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                <title>that - Rokthok Lekhani News </title>
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                <title>महाराष्ट्र सरकार ने स्वास्थ्य विभाग में ग्रेड के आधार पर तय होगी अधिकारियों की जिम्मेदारी</title>
                                    <description><![CDATA[<p>महाराष्ट्र सरकार ने स्वास्थ्य अधिकारियों की जवाबदेही तय करने के लिए बड़ा फैसला लिया है। अब उनके काम की पहचान, मेरिट के आधार पर की जाएगी। उनके काम का हर साल लेखा-जोखा किया जाएगा और उसी आधार पर उनके साल के काम का ग्रेड तय करके उनकी प्राथमिकता के साथ जिम्मेदारी तय की जाएगी। यह फैसला स्वास्थ्य विभाग ने लिया है। स्वास्थ्य मंत्री प्रकाश आबिटकर के अनुसार परफॉर्मेंस-बेस्ड एडमिनिस्ट्रेटिव वर्क कल्चर बनाने के लिए यह अहम फैसला लिया गया है।</p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/51725/maharashtra-government-will-decide-the-responsibility-of-officers-in-the"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-09/images---2026-09-07t130537.079.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>मुंबई: </strong>महाराष्ट्र सरकार ने स्वास्थ्य अधिकारियों की जवाबदेही तय करने के लिए बड़ा फैसला लिया है। अब उनके काम की पहचान, मेरिट के आधार पर की जाएगी। उनके काम का हर साल लेखा-जोखा किया जाएगा और उसी आधार पर उनके साल के काम का ग्रेड तय करके उनकी प्राथमिकता के साथ जिम्मेदारी तय की जाएगी। यह फैसला स्वास्थ्य विभाग ने लिया है। स्वास्थ्य मंत्री प्रकाश आबिटकर के अनुसार परफॉर्मेंस-बेस्ड एडमिनिस्ट्रेटिव वर्क कल्चर बनाने के लिए यह अहम फैसला लिया गया है।</p>
<p> </p>
<p>जिला सर्जन और जिला हेल्थ ऑफिसर कैडर के अधिकारियों का हर साल ऑब्जेक्टिव इवैल्यूएशन किया जाएगा। उनके ग्रेड पिछले तीन वर्षों की परफॉर्मेंस के आधार पर तय किए जाएंगे। इस ग्रेड का इस्तेमाल जिम्मेदारियां बांटने, अगले तीन वर्षों के लिए काम की योजना बनाने और भविष्य की नियुक्तियों के लिए किया जाएगा। इस निर्णय से सार्वजनिक स्वास्थ्य विभाग में वरिष्ठता के साथ-साथ असल परफॉर्मेंस, नेतृत्व कौशल, मरीजों की देखभाल, वित्तीय अनुशासन, मानव संशाधन प्रबंधन और योजनाओं को असरदार तरीके से लागू करने को अहमियत मिलेगी। बेहतरीन काम करने वाले अधिकारियों को उनकी काबिलियत के हिसाब से आगे मौके देने का सिस्टम बनाया जाएगा। इससे अधिकारियों का हौसला बढ़ाने में भी मदद मिलेगी।</p>
<p>स्वास्थ्य मंत्री ने बताया कि 31 मार्च 2026 को कम से कम तीन साल की सेवा पूरी करने वाले संबंधित अधिकारियों के काम की जानकारी अपडेट की जाएगी और उनकी रेटिंग की जाएगी। तीन साल 2023-24, 2024-25 और 2025-26 के दौरान पोस्ट पर किए गए काम को देखते हुए कुल 100 अंक का मूल्यांकन किया जाएगा। इस रेटिंग के हिसाब से अधिकारियों को चार कैटेगरी ए बी सी और  डी में बांटा जाएगा। यह प्रक्रिया हर साल लागू की जाएगी।</p>
<p>अधिकारियों की रेटिंग करते समय, सिर्फ पेपर वर्क को ही नहीं, बल्कि जिले के हेल्थ सिस्टम पर सीधे असर डालने वाले कई पहलुओं को शामिल किया गया है। लोगों से जुड़ाव, शिकायत निवारण, नेतृत्व गुणवत्ता, विशेष कौशल, प्रशिक्षण और कम्युनिकेशन स्किल पर विचार किया जाएगा। जिले की सालाना प्लानिंग, स्टेट अकाउंट्स, नेशनल हेल्थ मिशन और सीएसआर फंड के असरदार इस्तेमाल के लिए किए गए वित्तीय प्रबंधन की भी जांच की जाएगी। स्वास्थ्य सुविधाओं की गुणवत्ता सुधारने के लिए उठाए गए कदम, जैसे खाना, दवाइयां, साफ-सफाई और स्वास्थ्य प्रशिक्षण में ठेके पर रखे गए लोगों का सही इस्तेमाल, भी इवैल्यूएशन का हिस्सा होंगे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Maharashtra</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 07 Sep 2026 13:06:56 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Online Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>नई दिल्ली : अब जीना मुश्किल है, पत्नी की इस बात को सहन नहीं कर सके जज अमन कुमार शर्मा, उठा लिया खौफनाक कदम</title>
                                    <description><![CDATA[<p>दिल्ली के कड़कड़डूमा कोर्ट के जज आलोक कुमार शर्मा आत्महत्या मामले में पत्नी को ही मुख्य आरोपी माना जा रहा है। परिवार ने गंभीर आरोप लगाते हुए दावा किया है कि पत्नी के टॉर्चर की वजह से आलोक शर्मा मानसिक रूप से परेशान चल रहे थे। वहीं, अमन के पिता प्रेम शर्मा के पुलिस को दिए गए कथित बयान का हवाला देते हुए परिवार के एक सदस्य ने बताया कि अमन ने घटना वाली रात करीब 10 बजे अपने पिता को फोन किया और अपनी परेशानी बताई।</p>
<p> </p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/49677/new-delhi-now-it-is-difficult-to-live-judge-aman"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-05/download---2026-05-03t192249.716.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>नई दिल्ली : </strong>दिल्ली के कड़कड़डूमा कोर्ट के जज आलोक कुमार शर्मा आत्महत्या मामले में पत्नी को ही मुख्य आरोपी माना जा रहा है। परिवार ने गंभीर आरोप लगाते हुए दावा किया है कि पत्नी के टॉर्चर की वजह से आलोक शर्मा मानसिक रूप से परेशान चल रहे थे। वहीं, अमन के पिता प्रेम शर्मा के पुलिस को दिए गए कथित बयान का हवाला देते हुए परिवार के एक सदस्य ने बताया कि अमन ने घटना वाली रात करीब 10 बजे अपने पिता को फोन किया और अपनी परेशानी बताई।</p>
<p> </p>
<p><strong>अब जीना मुश्किल हो गया है, जज के आखिरी शब्द</strong><br />अमन ने अपने पिता से बात करते हुए कहा कि मैं बहुत परेशान हूं और मेरे लिए जीना मुश्किल हो गया है। मुझे दो महीने से प्रताड़ित किया जा रहा है। अमन के बहनोई के ससुर राजेश के मुताबिक अमन का अपनी पत्नी से विवाद हुआ था, जो स्वयं एक न्यायिक अधिकारी हैं। अमन की पत्नी की बहन (निधि मलिक) एक आईएएस अधिकारी हैं और जम्मू में तैनात हैं। अमन के अनुसार, निधि मलिक उसके जीवन में दखल दे रही थी और उसके घर को कंट्रोल कर रही थी।</p>
<p><strong>पत्नी ने पिता का किया अपमान तो उठाया खौफनाक कदम</strong><br />अमन के पिता ने कहा कि उनकी बहू ने उनसे कहा कि अगर आप यहां से नहीं जाते हैं, तो वह पुलिस को बुला लेगी। अगली सुबह, अमन के पिता ने अपनी बहू के माता-पिता से संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन उन्होंने उनका फोन ब्लॉक कर दिया था। तभी घर में झगड़ा शुरू हो गया। झगड़ा के बाद अमन के पिता दूसरे कमरे में चले गए।</p>
<p><strong>अमन की पत्नी चिल्ला रही थी और अमन रो रहा था</strong><br />अमन के पिता के अनुसार, स्वाति बहुत गुस्से में चिल्ला रही थी, जबकि अमन रो रहा था। थोड़ी देर बाद शोर बंद हो गया। उन्होंने सोचा कि झगड़ा सुलझ गया होगा और कुछ देर इंतजार किया। कुछ देर बाद जब वे उन्हें देखने गए, तो उन्होंने स्वाति से अमन के बारे में पूछा, जिस पर उसने कहा कि उसे नहीं पता।<br />जब उन्होंने अमन के मोबाइल पर कॉल किया, तो उन्हें बाथरूम के अंदर घंटी बजने की आवाज सुनाई दी। उन्होंने बाथरूम के दरवाजे पर दस्तक दी और उसे दरवाजा खोलने के लिए कहा। इसी दौरान युद्धवीर (स्वाति के चाचा) और निधि मलिक आ गए। उन्होंने बहुत कोशिश की, दरवाजे पर फर्नीचर पटका, लेकिन दरवाजा नहीं खुला।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>National</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 03 May 2026 19:23:59 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Online Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>मुंबई : दिल, दिमाग, आंत का रंग हरा, फूड पॉइजनिंग से मौतें नहीं, मुंबई तरबूज केस की मिस्ट्री गहराई, आखिर उस रात क्या हुआ था?</title>
                                    <description><![CDATA[<p>पायधुनी इलाके मुंबई में हाल ही में हुई एक घटना, जिसमें एक ही परिवार के चार सदस्यों की मौत हो गई, ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। क्या सचमुच बिरयानी खाने के बाद खाया गया तरबूज़ ही उनकी मौत का कारण बना, या इसके पीछे कोई और वजह है? शुरुआती अंदाज़ों में तरबूज़ को ही इसका दोषी माना जा रहा था, जिसके चलते वह स्थानीय बाज़ारों से गायब हो गया। हालांकि, नई जानकारियों से पता चलता है कि अब्दुल्ला डोकाडिया के परिवार की मौत का कारण शायद तरबूज़ नहीं, बल्कि ज़हर था। हालांकि एफएसडीए को घर से लिए गए सैंपल्स में कहीं भी जहर नहीं मिली है। </p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/49660/mumbai-heart-brain-intestine-color-green-deaths-not-due-to"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-05/download---2026-05-03t140745.334.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>मुंबई : </strong>पायधुनी इलाके मुंबई में हाल ही में हुई एक घटना, जिसमें एक ही परिवार के चार सदस्यों की मौत हो गई, ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। क्या सचमुच बिरयानी खाने के बाद खाया गया तरबूज़ ही उनकी मौत का कारण बना, या इसके पीछे कोई और वजह है? शुरुआती अंदाज़ों में तरबूज़ को ही इसका दोषी माना जा रहा था, जिसके चलते वह स्थानीय बाज़ारों से गायब हो गया। हालांकि, नई जानकारियों से पता चलता है कि अब्दुल्ला डोकाडिया के परिवार की मौत का कारण शायद तरबूज़ नहीं, बल्कि ज़हर था। हालांकि एफएसडीए को घर से लिए गए सैंपल्स में कहीं भी जहर नहीं मिली है। </p>
<p> </p>
<p>अधिकारियों ने अब्दुल्ला कोडाडिया घर से कुल 11 सैंपल लिए थे, जिनमें बिरयानी, तरबूज, फ्रिज का पानी, कच्चा और पका हुआ चावल, चिकन, खजूर और मसाले जैसी चीजें शामिल थीं। इन सभी की जांच में मिलावट के कोई सबूत नहीं मिले, जिससे मामला और उलझ गया है।</p>
<p><strong>शरीर में कैसे पहुंचा मॉर्फीन?</strong><br />वहीं दूसरी तरफ पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट कुछ अलग इशारा कर रही है। रिपोर्ट में मृतकों के शरीर में मॉर्फीन की मौजूदगी पाई गई है, जो एक तरह की दर्द निवारक दवा है। इसके अलावा शरीर के कुछ टिश्यू में असामान्य हरे रंग का बदलाव भी देखा गया है। आमतौर पर ऐसा बदलाव किसी जहरीले पदार्थ की वजह से हो सकता है। लेकिन अभी यह साफ नहीं है कि यह जहर क्या था और शरीर में कैसे पहुंचा।</p>
<p><strong>परिवार ने खाया था तरबूज</strong><br />यह मामला 26 अप्रैल को सामने आया था, जब 40 साल के अब्दुल्ला दोकाडिया को अस्पताल में भर्ती कराया गया। उन्होंने डॉक्टरों को बताया था कि तरबूज खाने के बाद उनकी, उनकी पत्नी नसरीन (35) और दोनों बेटियों आयशा (16) और जैनब (13) की तबीयत अचानक बिगड़ गई। देखते ही देखते हालत इतनी खराब हो गई कि चारों की जान चली गई। पुलिस ने इस मामले में आकस्मिक मृत्यु रिपोर्ट दर्ज कर जांच शुरू कर दी। </p>
<p><strong>पुलिस को अब तक कुछ भी संदिग्ध नहीं मिला</strong><br />जांच अधिकारियों का कहना है कि वे हर एंगल से मामले को देख रहे हैं, लेकिन अभी तक किसी ठोस नतीजे पर नहीं पहुंचे हैं। कलीना फॉरेंसिक लैब, एफडीए और जेजे अस्पताल की विस्तृत रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है। टॉक्सिकोलॉजी रिपोर्ट से यह स्पष्ट होगा कि इस केस में किसी प्रकार के जहर का सेवन हुआ था या नहीं और अगर हुआ था, तो उसका समय क्या था। </p>
<p>पुलिस के मुताबिक इस केस में अब तक कोई संदिग्ध वित्तीय लेनदेन सामने नहीं आया है। परिजनों के बयानों में परिवार को खुशहाल बताया गया है और किसी तरह के विवाद या चिंता की जानकारी नहीं मिली है। कॉल डिटेल रिकॉर्ड, डिजिटल कम्युनिकेशन और अन्य इलेक्ट्रॉनिक डेटा की जांच की जा रही है, लेकिन अभी तक कोई ठोस सुराग नहीं मिला है। </p>
<p><strong>फूड पॉइजनिंग नहीं तो क्या?</strong><br />रिपोर्ट्स से पता चलता है कि मौत की वजह तरबूज़ नहीं, बल्कि कोई ज़हरीला पदार्थ था जिसने पीड़ितों के अंगों को नुकसान पहुंचाया। सूत्रों से पता चला है कि शुरुआती फ़ॉरेंसिक जांच में यह सामने आया कि पीड़ितों के कुछ अंग,दिमाग, दिल और आंत हरे रंग के हो गए थे। इस मामले की जांच कर रहे मेडिकल विशेषज्ञों ने बताया कि लक्षण और शरीर के अंदर मिले नतीजे, फ़ूड पॉइज़निंग के आम मामलों से मेल नहीं खाते थे। इसके अलावा, अब्दुल्ला डोकाडिया के शरीर में मॉर्फीन पाया गया।</p>
<p>मॉर्फीन एक बहुत असरदार दर्द निवारक दवा है, जिसे आम तौर पर डॉक्टरों की देखरेख में ही दिया जाता है। जांचकर्ता अब यह पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि क्या इस नतीजे का मतलब यह है कि पहले कोई मेडिकल इलाज हुआ था, या यह किसी दुर्घटना की वजह से शरीर में चला गया था, या फिर इसके पीछे कोई और संदिग्ध वजह है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Mumbai</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 03 May 2026 14:09:39 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Online Desk]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>नई दिल्ली : '100% इथेनॉल से चलेंगी गाड़ियां': गडकरी ने बनाया बड़ा मास्टर प्लान, कहा- ऊर्जा के लिए अब स्वदेशी राह ही विकल्प</title>
                                    <description><![CDATA[<p>सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने भारत को 100% इथेनॉल मिश्रण की दिशा में बढ़ने का आह्वान किया है। उन्होंने कहा कि पश्चिम एशिया संकट और 22 लाख करोड़ के भारी तेल आयात बिल को देखते हुए आत्मनिर्भरता जरूरी है। आइए, विस्तार से समझते हैं क्या है गडकरी का मास्टर प्लान।<br />भारत को ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने एक बड़ा लक्ष्य रखा है।</p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/49373/new-delhi-100-vehicles-will-run-on-ethanol-gadkari-made"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-04/okci9vp4_nitin-gadkari_640x480_25_august_23.webp" alt=""></a><br /><p><strong>नई दिल्ली : </strong>सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने भारत को 100% इथेनॉल मिश्रण की दिशा में बढ़ने का आह्वान किया है। उन्होंने कहा कि पश्चिम एशिया संकट और 22 लाख करोड़ के भारी तेल आयात बिल को देखते हुए आत्मनिर्भरता जरूरी है। आइए, विस्तार से समझते हैं क्या है गडकरी का मास्टर प्लान।<br />भारत को ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने एक बड़ा लक्ष्य रखा है। नई दिल्ली में आयोजित 'ग्रीन ट्रांसपोर्ट कॉन्क्लेव' को संबोधित करते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि भविष्य में भारत को 100 प्रतिशत इथेनॉल मिश्रण का लक्ष्य हासिल करना चाहिए। गडकरी का यह बयान ऐसे समय में आया है जब पश्चिम एशिया के संकट के कारण तेल निर्यात में अनिश्चितता बनी हुई है।  </p>
<p> </p>
<p><strong>इथेनॉल मिश्रण पर गडकरी का नया लक्ष्य क्या है?</strong><br />नितिन गडकरी ने मंगलवार को कहा कि भारत को आने वाले समय में 100 प्रतिशत इथेनॉल मिश्रण प्राप्त करने की आकांक्षा रखनी चाहिए। उन्होंने बताया कि पश्चिम एशिया में चल रहे युद्ध की वजह से आज हम ऊर्जा संकट का सामना कर रहे हैं, इसलिए ऊर्जा क्षेत्र में आत्मनिर्भर होना बेहद जरूरी है।  उन्होंने आगे कहा कि वर्तमान में भारत अपनी तेल की जरूरतों का 87 प्रतिशत हिस्सा आयात करता है। इस पर लगभग 22 लाख करोड़ रुपये खर्च होते हैं। गडकरी के अनुसार, यह न केवल आर्थिक बोझ है बल्कि प्रदूषण का भी बड़ा कारण है। ब्राजील जैसे देशों का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि वहां 100 प्रतिशत इथेनॉल मिश्रण का सफल प्रयोग हो रहा है और भारत को भी उसी दिशा में बढ़ना चाहिए।</p>
<p><strong>ऊर्जा संकट और प्रदूषण से निपटने की योजना क्या?</strong><br />गडकरी ने वैकल्पिक ईंधन और जैव-ईंधन के उत्पादन को बढ़ाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि 22 लाख करोड़ रुपये के जीवाश्म ईंधन के आयात को कम करने के लिए हमें सर्कुलर इकोनॉमी पर ध्यान देना होगा। इससे न केवल प्रदूषण कम होगा बल्कि देश में रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे। हालांकि उन्होंने यह भी साफ किया कि सरकार लोगों को पेट्रोल और डीजल गाड़ियां खरीदने से जबरन नहीं रोक सकती, लेकिन वैकल्पिक ईंधन को इतना सक्षम बनाया जाएगा कि लोग खुद उसकी ओर आकर्षित हों। उन्होंने ऑटोमोबाइल कंपनियों को सलाह दी कि वे केवल लागत पर नहीं बल्कि गुणवत्ता पर ध्यान दें ताकि वे नए बाजारों तक पहुंच सकें।</p>
<p><strong>क्या इथेनॉल के खिलाफ कोई साजिश हो रही है?</strong><br />सोशल मीडिया पर ई20 यानी 20 प्रतिशत इथेनॉल मिश्रण को लेकर बढ़ रही चिंताओं पर गडकरी ने बड़ा खुलासा किया। उन्होंने कहा कि पेट्रोलियम क्षेत्र से जुड़े कुछ लोग इस कदम के खिलाफ लॉबिंग कर रहे हैं और नकारात्मकता फैला रहे हैं। उन्होंने भरोसा दिलाया कि इथेनॉल का बढ़ता उपयोग देश के भविष्य के लिए सही है। गडकरी ने यह भी बताया कि अगले साल एक अप्रैल से लागू होने वाले कॉर्पोरेट एवरेज फ्यूल एफिशिएंसी III मानकों का इलेक्ट्रिक और फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों पर बहुत कम प्रभाव पड़ेगा, जो इन वाहनों के भविष्य के लिए सकारात्मक संकेत है।</p>
<p><strong>भविष्य का ईंधन ग्रीन हाइड्रोजन कैसा होगा?</strong><br />नितिन गडकरी ने ग्रीन हाइड्रोजन को भविष्य का असली ईंधन बताया। उन्होंने कहा कि हमें भारत को ऊर्जा का निर्यातक बनाने के लिए एक डॉलर में एक किलोग्राम हाइड्रोजन पैदा करने का लक्ष्य रखना होगा। वर्तमान में हाइड्रोजन का परिवहन एक बड़ी समस्या है और हाइड्रोजन फ्यूल स्टेशनों को आर्थिक रूप से व्यवहार्य बनाने के लिए उनकी लागत कम करने की आवश्यकता है। उन्होंने कचरे से हाइड्रोजन बनाने की तकनीक पर काम करने की सलाह दी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>National</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 21 Apr 2026 19:07:33 +0530</pubDate>
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