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                <title>मुंबई: क्या मुंबई समेत महाराष्ट्र में डीजे पर कसेगी नकेल, माधुरी मिसाल के बाद अब शिंदे के मंत्री ने साझा की आपबीती</title>
                                    <description><![CDATA[<p>देश की आर्थिक राजधानी मुंबई समेत पूरे महाराष्ट्र में इन दिनों गरबा में मुस्लिमों की एंट्री बैन करने और डीजे पाबंदी के मुद्दे छाए हुए हैं। राज्य में यह पूरा मामला सामाजिक कार्यकर्ता विद्यानंद बापट द्वारा डीजे के खिलाफ आवाज उठाने और प्रशासनिक बैठक में प्रतिबंध की मांग करने के बाद उन पर हुए सार्वजनिक हमले के बाद बड़ी बहस का मुद्दा बना हुआ है।</p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/51793/will-mumbai-crack-down-on-djs-in-maharashtra-including-mumbai"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-09/dj-santosh-kihim-alibaug-disc-jockey-cw63ljytho.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>मुंबई: </strong>देश की आर्थिक राजधानी मुंबई समेत पूरे महाराष्ट्र में इन दिनों गरबा में मुस्लिमों की एंट्री बैन करने और डीजे पाबंदी के मुद्दे छाए हुए हैं। राज्य में यह पूरा मामला सामाजिक कार्यकर्ता विद्यानंद बापट द्वारा डीजे के खिलाफ आवाज उठाने और प्रशासनिक बैठक में प्रतिबंध की मांग करने के बाद उन पर हुए सार्वजनिक हमले के बाद बड़ी बहस का मुद्दा बना हुआ है। कई नेताओं और नागरिकों का तर्क है कि महाराष्ट्र के पारंपरिक उत्सवों (जैसे गणेशोत्सव) को डीजे की बजाय ढोल-ताशे और स्थानीय पारंपरिक वाद्य यंत्रों के साथ मनाया जाना चाहिए। कुछ दिन पहले फडणवीस सरकार में मंत्री और बीजेपी की नेता माधुरी मिसाल ने कहा था कि वह पूर्ण डीजे प्रतिबंध चाहती हैं।</p>
<p> </p>
<p><strong>गुलाबराव पाटिल ने किया अलर्ट</strong><br />महाराष्ट्र में डीजे पर छिड़ी चर्चा के बीच अब एकनाथ शिंदे की अगुवाई वाली शिवसेना से मंत्री गुलाबराव पाटिल ने गणेशोत्सव में डीजे छोड़ने की अपील करते हुए कहा है कि ढोल-ताशे अपनाएं। पाटिल ने जलगांव में एक कार्यक्रम के दौरान अपनी आपबीती को साझा किया। मंत्री गुलाबराव पाटिल ने कहा कि डीजे की आवाज ने उनकी सुनने की क्षमता 40 फीसदी कम कर दी है। गणेशोत्सव में डीजे और साउंड सिस्टम के इस्तेमाल को लेकर अलर्ट करते हुए राज्य के जलापूर्ति मंत्री गुलाबराव पाटिल ने अपना अनुभव साझा किया।</p>
<p><strong>डीजे ने छीनी सुनने की क्षमता</strong><br />मंत्री गुलाबराव पाटिल ने कहा कि शादी समारोह में डीजे की तेज आवाज के कारण उनके एक कान की सुनने की क्षमता 40 फीसदी तक कम हो गई है। अब यह क्षमता वापस आना संभव नहीं है। पाटिल ने कहा कि त्योहार खुशी के लिए हैं, किसी की सेहत खराब करने के लिए नहीं हैं। तेज आवाज से कान के पर्दे को नुकसान पहुंचने जैसी गंभीर समस्याएं हो सकती हैं। मंत्री पाटिल ने कहा कि इसलिए युवाओं को गणेशोत्सव में डीजे और के बजाय ढोल-ताशे को प्राथमिकता देनी चाहिए। उन्होंने बताया कि वह भतीजे की शादी के दौरान परिजनों के आग्रह पर वे नाचने लगे थे। इसी दौरान डीजे की तेज आवाज से उनके कान में परेशानी शुरू हुई और फिर पता चला कि उनकी सुनने की क्षमता 40 फीसदी चली गई है।</p>
<p><strong>महाराष्ट्र में अभी क्या है स्थिति?</strong><br />महाराष्ट्र में त्योहारों के दौरान डीजे और हाई-डेसिबल साउंड सिस्टम के इस्तेमाल को लेकर पूरे राज्य में एक समान पूर्ण प्रतिबंध नहीं है, बल्कि अलग-अलग जिलों में स्थानीय प्रशासन और अदालती आदेशों के तहत कड़े नियम व पाबंदियां लागू हैं।</p>
<p>2016: सामाजिक कार्यकर्ता डॉ. महेश बेडेकर ने बॉम्बे हाई कोर्ट में एक जनहित याचिका दायर की। इसके बाद कोर्ट ने ध्वनि प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए रिहायशी इलाकों में दिन में 55डीबी और रात (10 बजे से सुबह 6 बजे) के बीच 45डीबी की सीमा तय कर दी।</p>
<p>2018: बॉम्बे हाई कोर्ट ने मुंबई और राज्य के अन्य हिस्सों में गणेशोत्सव के दौरान भारी-भरकम डीजे और डॉल्बी साउंड सिस्टम के इस्तेमाल पर प्रतिबंध लगा दिया। कोर्ट ने पारंपरिक वाद्यों (जैसे ढोल-ताशा) को प्राथमिकता देने की बात कही।</p>
<p>अगस्त 2025: बॉम्बे हाई कोर्ट ने अपने पुराने आदेश को बरकरार रखते हुए मुंबई में गणेशोत्सव के दौरान डीजे और लेजर लाइट पर प्रतिबंध जारी रखने का फैसला सुनाया। नियमों का उल्लंघन करने पर उपकरण जब्त करने और भारी जुर्माने की चेतावनी दी।</p>
<p>सितंबर 2026: पुणे में सामाजिक कार्यकर्ता विद्यानंद बापट द्वारा ध्वनि प्रदूषण के खिलाफ आवाज उठाने और उन पर हुए हमले के बाद यह मुद्दा फिर गरमा गया। इसके बाद सरकार के मंत्रियों (जैसे माधुरी मिसाल) और विपक्षी नेताओं (जैसे उद्धव ठाकरे ) ने पूरे राज्य के त्योहारों में डीजे पर एक समान पूर्ण प्रतिबंध लगाने की मांग तेज कर दी है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Maharashtra</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 11 Sep 2026 12:44:08 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Online Desk]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>महाराष्ट्र सरकार ने स्वास्थ्य विभाग में ग्रेड के आधार पर तय होगी अधिकारियों की जिम्मेदारी</title>
                                    <description><![CDATA[<p>महाराष्ट्र सरकार ने स्वास्थ्य अधिकारियों की जवाबदेही तय करने के लिए बड़ा फैसला लिया है। अब उनके काम की पहचान, मेरिट के आधार पर की जाएगी। उनके काम का हर साल लेखा-जोखा किया जाएगा और उसी आधार पर उनके साल के काम का ग्रेड तय करके उनकी प्राथमिकता के साथ जिम्मेदारी तय की जाएगी। यह फैसला स्वास्थ्य विभाग ने लिया है। स्वास्थ्य मंत्री प्रकाश आबिटकर के अनुसार परफॉर्मेंस-बेस्ड एडमिनिस्ट्रेटिव वर्क कल्चर बनाने के लिए यह अहम फैसला लिया गया है।</p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/51725/maharashtra-government-will-decide-the-responsibility-of-officers-in-the"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-09/images---2026-09-07t130537.079.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>मुंबई: </strong>महाराष्ट्र सरकार ने स्वास्थ्य अधिकारियों की जवाबदेही तय करने के लिए बड़ा फैसला लिया है। अब उनके काम की पहचान, मेरिट के आधार पर की जाएगी। उनके काम का हर साल लेखा-जोखा किया जाएगा और उसी आधार पर उनके साल के काम का ग्रेड तय करके उनकी प्राथमिकता के साथ जिम्मेदारी तय की जाएगी। यह फैसला स्वास्थ्य विभाग ने लिया है। स्वास्थ्य मंत्री प्रकाश आबिटकर के अनुसार परफॉर्मेंस-बेस्ड एडमिनिस्ट्रेटिव वर्क कल्चर बनाने के लिए यह अहम फैसला लिया गया है।</p>
<p> </p>
<p>जिला सर्जन और जिला हेल्थ ऑफिसर कैडर के अधिकारियों का हर साल ऑब्जेक्टिव इवैल्यूएशन किया जाएगा। उनके ग्रेड पिछले तीन वर्षों की परफॉर्मेंस के आधार पर तय किए जाएंगे। इस ग्रेड का इस्तेमाल जिम्मेदारियां बांटने, अगले तीन वर्षों के लिए काम की योजना बनाने और भविष्य की नियुक्तियों के लिए किया जाएगा। इस निर्णय से सार्वजनिक स्वास्थ्य विभाग में वरिष्ठता के साथ-साथ असल परफॉर्मेंस, नेतृत्व कौशल, मरीजों की देखभाल, वित्तीय अनुशासन, मानव संशाधन प्रबंधन और योजनाओं को असरदार तरीके से लागू करने को अहमियत मिलेगी। बेहतरीन काम करने वाले अधिकारियों को उनकी काबिलियत के हिसाब से आगे मौके देने का सिस्टम बनाया जाएगा। इससे अधिकारियों का हौसला बढ़ाने में भी मदद मिलेगी।</p>
<p>स्वास्थ्य मंत्री ने बताया कि 31 मार्च 2026 को कम से कम तीन साल की सेवा पूरी करने वाले संबंधित अधिकारियों के काम की जानकारी अपडेट की जाएगी और उनकी रेटिंग की जाएगी। तीन साल 2023-24, 2024-25 और 2025-26 के दौरान पोस्ट पर किए गए काम को देखते हुए कुल 100 अंक का मूल्यांकन किया जाएगा। इस रेटिंग के हिसाब से अधिकारियों को चार कैटेगरी ए बी सी और  डी में बांटा जाएगा। यह प्रक्रिया हर साल लागू की जाएगी।</p>
<p>अधिकारियों की रेटिंग करते समय, सिर्फ पेपर वर्क को ही नहीं, बल्कि जिले के हेल्थ सिस्टम पर सीधे असर डालने वाले कई पहलुओं को शामिल किया गया है। लोगों से जुड़ाव, शिकायत निवारण, नेतृत्व गुणवत्ता, विशेष कौशल, प्रशिक्षण और कम्युनिकेशन स्किल पर विचार किया जाएगा। जिले की सालाना प्लानिंग, स्टेट अकाउंट्स, नेशनल हेल्थ मिशन और सीएसआर फंड के असरदार इस्तेमाल के लिए किए गए वित्तीय प्रबंधन की भी जांच की जाएगी। स्वास्थ्य सुविधाओं की गुणवत्ता सुधारने के लिए उठाए गए कदम, जैसे खाना, दवाइयां, साफ-सफाई और स्वास्थ्य प्रशिक्षण में ठेके पर रखे गए लोगों का सही इस्तेमाल, भी इवैल्यूएशन का हिस्सा होंगे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Maharashtra</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 07 Sep 2026 13:06:56 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Online Desk]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>मुंबई-बेंगलुरु हाईवे पर रील बनाने के लिए ट्रैफिक रोकना पड़ा भारी</title>
                                    <description><![CDATA[<p>सोशल मीडिया पर रील बनाने का जुनून अब लोगों के लिए कानूनी परेशानी का कारण बनता जा रहा है। महाराष्ट्र के पुणे में ऐसा ही एक मामला सामने आया है, जहां नई खरीदी गई महिंद्रा बीई 6 कार के साथ हाईवे पर वीडियो बनाने और ट्रैफिक रोकने के आरोप में पुलिस ने एक ग्रुप के खिलाफ मामला दर्ज किया है।</p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/51656/heavy-traffic-had-to-be-stopped-to-make-a-reel"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-09/reel-stunt-1044x653.webp" alt=""></a><br /><p><strong>पुणे: </strong>सोशल मीडिया पर रील बनाने का जुनून अब लोगों के लिए कानूनी परेशानी का कारण बनता जा रहा है। महाराष्ट्र के पुणे में ऐसा ही एक मामला सामने आया है, जहां नई खरीदी गई महिंद्रा बीई 6 कार के साथ हाईवे पर वीडियो बनाने और ट्रैफिक रोकने के आरोप में पुलिस ने एक ग्रुप के खिलाफ मामला दर्ज किया है। बावधन पुलिस के अनुसार, आरोप है कि कुछ लोगों ने मुंबई-बेंगलुरु हाईवे पर अपनी नई कार की रील बनाने के लिए वाहनों को रोक दिया और खतरनाक तरीके से ड्राइविंग की। इस दौरान हाईवे पर कुछ समय के लिए जाम की स्थिति बन गई, जिससे अन्य वाहन चालकों को परेशानी का सामना करना पड़ा।</p>
<p> </p>
<p>सोशल मीडिया वीडियो से हुआ खुलासा पुलिस को इस मामले की जानकारी सोशल मीडिया पर वायरल हुए वीडियो के बाद मिली। वीडियो सामने आने के बाद पुलिस ने मामले की जांच शुरू की। जांच में सामने आया कि कुछ लोग अपनी नई कार के प्रचार और सोशल मीडिया कंटेंट के लिए हाईवे पर वीडियो बना रहे थे। पुलिस ने इसके बाद संबंधित लोगों की पहचान कर कार्रवाई शुरू की। लापरवाही से ड्राइविंग का आरोप पुलिस ने बताया कि संदिग्धों ने हाईवे जैसे व्यस्त मार्ग पर सुरक्षा नियमों की अनदेखी की। आरोप है कि उन्होंने वाहन रोककर और खतरनाक तरीके से चलाकर दूसरे वाहन चालकों के लिए परेशानी पैदा की।</p>
<p>इन धाराओं के तहत सार्वजनिक रास्ते पर खतरा पैदा करने, लापरवाही से वाहन चलाने और यातायात नियमों का उल्लंघन करने जैसे आरोपों की जांच की जाएगी। पुलिस ने दी चेतावनी पुलिस अधिकारियों ने कहा कि सोशल मीडिया पर लोकप्रियता हासिल करने के लिए सड़क पर स्टंट करना या यातायात बाधित करना कानूनन अपराध है। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे रील और वीडियो बनाने के लिए अपनी और दूसरों की सुरक्षा को खतरे में न डालें। सार्वजनिक स्थानों पर किसी भी तरह की गतिविधि करने से पहले नियमों का ध्यान रखना जरूरी है।</p>
<p>बढ़ रहे हैं रील कल्चर से जुड़े मामले हाल के दिनों में सोशल मीडिया रील्स बनाने के चक्कर में सड़क सुरक्षा नियमों की अनदेखी के कई मामले सामने आए हैं। कई लोग लाइक और व्यूज हासिल करने के लिए खतरनाक स्टंट करते हैं, तेज रफ्तार से वाहन चलाते हैं या सार्वजनिक स्थानों पर ऐसी गतिविधियां करते हैं जिससे आम लोगों को परेशानी होती है। पुलिस लगातार ऐसे मामलों में कार्रवाई कर रही है ताकि लोगों को नियमों का पालन करने के लिए जागरूक किया जा सके। जांच जारी फिलहाल बावधन पुलिस मामले की जांच कर रही है। पुलिस सोशल मीडिया पर मौजूद वीडियो और अन्य सबूतों के आधार पर आगे की कार्रवाई करेगी। मुंबई-बेंगलुरु हाईवे जैसे व्यस्त मार्ग पर रील बनाने के लिए यातायात बाधित करने का यह मामला एक बार फिर बताता है कि सोशल मीडिया लोकप्रियता के लिए सुरक्षा नियमों से समझौता करना भारी पड़ सकता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>National</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 02 Sep 2026 11:27:17 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Online Desk]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>मुंबई: बच्चों को कुरकुरे, मैगी और लेज़ देने से पहले सावधान, मुंबई में पैकेट पर बदली जा रही थी एक्सपायरी डेट</title>
                                    <description><![CDATA[<p>महाराष्ट्र फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन ने एक ऐसे रैकेट का भंडाफोड़ किया है जो पैक्ड फूड प्रोडक्ट पर मैन्युफैक्चरिंग और एक्सपायरी डेट बदल कर दोबारा बाजार में बेचने के लिए तैयार करते थे। एफडीए और नवी मुंबई पुलिस क्राइम ब्रांच के इस साझा ऑपरेशन के दौरान जब्त किए गए स्टॉक में भारत के कुछ सबसे मशहूर फूड और बेवरेज ब्रांड शामिल हैं।</p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/51637/be-careful-before-giving-crunchy-maggi-and-lays-to-children"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-09/1200-675-27443551-thumbnail-16x9-jpr-aspera.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>मुंबई: </strong>महाराष्ट्र फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन ने एक ऐसे रैकेट का भंडाफोड़ किया है जो पैक्ड फूड प्रोडक्ट पर मैन्युफैक्चरिंग और एक्सपायरी डेट बदल कर दोबारा बाजार में बेचने के लिए तैयार करते थे। एफडीए और नवी मुंबई पुलिस क्राइम ब्रांच के इस साझा ऑपरेशन के दौरान जब्त किए गए स्टॉक में भारत के कुछ सबसे मशहूर फूड और बेवरेज ब्रांड शामिल हैं।</p>
<p>जब्त किए गए स्टॉक में लेज़, कुरकुरे, मैगी, नॉर, रसोई, हेलमैन्स, थम्स अप और लिम्का के प्रोडक्ट शामिल थे। इन पैकेट में क्लासिक सॉल्टेड, मैजिक मसाला, स्पैनिश टैंगी टोमैटो, सिज़लिंग हॉट और लेमन चिली वैरिएंट शामिल थे।</p>
<p>एफडीए के अनुसार, फूड पैकेजिंग पर छपी तारीखों को हटाया या उन पर दूसरी तारीखें लिखी जा रही थीं। एफडीए अधिकारियों को कथित तौर पर इंकजेट प्रिंटर, थिनर और खास तौर पर तैयार किए गए स्टिकर मिले, जिनका इस्तेमाल ओरिजनल मैन्युफैक्चरिंग जानकारी मिटाने या छिपाने के लिए किया जा रहा था।</p>
<p><strong>दिल्ली और नोएडा की एक्सपोर्ट-इंपोर्ट कंपनिया भी शामिल</strong></p>
<p>मुंबई के अलावा दिल्ली और नोएडा की एक्सपोर्ट-इंपोर्ट कंपनिया भी शामिल हैं। एफडीए ने बताया कि इस ऑपरेशन के दौरान 10 एक्सपोर्टर कंपनियों से जुड़े 8,442 कार्टन जब्त किए गए, जिनकी घोषित कीमत 75,21,269 रुपए थी। इसके अलावा, बिना लेबल वाले स्टॉक और एक्सपायर हो चुके फूड प्रोडक्ट्स भी उसी जगह से बरामद किए गए, जिनकी कीमत लगभग 30,60 रुपए थी।</p>
<div> </div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Maharashtra</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 01 Sep 2026 12:44:14 +0530</pubDate>
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