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                <title>मुंबई: कृषि लोन माफी योजना के नियमों में ढील का शरद पवार ने किया स्वागत</title>
                                    <description><![CDATA[<p>नेशनलिस्ट कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार गुट) के अध्यक्ष शरद पवार ने महाराष्ट्र सरकार की कृषि लोन माफी योजना के लिए पात्रता नियमों में बदलाव के फैसले का स्वागत किया है। उन्होंने कहा कि सरकार के इस कदम से बड़ी संख्या में किसान योजना के लाभ से बाहर होने से बच जाएंगे और उन्हें आर्थिक राहत मिल सकेगी।</p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/50674/sharad-pawar-welcomed-the-relaxation-in-the-rules-of-mumbai"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-07/images---2026-07-11t113522.334.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>मुंबई : </strong>नेशनलिस्ट कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार गुट) के अध्यक्ष शरद पवार ने महाराष्ट्र सरकार की कृषि लोन माफी योजना के लिए पात्रता नियमों में बदलाव के फैसले का स्वागत किया है। उन्होंने कहा कि सरकार के इस कदम से बड़ी संख्या में किसान योजना के लाभ से बाहर होने से बच जाएंगे और उन्हें आर्थिक राहत मिल सकेगी। शरद पवार ने जारी एक बयान में कहा कि राज्य सरकार ने लगातार प्राकृतिक आपदाओं और कृषि उत्पादों की कीमतों में भारी गिरावट के कारण किसानों को राहत देने के उद्देश्य से लोन माफी योजना की घोषणा की थी। उन्होंने कहा कि खेती लगातार संकटों से गुजर रही है और ऐसे समय में किसानों को आर्थिक सहायता की जरूरत है।</p>
<p> </p>
<p>पवार ने बताया कि योजना की शुरुआती व्यवस्था में कुछ ऐसे नियम शामिल किए गए थे, जिनके कारण कई किसान लाभ पाने से वंचित हो सकते थे। खासतौर पर उन किसानों के लिए पात्रता से जुड़ी सीमाएं तय की गई थीं, जिन्होंने 2018-19 की लोन माफी योजना का लाभ पहले लिया था। उन्होंने कहा कि यदि पुराने लाभार्थियों को नई योजना से बाहर रखा जाता तो बड़ी संख्या में जरूरतमंद किसान इस राहत से वंचित रह जाते। इसलिए पात्रता नियमों को सरल बनाने का फैसला किसानों के हित में है।</p>
<p>किसानों की आर्थिक स्थिति पर चिंता शरद पवार ने कहा कि महाराष्ट्र के किसान पिछले कई वर्षों से विभिन्न समस्याओं का सामना कर रहे हैं। मौसम में लगातार बदलाव, बेमौसम बारिश, सूखा, फसल नुकसान और बाजार में कृषि उत्पादों की कम कीमतों ने किसानों की आर्थिक स्थिति को प्रभावित किया है। उन्होंने कहा कि कई किसानों को खेती की लागत निकालना भी मुश्किल हो रहा है। बीज, खाद, कीटनाशक, मजदूरी और सिंचाई जैसी बढ़ती लागत के कारण किसानों पर कर्ज का बोझ बढ़ता जा रहा है। ऐसे में लोन माफी जैसी योजनाएं किसानों को तत्काल राहत देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।</p>
<p>सरकार के फैसले से राहत की उम्मीद पवार ने कहा कि पात्रता नियमों में बदलाव से अब अधिक किसान योजना के दायरे में आ सकेंगे। इससे उन किसानों को भी लाभ मिलने की उम्मीद है, जो पहले बनाए गए नियमों के कारण योजना से बाहर हो रहे थे। उन्होंने सरकार के इस फैसले को सकारात्मक कदम बताते हुए कहा कि किसानों को राहत देने वाली योजनाओं का उद्देश्य अधिक से अधिक जरूरतमंद लोगों तक पहुंचना होना चाहिए। किसी भी प्रकार की जटिल शर्तें किसानों के लिए परेशानी का कारण नहीं बननी चाहिए।<br />कृषि संकट को लेकर उठाए सवाल एनसीपी प्रमुख ने राज्य में कृषि क्षेत्र की मौजूदा स्थिति पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि केवल कर्ज माफी से किसानों की सभी समस्याओं का समाधान नहीं हो सकता। किसानों को स्थायी राहत देने के लिए फसल को उचित मूल्य, बेहतर बाजार व्यवस्था, सिंचाई सुविधाओं का विस्तार और कृषि लागत को नियंत्रित करने जैसे कदम भी जरूरी हैं। उन्होंने कहा कि सरकार को किसानों की आय बढ़ाने और उन्हें आर्थिक रूप से मजबूत बनाने के लिए दीर्घकालिक नीतियां तैयार करनी चाहिए।</p>
<p>प्राकृतिक आपदाओं से प्रभावित किसान महाराष्ट्र के कई इलाकों में हाल के वर्षों में बारिश, बाढ़ और अन्य प्राकृतिक आपदाओं के कारण फसलों को नुकसान पहुंचा है। पवार ने कहा कि ऐसे हालात में किसानों को दोहरी मार झेलनी पड़ती है। एक ओर उत्पादन प्रभावित होता है, वहीं दूसरी ओर बाजार में उचित कीमत नहीं मिलने से उनकी परेशानी बढ़ जाती है। उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा घोषित राहत योजनाओं का लाभ समय पर और बिना कठिन प्रक्रिया के किसानों तक पहुंचना चाहिए। राजनीतिक नजरिए से भी अहम फैसला महाराष्ट्र में किसानों का मुद्दा हमेशा से राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण रहा है। ऐसे में कृषि लोन माफी योजना के नियमों में बदलाव को लेकर विपक्ष और सत्तारूढ़ दलों के बीच प्रतिक्रिया सामने आ रही है।</p>
<p>शरद पवार का समर्थन इस फैसले को किसानों के मुद्दे पर सरकार के प्रति नरम रुख के तौर पर भी देखा जा रहा है। हालांकि उन्होंने साथ ही यह भी कहा कि किसानों की समस्याओं के स्थायी समाधान के लिए व्यापक कदम उठाने की आवश्यकता है। फिलहाल सरकार के फैसले के बाद उम्मीद जताई जा रही है कि बड़ी संख्या में किसान इस योजना का लाभ उठा सकेंगे। पात्रता नियमों में बदलाव से उन किसानों को राहत मिलने की संभावना है, जो पहले तकनीकी कारणों से योजना से बाहर हो सकते थे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Maharashtra</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 11 Jul 2026 11:38:28 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>मुंबई : लाडली बहन योजना में 68 लाख महिलाओं को अपात्र; वार्षिक खर्च 43740 करोड़ से घटकर 31500 करोड़ रुपये रह जाएगा</title>
                                    <description><![CDATA[<p>महाराष्ट्र सरकार ने लाडली बहन योजना के तहत 68 लाख महिलाओं को अपात्र घोषित किया है। इससे सरकार का सालाना 12240 करोड़ रुपये बचेगा। वहीं लाडली बहन योजना पर वार्षिक खर्च 43740 करोड़ से घटकर 31500 करोड़ रुपये रह जाएगा। सरकार ने लाडली बहन योजना के लिए ई-केवाईसी की डेडलाइन 30 अप्रैल तक बढ़ा दी है। पहले लाडली बहन योजना का ई-केवाईसी 31 मार्च तक था।</p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/49176/annual-expenditure-of-68-lakh-women-ineligible-under-mumbai-ladli"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-04/download---2026-04-13t130733.704.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>मुंबई: </strong>महाराष्ट्र सरकार ने लाडली बहन योजना के तहत 68 लाख महिलाओं को अपात्र घोषित किया है। इससे सरकार का सालाना 12240 करोड़ रुपये बचेगा। वहीं लाडली बहन योजना पर वार्षिक खर्च 43740 करोड़ से घटकर 31500 करोड़ रुपये रह जाएगा। सरकार ने लाडली बहन योजना के लिए ई-केवाईसी की डेडलाइन 30 अप्रैल तक बढ़ा दी है। पहले लाडली बहन योजना का ई-केवाईसी 31 मार्च तक था। महिला एवं बाल विकास विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि योजना से 68 लाख महिलाओं के नाम बाहर होने से अब दूसरे विभागों से निधि लेने की जरूरत नहीं पड़ेगी।</p>
<p> </p>
<p>एकनाथ शिंदे सरकार ने जुलाई 2024 में राज्य में लाडली बहन योजना शुरू की थी। शुरुआत में इस योजना के तहत करीब 2 करोड़ 47 लाख महिलाएं लाभार्थी थीं, इनमें से 31 मार्च 2026 तक 1 करोड़ 75 लाख महिलाओं ने ई-केवाईसी प्रक्रिया को पूरा किया। वहीं 68 लाख महिलाएं अपात्र होकर योजना से बाहर हो गई।</p>
<p><strong>ई केवाईसी जरूरी होने का मिला सरकार को फायदा</strong><br />लाडली बहन योजना के तहत पात्र महिलाओं को 1500 रुपये की किश्त दी जा रही है। लेकिन अपात्र महिलाओं द्वारा योजना का लाभ लेने की शिकायत मिलने के बाद सरकार ने 18 सितंबर 2025 को परिपत्र जारी कर योजना का लाभ लेने के लिए दो माह के भीतर ई-केवाईसी करना अनिवार्य किया था।</p>
<p><strong>अपात्र महिलाओं को मिले 20 हजार करोड़</strong><br />आखिरकार इस योजना से 68 लाख महिलाएं बाहर हो गईं। वहीं अब 1 करोड़ 75 लाख महिलाएं इस योजना के लिए पात्र पाई गई हैं। एक अधिकारी ने बताया कि पिछले 20 महीने में अपात्र महिलाओं के खाते में 20 हजार करोड़ रुपये से अधिक जमा किए गए हैं। अब इन महिलाओं के योजना से बाहर होने से राज्य सरकार का हर साल लगभग 12240 करोड़ रुपये बचेगा। इस योजना के लिए कुल 43740 करोड़ रुपये साल में खर्च होने का अनुमान था, जो अब घटकर 31500 करोड़ रुपये रह जाएगा।</p>
<p><strong>हड़बड़ी में शुरू की गई थी लाडली बहन योजना</strong><br />विधानसभा चुनाव से पहले शुरू की गई इस योजना के तहत जरूरतमंद महिलाओं के बैंक खातों में हर महीने 1500 रुपये जमा किए जाते थे। यह योजना काफी लोकप्रिय रही और इसका राजनीतिक लाभ भी मिला। हालांकि, सरकार के ध्यान में आया कि बड़ी संख्या में फर्जी लाभार्थी भी योजना में शामिल हो गए थे। उस दौरान सरकार ने कोई जांच-पड़ताल नहीं की। इसका अपात्र महिलाओं सहित पुरुषों ने भी लाभ उठाया। चुनाव के बाद सरकार ने जांच शुरू की तो 68 लाख महिलाएं अपात्र हो गई, इससे सरकार के खजाने पर भी भार कम होगा।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Maharashtra</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 13 Apr 2026 13:29:46 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Online Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>विरार में म्हाडा के घरों की बढ़ी डिमांड, कोकण बोर्ड ने पहले आओ, पहले पाओ स्कीम में 152 दिन में बेचे 3750 घर</title>
                                    <description><![CDATA[<p>म्हाडा के कोकण बोर्ड के विरार के घरों की मांग बढ़ गई है। खाली पड़े घरों के लिए ग्राहकों की लाइन लगने लगी है। रोजाना औसतन 25 घरों की बिक्री करने में कोकण बोर्ड सफल हो पा रहा है। पिछले 152 दिन में विरार में तैयार 3,750 घरों की बिक्री हुई है। नागरिकों को किफायती घर उपलब्ध कराने के लिए 2014 में म्हाड़ा ने विरार बोलिंज में 9,409 घर तैयार किए थे। लेकिन परिसर में पानी की समस्या और अन्य कारणों की वजह से घरों की बिक्री नहीं हो पा रही थी।</p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/48466/demand-for-mhada-houses-increased-in-virar-konkan-board-sold"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-03/download---2026-03-16t130420.472.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>मुंबई : </strong>म्हाडा के कोकण बोर्ड के विरार के घरों की मांग बढ़ गई है। खाली पड़े घरों के लिए ग्राहकों की लाइन लगने लगी है। रोजाना औसतन 25 घरों की बिक्री करने में कोकण बोर्ड सफल हो पा रहा है। पिछले 152 दिन में विरार में तैयार 3,750 घरों की बिक्री हुई है। नागरिकों को किफायती घर उपलब्ध कराने के लिए 2014 में म्हाड़ा ने विरार बोलिंज में 9,409 घर तैयार किए थे। लेकिन परिसर में पानी की समस्या और अन्य कारणों की वजह से घरों की बिक्री नहीं हो पा रही थी।</p>
<p> </p>
<p>पिछले साल सूर्या जलापूर्ति परियोजना के जरिए सूर्या नदी का पानी विरार तक पहुंचने से परिसर की पानी की परेशानी दूर हो गई। बिरार में 9,409 घरों में से 7,783 घरों की बिक्री हो चुकी है। 7,783 घरों में से 3,750 घर पिछले 152 दिन में बिके हैं। घरों की बिक्री में म्हाडा उपाध्यक्ष संजीव जयस्वाल का अहम योगदान है। उनकी घरों की कीमतों में छूट और "पहले आओ पहले पाओ योजना रंग लाई।</p>
<p><strong>अन्य जगहों में भी मांग</strong><br />विरार के साथ ही कोकण बोर्ड द्वारा तैयार अन्य जगहों पर भी घरों की बिक्री ने रफ्तार पकड़ ली है। बोर्ड ने भांडाली में 2019-20 में 1,769 घरों का निर्माण किया था। इनमें से अब तक 1,761 घरों की बिक्री हो चुकी है। बिके 1,761 घरों में 811 घर बीते पांच महीने में बिके है। 2019-20 में घोटेघर में 1,659 घरों का निर्माण किया गया था। यहां केवल 67 घरों की बिक्री होनी बाकी है।</p>
<p><strong>प्रॉजेक्ट कर रहा है आकर्षित</strong><br />सरकार मुंबई से विरार के बीच कई इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रॉजेक्ट तैयार कर रही है। इसमें सी लिंक से लेकर कोस्टल रोड तक शामिल है। यह सभी प्रॉजेक्ट एक दूसरे से कनेक्ट होगे। इसमें बांद्रा-वर्सोवा सी लिंक, वर्सोवा-दहिसर और दहिसर-भाईदर कोस्टल रोड और उत्तन-विरार सी लिक प्रॉजेक्ट शामिल है। वही, बुलेट ट्रेन भी विरार से होकर गुजरने वाली है। विरार-अलीबाग कॉरिडोर के माध्यम से लोग रायगड तक आसानी से पहुंच सकते है। इनके जरिए लोग घंटों के बजाए मिनटों मे एमएमआर के हर हिस्से में पहुंच सकते हैं। म्हाडा के प्रयास और एमएमआर मे जारी इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रॉजेक्ट से लोग आगे आ रहे है।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Mumbai</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 16 Mar 2026 13:05:39 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Online Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>मुंबई : सरकारी महिला कर्मचारियों के लिए खुशखबरी, सुनेत्रा पवार ने किया ‘कम अर्ली–गो अर्ली’ योजना का ऐलान</title>
                                    <description><![CDATA[<p>मुंबई महानगर क्षेत्र की सरकारी महिला कर्मचारियों के लिए ‘कम अर्ली–गो अर्ली' सुविधा लागू करने की महत्वपूर्ण घोषणा उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा अजित पवार ने आज विधान परिषद में की. उन्होंने कहा कि राज्य सरकार महिलाओं के सर्वांगीण विकास के लिए प्रतिबद्ध है और महिलाओं को सम्मान, उचित अवसर और सुरक्षा देने वाला समाज बनाने के संकल्प को और मजबूत करने की जरूरत है. यह घोषणा अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर विधान परिषद में हुए विशेष चर्चा प्रस्ताव का जवाब देते हुए की गई. </p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/48344/good-news-for-mumbai-government-women-employees-sunetra-pawar-announced"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-03/download---2026-03-11t111302.845.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>मुंबई : </strong>मुंबई महानगर क्षेत्र की सरकारी महिला कर्मचारियों के लिए ‘कम अर्ली–गो अर्ली' सुविधा लागू करने की महत्वपूर्ण घोषणा उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा अजित पवार ने आज विधान परिषद में की. उन्होंने कहा कि राज्य सरकार महिलाओं के सर्वांगीण विकास के लिए प्रतिबद्ध है और महिलाओं को सम्मान, उचित अवसर और सुरक्षा देने वाला समाज बनाने के संकल्प को और मजबूत करने की जरूरत है. यह घोषणा अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर विधान परिषद में हुए विशेष चर्चा प्रस्ताव का जवाब देते हुए की गई. </p>
<p> </p>
<p><strong>‘कम अर्ली–गो अर्ली' से भीड़ में राहत</strong><br />इस निर्णय के तहत मुंबई महानगर क्षेत्र की महिला कर्मचारियों को सुबह 9:15 से 9:45 बजे के बीच कार्यालय में पहले आकर जितने मिनट पहले काम शुरू करेंगी, उतने ही मिनट शाम को कार्यालय से पहले निकलने की अनुमति दी जाएगी अर्थात लगभग 30 मिनट की छूट मिलेगी. इससे भीड़भाड़ के समय महिलाओं को होने वाली परेशानी कम होगी और उन्हें राहत मिलेगी. विधान परिषद में हुई चर्चा के दौरान कई सदस्यों ने महिला सशक्तीकरण को लेकर महत्वपूर्ण सुझाव दिए, जिनके लिए उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार ने सभी का आभार व्यक्त किया. उन्होंने आश्वासन दिया कि सरकार इन सुझावों पर सकारात्मक विचार कर आवश्यक कदम उठाएगी.</p>
<p><strong>सुरक्षा और पुनर्वास में राज्य की उपलब्धियां</strong><br />महिलाओं की सुरक्षा पर बोलते हुए उन्होंने बताया कि राज्य में ‘ऑपरेशन मुस्कान' के तहत जुलाई 2015 से फरवरी 2026 तक 14 अभियानों में 42,594 बच्चों को खोजा गया है. इसके अलावा ‘ऑपरेशन खोज' के तहत 5,066 महिलाओं और 2,771 बच्चों को भी ढूंढा गया है. राज्य के सभी जिलों में ‘मिसिंग सेल' कार्यरत हैं और महिलाओं की समस्याओं के समाधान के लिए 51 ‘भरोसा सेल' शुरू किए गए हैं. महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण के लिए राज्य सरकार ‘लाडकी बहिण', ‘नमो महिला सशक्तिकरण', ‘लेक लाडकी', ‘अन्नपूर्णा' और ‘लखपति दीदी' जैसी योजनाएं प्रभावी ढंग से चला रही है. स्वयं सहायता समूहों के उत्पादों को बाजार उपलब्ध कराने के लिए उमेद मॉल, उमेद मार्ट और महालक्ष्मी सरस जैसे उपक्रम चलाए जा रहे हैं तथा इन उत्पादों को ऑनलाइन प्लेटफ़ॉर्म पर भी बिक्री के लिए उपलब्ध कराया गया है. </p>
<p><strong>आंगनवाड़ी, तकनीक और मातृत्व अवकाश सुधार</strong><br />आंगनवाड़ी सेविकाओं और सहायिकाओं के मानदेय व बुनियादी सुविधाओं के संबंध में सरकार ने सकारात्मक रुख अपनाया है. राज्य के 17,254 आंगनवाड़ी केंद्रों में पेयजल की सुविधा उपलब्ध कराई गई है. महिलाओं की सुरक्षा के लिए आधुनिक तकनीक का उपयोग बढ़ाया जा रहा है. छत्रपति शिवाजी टर्मिनस, चर्चगेट रेलवे स्टेशन और बोरीवली स्टेशन पर साइबर अपराध रोकने के लिए विशेष तंत्र स्थापित किया गया है. सरकारी महिला कर्मचारियों के लिए 180 दिनों का मातृत्व अवकाश मंजूर है. इसके अतिरिक्त, प्रसूति अवकाश के बाद आवश्यकता पड़ने पर अधिकतम एक वर्ष तक बिना मेडिकल प्रमाणपत्र के आधे वेतन पर अवकाश लेने की अनुमति दी गई है. </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Maharashtra</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 11 Mar 2026 11:13:58 +0530</pubDate>
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