के सिलसिले में पिछले दो सालों से अपने परिवार के साथ वर्ली सी फेस पर स्थित गुलरुख बिल्डिंग खार के एक फ्लैट में रह रहे हैं। हालांकि वे अक्सर वर्ली सीफेस पर स्थित गुलरुख बिल्डिंग में अपने परिवार के घर आते-जाते रहते थे, जहां उनके माता-पिता और बहन रहते हैं। इस घटना से राजनीतिक हलकों में हलचल मच गई है क्योंकि महाराष्ट्र के एक वरिष्ठ नेता के घर पर चोरी की यह घटना हुई है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Mumbai</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 25 Jul 2026 13:04:10 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Online Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>मुंबई:  म्यांमार में बंधक भारतीय युवक, मां ने गहने बेचकर दी 8 लाख फिरौती</title>
                                    <description><![CDATA[<p>विदेश में अच्छी नौकरी का सपना दिखाकर युवाओं को ठगने और मानव तस्करी के जाल में फंसाने वाले अंतरराष्ट्रीय गिरोह का एक और मामला सामने आया है। मुंबई के तलोजा निवासी 23 वर्षीय साहिल तिवारी कथित तौर पर म्यांमार में ‘साइबर गुलामी’ का शिकार हो गए हैं। परिवार का आरोप है कि उन्हें बैंकॉक में नौकरी दिलाने का झांसा देकर पहले विदेश बुलाया गया और बाद में म्यांमार ले जाकर बंधक बना लिया गया। बेटे की रिहाई के लिए परिवार ने करीब 8 लाख रुपये की फिरौती भी दी, लेकिन इसके बावजूद साहिल की वापसी नहीं हो सकी है।</p>
<p> </p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/50840/mumbai-mother-of-indian-youth-held-hostage-in-myanmar-sells"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-07/images---2026-07-20t123813.022.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>मुंबई: </strong> विदेश में अच्छी नौकरी का सपना दिखाकर युवाओं को ठगने और मानव तस्करी के जाल में फंसाने वाले अंतरराष्ट्रीय गिरोह का एक और मामला सामने आया है। मुंबई के तलोजा निवासी 23 वर्षीय साहिल तिवारी कथित तौर पर म्यांमार में ‘साइबर गुलामी’ का शिकार हो गए हैं। परिवार का आरोप है कि उन्हें बैंकॉक में नौकरी दिलाने का झांसा देकर पहले विदेश बुलाया गया और बाद में म्यांमार ले जाकर बंधक बना लिया गया। बेटे की रिहाई के लिए परिवार ने करीब 8 लाख रुपये की फिरौती भी दी, लेकिन इसके बावजूद साहिल की वापसी नहीं हो सकी है।</p>
<p> </p>
<p>साहिल तिवारी के परिवार के मुताबिक, उन्हें विदेश में बेहतर नौकरी और अच्छे भविष्य का सपना दिखाया गया था। नौकरी की तलाश में साहिल इस प्रस्ताव पर भरोसा कर विदेश गए, लेकिन वहां पहुंचने के बाद हालात पूरी तरह बदल गए। परिवार का आरोप है कि उन्हें म्यांमार में एक ऐसे गिरोह के हाथों सौंप दिया गया, जो लोगों को जबरन ऑनलाइन ठगी और साइबर अपराधों में शामिल कराता है। परिवार ने बताया कि साहिल को म्यांमार में कथित तौर पर साइबर गुलामी करने के लिए मजबूर किया गया। वहां मौजूद लोगों ने उनकी रिहाई के बदले पैसों की मांग की। बेटे को वापस लाने की उम्मीद में परिवार ने किसी तरह रकम जुटाई और करीब 8 लाख रुपये का भुगतान किया। इस रकम को जुटाने के लिए साहिल की कैंसर पीड़ित मां को अपने मंगलसूत्र और अन्य गहने तक बेचने पड़े।<br />परिवार के लिए सबसे दर्दनाक स्थिति यह है कि इतनी बड़ी रकम देने के बाद भी साहिल की कोई पुख्ता जानकारी नहीं मिल पाई है। मां की बीमारी और परिवार की आर्थिक स्थिति के बावजूद उन्होंने बेटे की जिंदगी बचाने के लिए अपने सबसे कीमती सामान तक बेच दिए, लेकिन अभी तक बेटे की सुरक्षित वापसी नहीं हो सकी है। साहिल के परिवार ने अब केंद्र सरकार, विदेश मंत्रालय और मुंबई पुलिस से मदद की गुहार लगाई है। परिवार का कहना है कि इस मामले को केवल विदेश में नौकरी से जुड़े विवाद के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए, बल्कि इसे मानव तस्करी के गंभीर मामले के तौर पर जांच की जानी चाहिए।</p>
<p>विशेषज्ञों के अनुसार, दक्षिण-पूर्व एशिया के कई देशों में साइबर अपराध से जुड़े गिरोह युवाओं को फर्जी नौकरी के ऑफर देकर अपने जाल में फंसा रहे हैं। इन युवाओं को पहले थाईलैंड, म्यांमार, कंबोडिया जैसे देशों में भेजा जाता है और बाद में उन्हें जबरन ऑनलाइन धोखाधड़ी जैसे कामों में लगाया जाता है। कई मामलों में पीड़ितों को बंधक बनाकर उनके परिवारों से फिरौती की मांग की जाती है। परिवार का कहना है कि साहिल के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ है। उन्हें बैंकॉक में नौकरी का भरोसा दिया गया था, लेकिन बाद में उन्हें म्यांमार भेज दिया गया। वहां से उन्हें बाहर निकलने का मौका नहीं दिया गया और लगातार दबाव बनाया गया।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Mumbai</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 20 Jul 2026 12:38:32 +0530</pubDate>
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