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                <title>evidence - Rokthok Lekhani</title>
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                <description>evidence RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>वसई-विरार ड्रग्स मामला...  विधानसभा में विधायक विलास तरे ने सबूत के तौर पर सौंपी सीडी</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;">सदन में पेश किए पुख्ता सबूत विलास तरे केवल शिकायतों के साथ नहीं, बल्कि ठोस सबूतों के साथ सदन में पहुंचे थे। उन्होंने दावा किया कि उनके पास ड्रग्स माफियाओं के नेटवर्क और नशा बेचने के ठिकानों की पूरी जानकारी है। सबूत के तौर पर 'सीडी' (CD) विधायक ने नशाखोरी के प्रमाण स्वरूप एक सीडी सीधे मंत्री महोदय को सौंपी। उन्होंने मांग की कि जिस पुलिस स्टेशन की सीमा में करोड़ों का ड्रग्स पकड़ा गया।</p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/48517/vasai-virar-drugs-case-mla-vilas-tare-handed-over-cd-as"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-03/5hgf.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>वसई :</strong> वसई-विरार क्षेत्रों में पैर पसारते ड्रग्स के अवैध कारोबार को लेकर बोईसर के विधायक विलास तरे ने विधानसभा में बेहद आक्रामक रुख अपनाया। उन्होंने तारांकित प्रश्न के माध्यम से सदन का ध्यान इस ओर खींचते हुए सीधे पुलिस प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए। विधायक तरे ने सदन को बताया कि वसई विरार और पेल्हार पुलिस स्टेशन की सीमा में नशा इस कदर फैल चुका है कि युवा पीढ़ी इसकी चपेट में आकर बर्बाद हो रही है।</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने कहा मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने मेरे पत्र पर संज्ञान लेकर मुंबई की विशेष टीम से कार्रवाई करवाई, जिसमें 11 करोड़ की ड्रग्स पकड़ी गई। लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि स्थानीय सिस्टम अब भी सुस्त है और मेरे क्षेत्र में आज भी मौत का यह सामान धड़ल्ले से बिक रहा है। सदन में पेश किए पुख्ता सबूत विलास तरे केवल शिकायतों के साथ नहीं, बल्कि ठोस सबूतों के साथ सदन में पहुंचे थे। उन्होंने दावा किया कि उनके पास ड्रग्स माफियाओं के नेटवर्क और नशा बेचने के ठिकानों की पूरी जानकारी है। सबूत के तौर पर 'सीडी' (CD) विधायक ने नशाखोरी के प्रमाण स्वरूप एक सीडी सीधे मंत्री महोदय को सौंपी। उन्होंने मांग की कि जिस पुलिस स्टेशन की सीमा में करोड़ों का ड्रग्स पकड़ा गया।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Maharashtra</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 18 Mar 2026 13:13:55 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Online Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title> मुंबई : आत्महत्या के लिए उकसाने को साबित करने के लिए ठोस सबूत की ज़रूरत - हाई कोर्ट</title>
                                    <description><![CDATA[<p>आत्महत्या के लिए उकसाने के जुर्म में, गोलमोल और आम आरोपों का कोई मतलब नहीं होता। इस जुर्म को साबित करने के लिए, गलत काम की पक्की जानकारी और सबूत रिकॉर्ड पर लाना ज़रूरी है, ऐसा मुंबई हाई कोर्ट का कहना है। नागपुर बेंच की जस्टिस उर्मिला जोशी-फाल्के ने एक केस पर अपने फैसले में साफ किया और आरोपी कपल के खिलाफ गैर-कानूनी एफआयआर और केस को रद्द कर दिया। </p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/48088/mumbai-high-court-needs-concrete-evidence-to-prove-abetment-to"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-03/download---2026-03-01t122517.667.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>मुंबई : </strong>आत्महत्या के लिए उकसाने के जुर्म में, गोलमोल और आम आरोपों का कोई मतलब नहीं होता। इस जुर्म को साबित करने के लिए, गलत काम की पक्की जानकारी और सबूत रिकॉर्ड पर लाना ज़रूरी है, ऐसा मुंबई हाई कोर्ट का कहना है। नागपुर बेंच की जस्टिस उर्मिला जोशी-फाल्के ने एक केस पर अपने फैसले में साफ किया और आरोपी कपल के खिलाफ गैर-कानूनी एफआयआर और केस को रद्द कर दिया। </p>
<p> </p>
<p>यवतमाल के सचिन और मनीषा बागड़े के खिलाफ एफआयआर और केस दर्ज किया गया था। वे दूसरों के साथ मिलकर शादीशुदा महिला को शारीरिक और मानसिक रूप से टॉर्चर कर रहे थे। आरोप था कि इसी वजह से शादीशुदा महिला ने आत्महत्या कर ली।</p>
<p>हालांकि, शिकायत में टॉर्चर की तारीख, समय और तरीके की जानकारी नहीं थी। साथ ही, कोर्ट को ऐसा कोई सबूत नहीं मिला कि कपल का शादीशुदा महिला को आत्महत्या के लिए उकसाने का इरादा था और उन्होंने इसमें सीधे या अप्रत्यक्ष रूप से कोई भूमिका निभाई।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Mumbai</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 01 Mar 2026 12:26:16 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Online Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>मुंबई : कलिना ड्रग प्लांटिंग केस में सीसीटीवी सबूत के बावजूद 4 सस्पेंड पुलिसवालों को फिर से नौकरी पर रखा गया</title>
                                    <description><![CDATA[<p>अक्टूबर 2024 में सांताक्रूज़ ईस्ट के कलीना में एक कथित ड्रग प्लांटिंग केस के सिलसिले में सस्पेंड किए गए चार पुलिसवालों – जिसमें एक पुलिस सब-इंस्पेक्टर और तीन कांस्टेबल शामिल हैं – को एक महीने पहले बहाल कर दिया गया। भरोसेमंद सूत्रों के मुताबिक, दिसंबर 2025 में बहाली का ऑर्डर पास होने के लगभग एक महीने बाद, चारों कर्मचारी दादर ईस्ट के नायगांव में आर्म्ड पुलिस हेडक्वार्टर में शामिल हो गए। </p>
<p> </p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/47998/4-suspended-policemen-reinstated-despite-cctv-evidence-in-mumbai-kalina"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-02/download---2026-02-25t131458.584.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>मुंबई : </strong>अक्टूबर 2024 में सांताक्रूज़ ईस्ट के कलीना में एक कथित ड्रग प्लांटिंग केस के सिलसिले में सस्पेंड किए गए चार पुलिसवालों – जिसमें एक पुलिस सब-इंस्पेक्टर और तीन कांस्टेबल शामिल हैं – को एक महीने पहले बहाल कर दिया गया। भरोसेमंद सूत्रों के मुताबिक, दिसंबर 2025 में बहाली का ऑर्डर पास होने के लगभग एक महीने बाद, चारों कर्मचारी दादर ईस्ट के नायगांव में आर्म्ड पुलिस हेडक्वार्टर में शामिल हो गए। </p>
<p> </p>
<p>ड्रग्स प्लांट करने के आरोप सीसीटीवी में कैद यह घटना 30 अगस्त, 2024 की है, जब खार पुलिस स्टेशन के पीएसआई विश्वनाथ ओंबले और तीन कांस्टेबल – इमरान शेख, सागर कांबले और योगेंद्र शिंदे (जिन्हें दबंग शिंदे भी कहा जाता है) – कथित तौर पर सादे कपड़ों में सांताक्रूज़ ईस्ट के कलीना में शाहबाज़ खान (32) के जानवरों के फार्म पर गए, जहाँ डायलन एस्टबेरो (31) काम कर रहा था। उन्होंने कथित तौर पर डायलन की तलाशी ली और एक नकली तलाशी के दौरान उसकी जेब में 20 ग्राम मेफेड्रोन रख दिया और बाद में उस पर ड्रग रखने का आरोप लगाया।</p>
<p>पूरी घटना सीसीटीवी फुटेज में कैद हो गई, जिसे बाद में शाहबाज़ खान ने रिव्यू किया और पब्लिक में शेयर किया। फुटेज जारी होने के बाद, डायलन को खार पुलिस ने रिहा कर दिया। वीडियो से लोगों में गुस्सा फैल गया, जिसके बाद डिपार्टमेंट ने 31 अगस्त, 2024 को चारों पुलिसवालों को सस्पेंड कर दिया। घटना के बाद, ह्यूमन राइट्स कमीशन ने खुद संज्ञान लिया, और मामला अभी भी कमीशन के सामने पेंडिंग है। इसके अलावा, वकोला पुलिस ने ह्यूमन राइट्स कमीशन के निर्देशों के बाद, घटना के तीन महीने से ज़्यादा समय बाद 19 दिसंबर को चारों पुलिसवालों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Mumbai</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 25 Feb 2026 13:15:59 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Online Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>मुंबई: 25 हजार में महिलाओं के 'एग्स' का सौदा, पुलिस ने रैकेट को पकड़ा, फोन में मिले चौंकाने वाले सबूत</title>
                                    <description><![CDATA[<p>मुंबई मेट्रोपॉलिटन रीजन (एमएमआर) में आने वाले उल्हासनगर-ठाणे में महिलाओं के गैर-कानूनी तरीके से अंडाणु बेचने के रैकेट का भंडाफोड़ हुआ है। पुलिस ने इस सनसनीखेज मामले का खुलासा होने के बाद तीन महिलाओं के खिलाफ मामला दर्ज करके कानूनी कार्रवाई की शुरू की है। इन महिलाओं पर आरोप है कि वे आर्थिक तंगी से जूझ रही महिलाओं को टारगेट करती थीं। उनकी मजबूरी का फायदा उठाकर उनके गर्भाशय से अंडाणु बेचने को गोरखधंधा करती थीं। कोर्ट ने यह गोरखधंधा चलाने वाली महिलाओं को 25 फरवरी तक के लिए पुलिक की हिरासत में भेजा है। पुलिस की शुरुआती जांच में सामने आया है कि महिला के गर्भाशय के अंडाणु की बिक्री 20 से 25 हजार रुपये में होती थी। </p>
<p> </p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/47948/mumbai-womens-eggs-traded-for-rs-25000-police-caught-the"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-02/images---2026-02-23t120638.741.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>मुंबई/ठाणे:</strong> मुंबई मेट्रोपॉलिटन रीजन (एमएमआर) में आने वाले उल्हासनगर-ठाणे में महिलाओं के गैर-कानूनी तरीके से अंडाणु बेचने के रैकेट का भंडाफोड़ हुआ है। पुलिस ने इस सनसनीखेज मामले का खुलासा होने के बाद तीन महिलाओं के खिलाफ मामला दर्ज करके कानूनी कार्रवाई की शुरू की है। इन महिलाओं पर आरोप है कि वे आर्थिक तंगी से जूझ रही महिलाओं को टारगेट करती थीं। उनकी मजबूरी का फायदा उठाकर उनके गर्भाशय से अंडाणु बेचने को गोरखधंधा करती थीं। कोर्ट ने यह गोरखधंधा चलाने वाली महिलाओं को 25 फरवरी तक के लिए पुलिक की हिरासत में भेजा है। पुलिस की शुरुआती जांच में सामने आया है कि महिला के गर्भाशय के अंडाणु की बिक्री 20 से 25 हजार रुपये में होती थी। </p>
<p> </p>
<p><strong>कैसे हुआ गौरखधंधे का खुलासा?</strong><br />जानकारी के अनुसार मुंबई मेट्रोपॉलिटन क्षेत्र में महिलाओं के एग्स बेचने के इस खेल का खुलासा तब हुआ जब एक पीड़ित महिला को वादे के अनुसार उचित दाम नहीं मिला तो महिला ने बदलापुर सब-डिस्ट्रिक्ट हॉस्पिटल की चीफ मेडिकल ऑफिसर डॉ. ज्योत्सना सावंत से यह जानकारी ली।एग्स बेचने की घटना को खुलासे पर सांवत दंग रह गईं। उन्होंने बदलापुर ईस्ट पुलिस के साथ बुधवार को एक जॉइंट रेड की। इस ऑपरेशन के दौरान अधिकारियों को आरोपी के मोबाइल फोन से कुछ आपत्तिजनक चीजें मिलीं। जिसमें अंडे बनाने के लिए इस्तेमाल होने वाले हार्मोन इंजेक्शन की तस्वीरें, सोनोग्राफी की तस्वीरें, नकली नामों से तैयार किए गए नकली एफिडेविट, नकली डॉक्यूमेंट और फाइनेंशियल ट्रांजैक्शन के सबूत शामिल थे।<br />पुलिस ने तीन महिलाओं को किया अरेस्ट<br />मेडिकल टीम के साथ संयुक्त कार्रवाई में बदलापुर के जोवेली इलाके से तीन महिलाओं को गिरफ्तार किया गया। आरोपियों की पहचान सुलक्षणा गाडेकर (44), अश्विनी चाबुकस्वार (29) और मंजूषा वारिखेड़े (46) के तौर पर हुई है। इन पर आरोप है कि वे आर्थिक रूप से कमजोर महिलाओं को पैसे का लालच देकर उनके अंडों (इंसानी अंडों) को गैर-कानूनी तरीके से निकालकर बेचने में मदद करती थीं। पुलिस के अनुसार यह रैकेट कथित तौर पर नैनो सिटी बिल्डिंग में गाडेकर के घर से चलाया जा रहा था। इस रैकेट ने करीब 40 महिलाओं को एग्स बेचेन के लिए राजी किया। उनका इस्तेमाल किया। जांच के दौरान यह पता चला कि हर महिला को हर प्रोसीजर के लिए कथित तौर पर 25,000 से 30,000 रुपये के बीच पेमेंट किया जाता था। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि इस गोरखधंधे में कौन से मेडिकल प्रोफेशनल्स और आईवीए क्लीनिक शामिल हैं। <br />अंडाणु-शुक्राणु ब्रिकी को लेकर स्थिति?<br />भारत में अंडाणु और शुक्राणु  को बेचना पूरी तरह से गैरकानूनी है। सहायक प्रजनन प्रौद्योगिकी (विनियमन) अधिनियम, 2021 के तहत केवल दान की अनुमति है। इसके लिए भी काफी सख्त शर्ते हैं। कानून में 5 से 10 लाख रुपये के जुर्माने के साथ बार-बार अपराध करने पर 8 से 12 साल की सजा का प्रावधान है। डोनेशन के लिए भी उम्र तय की गई है। 23 से 35 साल की महिलाएं और 21 से 55 साल के पुरुष ही अपने अंडाणु और शुक्राणु (स्पर्म) डोनेट कर सकिते हैं। दान सिर्फ एआरटी बैंक से ही करने का प्रावधान किया गया है।   </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Mumbai</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 23 Feb 2026 12:07:33 +0530</pubDate>
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