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                <title>need - Rokthok Lekhani News </title>
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                            <item>
                <title>मुंबई: 'गड्ढामुक्त सड़कें बनाने के लिए क्या 20 साल और चाहिए', बॉम्बे हाई कोर्ट की बृहन्मुंबई नगर निगम  को कड़ी फटकार</title>
                                    <description><![CDATA[<p>मुंबई में सड़कों की खराब स्थिति वहां रहने वाले लोगों के लिए एक बड़ा चिंता का विषय है। ऐसे में बीते सोमवार को बॉम्बे हाई कोर्ट ने मुंबई की सड़कों की खस्ता हालत और रोड सेफ्टी को लेकर बृहन्मुंबई नगर निगम के ढीले रवैये पर कड़ी नाराजगी जताई है। कोर्ट ने बीएमसी से सीधे शब्दों में पूछा कि आखिर मुंबई की सभी सड़कों को चलने लायक बनाने के लिए नागरिक निकाय को और कितने साल लगेंगे? </p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/50470/mumbai-do-we-need-20-more-years-to-make-pothole"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-06/mumbai-pothole-pti-1533105526.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>मुंबई। </strong>मुंबई में सड़कों की खराब स्थिति वहां रहने वाले लोगों के लिए एक बड़ा चिंता का विषय है। ऐसे में बीते सोमवार को बॉम्बे हाई कोर्ट ने मुंबई की सड़कों की खस्ता हालत और रोड सेफ्टी को लेकर बृहन्मुंबई नगर निगम के ढीले रवैये पर कड़ी नाराजगी जताई है। कोर्ट ने बीएमसी से सीधे शब्दों में पूछा कि आखिर मुंबई की सभी सड़कों को चलने लायक बनाने के लिए नागरिक निकाय को और कितने साल लगेंगे? </p>
<p> </p>
<p>मामले में सुनवाई के दौरान न्यायाधीश ए.एस. गडकरी और जस्टिस कमल खाता की बेंच ने मौखिक रूप से टिप्पणी करते हुए कहा कि सड़कों की हालत बेहद खराब है। अगर हम यह मान भी लें कि सड़कों पर गड्ढे नहीं हैं, तो भी वहां लाखों ऊबड़-खाबड़ बम्प्स (झटके देने वाले हिस्से) मौजूद हैं।</p>
<p><strong>सड़कों की स्थिति पर हाई कोर्ट नाराज</strong><br />हाई कोर्ट की बेंच ने कड़े शब्दों में कहा कि कभी हाई कोर्ट सड़क के रास्ते आकर देखिए कि कितनी बदतर हालत है। आपको काम करने के लिए कितने साल चाहिए? बीएमसी को 20 साल दिए गए, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं दिखी।</p>
<p><strong>हाई कोर्ट ने बीएमसी और टीएमसी को दिए सख्त निर्देश</strong><br />मामले में कोर्ट ने बीएमसी और ठाणे नगर निगम दोनों को अगले सोमवार तक अपने ऑनलाइन सिस्टम का पूरा डेटा पेश करने का आदेश दिया है। इसके तहत बीएमसी को कोर्ट के सामने शिकायतों पर की गई कार्रवाई के 'पहले और बाद' के फोटो सबूत पेश करने होंगे। इसके अलावा ठाणे नगर निगम को यह बताना होगा कि उन्होंने उस पीड़ित परिवार को मुआवजा दिया या नहीं, जिन्होंने मैनहोल की वजह से अपने मासूम बच्चे को खो दिया था।</p>
<p><strong>सालों से कागजों पर ही हैं आदेश</strong><br />गौरतलब है कि यह पूरी सुनवाई मुंबई की सड़कों की बदहाली पर कोर्ट द्वारा खुद संज्ञान लिए गए मामले और वकील रुजू ठक्कर की एक याचिका पर हो रही थी। याचिका में मांग की गई है कि पिछले एक दशक से मुंबई की सड़कों को गड्ढामुक्त और सुरक्षित बनाने के लिए जो आदेश दिए जा रहे हैं, उन्हें सख्ती से लागू किया जाए।</p>
<p>वकील रुजू ठक्कर ने साल 2023 के उस आदेश की याद दिलाई, जिसमें खुले मैनहोल पर लोहे की सुरक्षा ग्रिल (जालियां) लगाने को कहा गया था। उस समय बीएमसी ने काम पूरा करने के लिए एक साल का समय मांगा था।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Mumbai</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 30 Jun 2026 12:00:57 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Online Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>  नई दिल्ली : सरकार ला रही है नया ऑटोमैटिक नंबर प्लेट स्कैन सिस्टम, क्या खत्म हो जाएगी फास्टैग की जरूरत?</title>
                                    <description><![CDATA[<p><strong> </strong>केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय एक्सप्रेसवे और राष्ट्रीय राजमार्गों पर ऑटोमैटिक टोल वसूली प्रणाली लागू करने की तैयारी कर रहा है। यह नई व्यवस्था मार्च 2026 से कुछ चुनिंदा मार्गों पर शुरू हो सकती है। प्रस्तावित सिस्टम के तहत हाईवे पर लगाए गए कैमरे वाहनों की नंबर प्लेट स्कैन करेंगे और तय दूरी के आधार पर टोल राशि सीधे ड्राइवर के खाते से काट ली जाएगी। </p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/47659/new-delhi-government-is-bringing-new-automatic-number-plate-scan"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-02/download---2026-02-11t174909.288.jpg" alt=""></a><br /><div><strong>नई दिल्ली : </strong>केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय एक्सप्रेसवे और राष्ट्रीय राजमार्गों पर ऑटोमैटिक टोल वसूली प्रणाली लागू करने की तैयारी कर रहा है। यह नई व्यवस्था मार्च 2026 से कुछ चुनिंदा मार्गों पर शुरू हो सकती है। प्रस्तावित सिस्टम के तहत हाईवे पर लगाए गए कैमरे वाहनों की नंबर प्लेट स्कैन करेंगे और तय दूरी के आधार पर टोल राशि सीधे ड्राइवर के खाते से काट ली जाएगी। </div>
<div> </div>
<div> </div>
<div><strong>वर्तमान में टोल वसूली कैसे होती है?</strong></div>
<div>फिलहाल देश के लगभग 1.5 लाख किलोमीटर राष्ट्रीय राजमार्ग और एक्सप्रेसवे नेटवर्क में से करीब 45,000 किलोमीटर पर टोल वसूला जाता है। देशभर में 1,000 से अधिक टोल प्लाजा हैं, जहां अक्सर लंबी कतारें लग जाती हैं। खासकर तब जब वाहन में FASTag (फास्टैग) न हो या उसका खाता निष्क्रिय या ब्लॉक हो, तो यात्रियों को अधिक इंतजार करना पड़ता है। </div>
<div> </div>
<div><strong>नया सिस्टम कैसे काम करेगा?</strong></div>
<div>सरकार की योजना के अनुसार, भौतिक टोल बैरियर हटाकर ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन तकनीक लागू की जाएगी।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>National</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 11 Feb 2026 17:49:58 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Online Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>नई दिल्ली : केंद्र सरकार बना रही है ऐसा नियम कि मुंबई में अडानी को सीमेंट प्लांट के लिए नहीं लेनी होगी पर्यावरण मंज़ूरी</title>
                                    <description><![CDATA[<p>पर्यावरण मंत्रालय ने 26 सितंबर को जारी अपने मसौदा अधिसूचना में प्रस्ताव रखा है कि ‘कैप्टिव पावर प्लांट के बिना काम करने वाले स्वतंत्र सीमेंट ग्राइंडिंग यूनिट’ को पहले से पर्यावरणीय मंजूरी लेने की अनिवार्यता से छूट दी जाए. अगर यह प्रस्ताव मंजूर हो जाता है तो अडानी समूह के लिए कल्याण (जो मुंबई महानगरीय क्षेत्र का हिस्सा है) में अपनी 1,400 करोड़ रुपये की लागत वाली सीमेंट ग्राइंडिंग प्लांट परियोजना को आगे बढ़ाना आसान हो जाएगा. 6 एमएमटीपीए यानी प्रति वर्ष छह मिलियन मीट्रिक टन क्षमता वाला यह प्लांट अंबुजा सीमेंट लिमिटेड का है, जो अडानी समूह की कंपनी है. इस परियोजना का कल्याण के मोहने गांव और आसपास के 10 अन्य गांवों के स्थानीय लोग कड़ा विरोध कर रहे हैं.</p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/44462/new-delhi--the-central-government-is-enacting-a-rule-that-will-eliminate-the-need-for-environmental-clearance-for-adani-s-cement-plant-in-mumbai"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2025-10/images---2025-10-06t160949.932.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>नई दिल्ली : </strong>पर्यावरण मंत्रालय ने 26 सितंबर को जारी अपने मसौदा अधिसूचना में प्रस्ताव रखा है कि ‘कैप्टिव पावर प्लांट के बिना काम करने वाले स्वतंत्र सीमेंट ग्राइंडिंग यूनिट’ को पहले से पर्यावरणीय मंजूरी लेने की अनिवार्यता से छूट दी जाए. अगर यह प्रस्ताव मंजूर हो जाता है तो अडानी समूह के लिए कल्याण (जो मुंबई महानगरीय क्षेत्र का हिस्सा है) में अपनी 1,400 करोड़ रुपये की लागत वाली सीमेंट ग्राइंडिंग प्लांट परियोजना को आगे बढ़ाना आसान हो जाएगा. 6 एमएमटीपीए यानी प्रति वर्ष छह मिलियन मीट्रिक टन क्षमता वाला यह प्लांट अंबुजा सीमेंट लिमिटेड का है, जो अडानी समूह की कंपनी है. इस परियोजना का कल्याण के मोहने गांव और आसपास के 10 अन्य गांवों के स्थानीय लोग कड़ा विरोध कर रहे हैं. धारावी पुनर्विकास परियोजना के बाद, यह मुंबई महानगर क्षेत्र में अडानी समूह की दूसरी परियोजना है जिसे स्थानीय निवासियों के विरोध का सामना करना पड़ रहा है. गांव वालों के विरोध की जानकारी मीडिया में आने के बाद महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (एमपीसीबी) ने 16 सितंबर को एक जनसुनवाई का आयोजन किया था, जिसमें लोगों ने प्लांट का जोरदार विरोध किया. नागरिकों ने कहा कि सीमेंट प्लांट से स्वास्थ्य और पर्यावरण पर बुरा असर पड़ेगा और सवाल उठाया कि सरकार इतनी घनी आबादी वाले शहर में इसे कैसे लगाने दे सकती है.</p>
<p> </p>
<p>हालांकि, सरकार अब जो ड्राफ्ट नोटिफिकेशन लाई है, उसमें कहा गया है कि ऐसे प्लांट्स के लिए जनसुनवाई और एनवायरनमेंटल इम्पैक्ट असेसमेंट (ईआईए) यानी पर्यावरण पर पड़ने वाले प्रभाव के आकलन की रिपोर्ट की ज़रूरत नहीं होगी. इसका तर्क यह है कि अकेले चलने वाले ऐसे ग्राइंडिंग यूनिट्स से प्रदूषण की संभावना कम होती है. अधिकारियों का कहना है कि प्रस्तावित ग्राइंडिंग यूनिट में कैप्टिव पावर प्लांट नहीं होगा, जिससे ग्रांंइडिंग के लिए ‘कैल्सिनेशनट’ और ‘क्लिंकराइजेशन’ जैसी प्रक्रियाएं नहीं की जाएंगी, ये दोनों उच्च तापमान वाली प्रक्रियाएं हैं (पहली में कच्चे माल को गर्म किया जाता है, दूसरी में सीमेंट को छोटे-छोटे टुकड़ों में तोड़ा जाता है).</p>
<p>इसका मतलब है कि ऐसे यूनिट से कार्बन उत्सर्जन कम होगा, सीमेंट प्लांट की तुलना में कचरा कम पैदा होगा और ऊर्जा की खपत भी घटेगी (क्योंकि उच्च तापमान वाली ये प्रक्रियाएं इसमें नहीं होतीं). इसके अलावा, कच्चे माल और तैयार उत्पादों का परिवहन रेलवे या ई-वाहनों (या दोनों के संयोजन) से किए जाने से प्रदूषण की संभावना और भी कम हो जाती है. लेकिन स्थानीय लोगों को आशंका है कि संयंत्र से निकलने वाली धूल और गैसें घनी आबादी वाले शहर पर बुरा असर डालेंगी. प्रदर्शनकारी ग्रामीणों को अब तक सरकार द्वारा लाए नए ड्राफ्ट नोटिफिकेशन की जानकारी नहीं है.</p>
<p>ग्रामस्थ मंडल मोहने कोलीवाड़ा के अध्यक्ष सुभाष पाटिल, जो इस संयंत्र के खिलाफ आंदोलन का नेतृत्व कर रहे हैं, ने कहा है कि गांव वालों को अभी तक केंद्र द्वारा जारी ऐसी किसी अधिसूचना की जानकारी नहीं है. उन्होंने कहा, ‘मुझे नहीं लगता कि यह सरकार का सही कदम है. हम इसे पढ़ेंगे और फिर सामूहिक रूप से तय करेंगे कि आगे क्या करना है.’</p>
<p>इस बीच महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के एक अधिकारी ने पुष्टि की कि यह ड्राफ्ट अधिसूचना केंद्र सरकार के पर्यावरण मंत्रालय द्वारा जारी की गई है. उन्होंने कहा है, ‘लोग इस ड्राफ्ट पर अपनी आपत्तियां या सुझाव भेज सकते हैं और जैसे ही 60 दिनों की अवधि खत्म होगी, अंतिम निर्णय लिया जाएगा. हम नियमों के अनुसार कार्रवाई करेंगे.’</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>National</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 06 Oct 2025 16:10:18 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Online Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>मुंबई को सिंगापुर या शंघाई जैसा बनने की जरूरत नहीं; दूसरी जगहों को मुंबई जैसा बनने की कोशिश करनी चाहिए - मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस </title>
                                    <description><![CDATA[<p>महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि मुंबई को सिंगापुर या शंघाई जैसा बनने की जरूरत नहीं है. उनकी राय में, दूसरी जगहों को मुंबई जैसा बनने की कोशिश करनी चाहिए. उन्होंने यह बात मुंबई में कही. फडणवीस ने कहा, “मुंबई, मुंबई ही रहेगी. हमें इसे शंघाई या सिंगापुर बनाने की कोशिश क्यों करनी चाहिए? मुंबई का अपना एक चरित्र है, जो शंघाई और सिंगापुर से बेहतर है.</p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/43009/mumbai-does-not-need-to-become-like-singapore-or-shanghai--other-places-should-try-to-become-like-mumbai---chief-minister-devendra-fadnavis"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2025-08/download---2025-08-14t123621.243.jpg" alt=""></a><br /><p>मुंबई : महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि मुंबई को सिंगापुर या शंघाई जैसा बनने की जरूरत नहीं है. उनकी राय में, दूसरी जगहों को मुंबई जैसा बनने की कोशिश करनी चाहिए. उन्होंने यह बात मुंबई में कही. फडणवीस ने कहा, “मुंबई, मुंबई ही रहेगी. हमें इसे शंघाई या सिंगापुर बनाने की कोशिश क्यों करनी चाहिए? मुंबई का अपना एक चरित्र है, जो शंघाई और सिंगापुर से बेहतर है.</p>
<p> </p>
<p>मुख्यमंत्री ने कहा कि मुंबई में इंफ्रास्ट्रक्चर और हाउसिंग की कुछ कमियां हैं. इन्हें दूर करने का काम 2014 में शुरू हुआ था और अब बदलाव दिखने लगे हैं. अगले पांच साल में और बड़ा परिवर्तन होगा. उन्होंने बताया कि धारावी हाउसिंग प्रोजेक्ट इसके बदलाव का एक उदाहरण है, जिससे 10 लाख लोगों को पक्का घर और सुविधाएं मिलेंगी. फडणवीस ने कहा कि ‘थर्ड मुंबई’ डेवलप की जा रही है. यह अटल सेतु और नवी मुंबई एयरपोर्ट के बीच बनेगी. इसमें ‘एजु सिटी’ भी होगी, जहां 7 अंतरराष्ट्रीय यूनिवर्सिटी आ चुकी हैं और 5 और आने वाली हैं. उन्होंने कहा कि अगले 2-3 साल में मुंबई में बुलेट ट्रेन भी आ जाएगी. साथ ही, पिछली सरकारों पर आरोप लगाया कि 25 साल में मुंबई का विकास “क्रोनिक कैपिटलिज्म” की वजह से रुका रहा.</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Maharashtra</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 14 Aug 2025 12:37:42 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Online Desk]]></dc:creator>
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