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                <title>making - Rokthok Lekhani News </title>
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                            <item>
                <title>मुंबई : फुटपाथों को अतिक्रमणमुक्त कर पैदल यात्रियों के लिए रास्ता साफ करने की मनपा की मुहिम</title>
                                    <description><![CDATA[<p>मुंबई के फुटपाथों को अतिक्रमणमुक्त कर पैदल यात्रियों के लिए रास्ता साफ करने की मनपा की मुहिम अब गरीब फेरीवालों की रोजी-रोटी पर भारी पड़ती दिखाई दे रही है। फुटपाथों को पैदल यात्रियों के लिए सुरक्षित बनाने के उद्देश्य से शुरू किए गए अभियान का समर्थन विभिन्न दलों के पार्षदों ने किया है, लेकिन कार्रवाई के तरीके पर उन्होंने गंभीर सवाल खड़े किए हैं। आरोप है कि वार्ड स्तर पर अभियान का अमल मनमाना है और नियमों की मार सीधे छोटे फेरीवालों पर पड़ रही है।</p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/51390/mumbai-municipal-corporations-campaign-to-free-the-footpaths-from-encroachment"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-08/images---2026-08-16t120712.109.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>मुंबई :</strong> मुंबई के फुटपाथों को अतिक्रमणमुक्त कर पैदल यात्रियों के लिए रास्ता साफ करने की मनपा की मुहिम अब गरीब फेरीवालों की रोजी-रोटी पर भारी पड़ती दिखाई दे रही है। फुटपाथों को पैदल यात्रियों के लिए सुरक्षित बनाने के उद्देश्य से शुरू किए गए अभियान का समर्थन विभिन्न दलों के पार्षदों ने किया है, लेकिन कार्रवाई के तरीके पर उन्होंने गंभीर सवाल खड़े किए हैं। आरोप है कि वार्ड स्तर पर अभियान का अमल मनमाना है और नियमों की मार सीधे छोटे फेरीवालों पर पड़ रही है।</p>
<p> </p>
<p><strong>क्यूआर आईडी देकर अब कार्रवाई क्यों?</strong><br />शिवसेना  की नगरसेविका दीपमाला भाड़े ने मनपा की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि पार्षदों की मौजूदगी में फेरीवालों को क्यूआर-कोड वाले पहचान पत्र जारी किए गए थे। अब उन्हीं फेरीवालों के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है। यदि पहचान पत्र जारी करने के बाद भी फेरीवालों को सुरक्षा नहीं मिलती, तो फिर ऐसे कार्ड बांटने का उद्देश्य क्या था? मनपा की नीति को लेकर फेरीवालों में असमंजस पैदा हो गया है। भाजपा नगरसेवक शीतल गंभीर ने कहा कि तय सीमा से अधिक जगह घेरने वाले फेरीवालों को पहले अतिक्रमण कम करने की चेतावनी दी जानी चाहिए। बार-बार जुर्माना गरीबों पर भारी पड़ रहा है। कई फेरीवाले जुर्माना भरने के लिए उधार मांगने लौट रहे हैं। कार्रवाई से उनकी रोजी-रोटी प्रभावित हो रही है।<br />‘पेडेस्ट्रियन फर्स्ट’, लेकिन व्यवस्था कितनी तैयार?<br />भाजपा नगरसेवक प्रीति सातम ने जेसीबी मशीनों की कमी पर सवाल उठाते हुए कहा कि देशव्यापी जेसीबी अनुबंध ९ अगस्त को समाप्त हो गया। पी साउथ वार्ड में केवल एक जेसीबी से कार्रवाई वैâसे होगी? वहीं मकरंद नार्वेकर ने कहा कि फुटपाथ मुक्त अभियान को लेकर वरिष्ठ स्तर पर इच्छाशक्ति है, लेकिन निचले स्तर पर तत्परता नहीं।<br />वर्षों से कारोबार करने वालों पर भी कार्रवाई<br />कांग्रेस नगरसेवक ट्यूलिप मिरांडा ने कहा कि वर्षों से मुंबई में कारोबार कर रहे फेरीवालों को परेशान किया जा रहा है। उन्होंने क्यूआर-कोड वाली आईडी की उपयोगिता पर सवाल उठाते हुए कहा कि यदि इन पहचान पत्रों से फेरीवालों को कोई सुरक्षा नहीं मिल रही है तो इन्हें जारी करने का मतलब ही क्या है? उनके मुताबिक, नियम और प्रावधान तो बनाए गए हैं, लेकिन उनका पालन शून्य है।<br />मनपा की सफाई<br />बीएमसी ने चुनिंदा कार्रवाई के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि स्कूल, अस्पताल और मेट्रो स्टेशनों के आसपास फुटपाथ खाली कराने के निर्देश हैं। अनधिकृत फेरीवालों पर समान कार्रवाई और निगरानी के लिए डैशबोर्ड बनाया गया है। हालांकि, पहचान पत्र जारी करने के बावजूद फेरीवालों पर कार्रवाई से अभियान की पारदर्शिता, संवेदनशीलता और निष्पक्षता पर सवाल उठ रहे हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Mumbai</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 16 Aug 2026 12:08:12 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Online Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>मुंबई: ओला-उबर जैसे एग्रीगेटर ड्राइवरों के लिए 5 दिन की ट्रेनिंग अनिवार्य, सरकार ने तय किए नए नियम</title>
                                    <description><![CDATA[<p>राज्य सरकार ने कैब एग्रीगेटर (जैसे ओला, उबर आदि) से जुड़े ड्राइवरों के लिए पांच दिन (30 घंटे) का इंडक्शन ट्रेनिंग प्रोग्राम अनिवार्य कर दिया है। यह ट्रेनिंग ऑफलाइन और ऑनलाइन दोनों माध्यमों से करनी होगी। एग्रीगेटर को इस ट्रेनिंग का पूरा विवरण ऑनलाइन उपलब्ध कराना होगा और उसकी जानकारी तय पोर्टल पर भी अपलोड करनी होगी। </p>
<p> </p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/50965/mumbai-5-days-training-mandatory-for-aggregator-drivers-like-ola-uber"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-07/uber-ola-rapida-rides-cost-2x-during-peak-hours-with-new-govt-guidelines.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>मुंबई: </strong>राज्य सरकार ने कैब एग्रीगेटर (जैसे ओला, उबर आदि) से जुड़े ड्राइवरों के लिए पांच दिन (30 घंटे) का इंडक्शन ट्रेनिंग प्रोग्राम अनिवार्य कर दिया है। यह ट्रेनिंग ऑफलाइन और ऑनलाइन दोनों माध्यमों से करनी होगी। एग्रीगेटर को इस ट्रेनिंग का पूरा विवरण ऑनलाइन उपलब्ध कराना होगा और उसकी जानकारी तय पोर्टल पर भी अपलोड करनी होगी। </p>
<p> </p>
<p><strong>यह सब होगा ट्रेनिंग में शामिल</strong><br />इस ट्रेनिंग में ड्राइवरों को एग्रीगेटर के मोबाइल ऐप का इस्तेमाल, संबंधित कानूनों और नियमों, मोटर व्हीकल (ड्राइविंग) रेगुलेशन-2017, सावधानीपूर्वक वाहन चलाने, ट्रैफिक नियमों, वाहन रखरखाव, ईंधन की बचत करने वाली ड्राइविंग, यात्रियों के साथ व्यवहार और विभिन्न चीजों की जानकारी दी जाएगी। </p>
<p><strong>फर्स्ट रिस्पांडर की भी दी जाएगी ट्रेनिंग</strong><br />इसके अलावा, ड्राइवरों को कम से कम छह घंटे की फर्स्ट रिस्पांडर ट्रेनिंग भी दी जाएगी, ताकि सड़क दुर्घटना होने पर वे तुरंत मदद कर सकें। प्रशिक्षण में महिला सुरक्षा, दिव्यांगजनों की जरूरतों और उनकी सुरक्षित आवाजाही के प्रति संवेदनशीलता पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा। इसी के साथ-साथ राज्य सरकार समय-समय पर अन्य जरूरी ट्रेनिंग भी निर्धारित करेगी। </p>
<p><strong>लाइसेंस मिलने के छह महीने में सर्विस नहीं शुरू होने पर लाइसेंस होगा रद्द</strong><br />सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि लाइसेंस मिलने के छह महीने के भीतर एग्रीगेटर को अपना कारोबार शुरू करना होगा। ऐसा नहीं करने पर लाइसेंस स्वतः रद्द माना जाएगा। हालांकि, जमा की गई सुरक्षा राशि वापस कर दी जाएगी, लेकिन लाइसेंस शुल्क वापस नहीं मिलेगा। इसके अलावा, सभी एग्रीगेटर को स्वास्थ्य मंत्रालय, विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करना होगा। </p>
<p><strong>कॉन्ट्रैक्ट की शर्तों की भी ट्रेनिंग देना जरूरी</strong><br />नियमों के अनुसार, एग्रीगेटर को ड्राइवर और कंपनी के बीच हुए कॉन्ट्रैक्ट की शर्तों की भी जानकारी ट्रेनिंग के दौरान देनी होगी। इसके लिए एग्रीगेटर को परिवहन आयुक्त के आदेश के एक वर्ष के भीतर सभी पुराने ड्राइवरों को मान्यता प्राप्त संस्थानों, जैसे आईडीटीआर , आरडीटीसी और एडीटीसी में प्रशिक्षण दिलाने की योजना प्रस्तुत करनी होगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Mumbai</category>
                                    

                <link>https://www.rokthoklekhani.com/article/50965/mumbai-5-days-training-mandatory-for-aggregator-drivers-like-ola-uber</link>
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                <pubDate>Mon, 27 Jul 2026 12:16:55 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Online Desk]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>मुंबई : संजय निरुपम की परिवहन मंत्री को चिट्ठी, मराठी अनिवार्यता पर करें विचार</title>
                                    <description><![CDATA[<p>शिवसेना नेता संजय निरुपम ने महाराष्ट्र सरकार के ‘रिक्शा व टैक्सी चालकों के लिए मराठी भाषा अनिवार्य’ करने के फैसले पर पुनर्विचार की मांग की है। उन्होंने राज्य के परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक को पत्र लिखकर इस निर्णय को वापस लेने की अपील की है। संजय निरुपम ने अपने पत्र में कहा कि 1 मई से लागू होने वाला यह फैसला हजारों मेहनतकश रिक्शा चालकों के बीच भय, भ्रम और असुरक्षा की भावना पैदा कर रहा है।</p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/49445/mumbai-sanjay-nirupams-letter-to-transport-minister-consider-marathi-essentiality"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-04/download---2026-04-24t103514.294.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>मुंबई :</strong> शिवसेना नेता संजय निरुपम ने महाराष्ट्र सरकार के ‘रिक्शा व टैक्सी चालकों के लिए मराठी भाषा अनिवार्य’ करने के फैसले पर पुनर्विचार की मांग की है। उन्होंने राज्य के परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक को पत्र लिखकर इस निर्णय को वापस लेने की अपील की है। संजय निरुपम ने अपने पत्र में कहा कि 1 मई से लागू होने वाला यह फैसला हजारों मेहनतकश रिक्शा चालकों के बीच भय, भ्रम और असुरक्षा की भावना पैदा कर रहा है। उन्होंने कहा कि मराठी भाषा का सम्मान सभी के दिलों में है, लेकिन इसे अनिवार्य करना और इसके लिए परीक्षा लागू करना चालकों के जीवन और रोजगार पर नकारात्मक असर डाल सकता है।</p>
<p> </p>
<p>निरुपम ने मुंबई की बहुसांस्कृतिक पहचान का जिक्र करते हुए लिखा कि शहर में करीब 70 प्रतिशत से अधिक रिक्शा और टैक्सी चालक गुजरात, उत्तर भारत, पंजाब और दक्षिण भारत के विभिन्न हिस्सों से आते हैं। उन्होंने अपनी मेहनत से यहां अपनी जगह बनाई है और अपने परिवार का भरण-पोषण कर रहे हैं। ऐसे में यह फैसला उनके रोजगार पर संकट खड़ा कर सकता है और शहर की यातायात व्यवस्था को भी प्रभावित कर सकता है। उन्होंने कहा कि उन्हें कई चालकों के फोन आ रहे हैं, जिनमें वे अपनी परेशानियां और भविष्य को लेकर चिंता जाहिर कर रहे हैं। निरुपम के मुताबिक, चालकों के मन में बढ़ती असुरक्षा बेहद चिंताजनक है। उन्होंने पत्र में सरकार से आग्रह किया कि मराठी भाषा के सम्मान को बनाए रखते हुए, टूटी-फूटी या कामचलाऊ मराठी बोलने और समझने वाले चालकों को छूट दी जाए। साथ ही भाषा को अनिवार्य बनाने और परीक्षा लागू करने के फैसले पर पुनर्विचार कर इसे वापस लिया जाए। निरुपम ने कहा कि प्रेम से सिखाई गई भाषा दिल में बसती है, जबकि जबरन थोपी गई भाषा भय पैदा करती है। उन्होंने उम्मीद जताई कि सरकार इस मुद्दे पर संवेदनशीलता और दूरदर्शिता के साथ निर्णय लेगी।</p>
<p>वहीं, महाराष्ट्र के परिवहन मंत्री का कहना है कि परिवहन विभाग पर ‘मराठी राजभाषा अधिनियम’ लागू होता है और नागरिकों के साथ संवाद करते समय चालकों के पास मराठी का कम से कम ‘कार्यसाधक ज्ञान’ होना आवश्यक है। कानून के प्रावधानों के आधार पर, नियमों में संशोधन किए जाएंगे और लाइसेंस, बैज तथा परमिट जारी करते या उनका नवीनीकरण करते समय मराठी ज्ञान की शर्त लागू की जाएगी। साथ ही, चालकों पर कोई अतिरिक्त बोझ डाले बिना उन वाक्यों और वाक्यांशों को सिखाने पर जोर दिया जाएगा जो उनके दैनिक कामकाज में उपयोगी होंगे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Mumbai</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 24 Apr 2026 12:34:54 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Online Desk]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>वसई-विरार में बांग्लादेशियों का नकली राशन कार्ड बनाने का हुआ खुलासा, एक युवक गिरफ्तार</title>
                                    <description><![CDATA[<p>अवैध बांग्लादेशियों के खिलाफ कार्रवाई के बीच मुंबई की डिंडोशी पुलिस को एक बड़ी कामयाबी हाथ लगी है. पुलिस ने वसई-विरार इलाके में छापेमारी कर बांग्लादेशियों के लिए नकली राशन कार्ड बनाने वाले एक युवक को गिरफ्तार किया है. पुलिस ने आरोपी के घर से बड़ी संख्या में फर्जी दस्तावेज बरामद किए हैं.</p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/47601/a-young-man-arrested-for-making-fake-ration-cards-of"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-02/download---2026-02-09t121636.712.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>वसई : </strong>अवैध बांग्लादेशियों के खिलाफ कार्रवाई के बीच मुंबई की डिंडोशी पुलिस को एक बड़ी कामयाबी हाथ लगी है. पुलिस ने वसई-विरार इलाके में छापेमारी कर बांग्लादेशियों के लिए नकली राशन कार्ड बनाने वाले एक युवक को गिरफ्तार किया है. पुलिस ने आरोपी के घर से बड़ी संख्या में फर्जी दस्तावेज बरामद किए हैं.  डिंडोशी पुलिस ने गुप्त सूचना के आधार पर वसई-विरार इलाके में रहने वाले 21 वर्षीय युवक के घर पर छापा मारा. तलाशी के दौरान पुलिस को वहां से 350 नकली राशन कार्ड मिले. ये सभी कार्ड देखने में असली जैसे थे, जिनका इस्तेमाल पहचान और सरकारी सुविधाओं के लिए किया जा सकता था. </p>
<p> </p>
<p><strong>आरोपी की पहचान, पिता करता था यही काम</strong><br />गिरफ्तार आरोपी की पहचान सुजल दयाल (21) के रूप में हुई है. पूछताछ में सुजल ने पुलिस को बताया कि उसके पिता पहले नकली राशन कार्ड बनाने का काम करते थे. पिता की मौत के बाद उसने यही धंधा संभाल लिया और धीरे-धीरे इसे आगे बढ़ाता गया. </p>
<p><strong>मुंबई के कई इलाकों के पते मिले</strong><br />पुलिस के मुताबिक, जब्त किए गए राशन कार्डों पर वसई, विरार, मीरा-भायंदर, नालासोपारा, दहिसर, बोरीवली, मलाड और कांदिवली जैसे इलाकों के पते दर्ज हैं. इससे अंदाजा लगाया जा रहा है कि यह नेटवर्क काफी बड़ा हो सकता है और कई जगहों तक फैला हुआ है. पुलिस ने आरोपी के घर से एक प्रिंटर, लैपटॉप और अन्य इलेक्ट्रॉनिक सामान भी जब्त किया है. अब पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि सुजल को ये नकली राशन कार्ड बनाने का ऑर्डर कौन देता था, उसने अब तक कितने कार्ड बनाए और इसमें उसके साथ कौन-कौन लोग शामिल थे. </p>
<p><strong>विदेशी घुसपैठियों से कनेक्शन का शक</strong><br />पुलिस को शक है कि बड़ी संख्या में विदेशी घुसपैठियों ने पहचान के लिए सुजल से नकली राशन कार्ड बनवाए हैं. मुंबई पुलिस पूरे मामले की गहराई से जांच कर रही है और आने वाले दिनों में और गिरफ्तारियां हो सकती हैं.</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Mumbai</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 09 Feb 2026 12:17:27 +0530</pubDate>
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