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                <title>issue - Rokthok Lekhani News </title>
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                            <item>
                <title>मुंबई : मनसे अध्यक्ष राज ठाकरे ने बिना नाम लिए अमित शाह पर बोला हमला, पांच पॉइंट में समझिए मुद्दे</title>
                                    <description><![CDATA[<p>नीट पेपर लीक के खिलाफ दिल्ली से मुंबई तक शुरू युवाओं के आंदोलन के जरिए विपक्षी पार्टियां सरकार को निशाना बना रही हैं। महाराष्ट्र निर्माण सेना ( मनसे ) अध्यक्ष राज ठाकरे ने दिल्ली में स्टूडेंट्स पर लाठीचार्ज के लिए अप्रत्यक्ष तौर पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को जवाबदेही लेने को कहा है।</p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/50937/mumbai-mns-president-raj-thackeray-attacks-amit-shah-without-taking"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-07/20250228151l.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>मुंबई: </strong>नीट पेपर लीक के खिलाफ दिल्ली से मुंबई तक शुरू युवाओं के आंदोलन के जरिए विपक्षी पार्टियां सरकार को निशाना बना रही हैं। महाराष्ट्र निर्माण सेना ( मनसे ) अध्यक्ष राज ठाकरे ने दिल्ली में स्टूडेंट्स पर लाठीचार्ज के लिए अप्रत्यक्ष तौर पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को जवाबदेही लेने को कहा है।</p>
<p> </p>
<p><strong>1- सोशल मीडिया के जरिए सवाल:</strong><br />राज ठाकरे ने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि यदि विद्यार्थियों को पीटने वाले शिक्षक दंडित हो सकते हैं तो प्रदर्शन कर रहे विद्यार्थियों पर लाठी चलाने वाले पुलिसकर्मियों और इसका आदेश देने वालों की जवाबदेही क्यों नहीं तय होती ? मुंबई में भी बड़े पैमाने पर युवा प्रदर्शन कर रहे हैं, इसमें राज ठाकरे से लेकर अमित और आदित्य ठाकरे भाग ले रहे हैं। </p>
<p><strong>2 - संयुक्त राष्ट्र और दुनिया के देशों का हवाला:</strong><br />राज ठाकरे ने अपने पोस्ट में कहा कि संयुक्त राष्ट्र चार्टर जिन्हें एमनेस्टी इंटरनेशनल भी मान्यता देता है, स्पष्ट कहते हैं कि जब भी बल प्रयोग किया जाए वह संविधान और कानून के दायरे में आवश्यक तथा परिस्थितियों के अनुपात में होना चाहिए। साथ ही उसके लिए जवाबदेही भी तय होनी चाहिए। नॉर्वे, जर्मनी, स्वीडन, फिनलैंड, डेनमार्क और न्यूजीलैंड जैसे देशों में पुलिस द्वारा बल प्रयोग की हर घटना की गंभीर जांच होती है। जांच केवल बल प्रयोग करने वाले पुलिसकर्मियों की नहीं, बल्कि आदेश देने वाले अधिकारियों की भूमिका की भी होती है। भारत में भी ऐसी व्यवस्था होनी चाहिए।</p>
<p><strong>3 - किसके आदेश पर हुई लाठीचार्ज :</strong><br />राज ठाकरे ने कहा कि दिल्ली में पुलिस ने छात्रों पर अंधाधुंध लाठीचार्ज किया। भीड़ को तितर-बितर करने के लिए कुछ परिस्थितियों में सीमित बल प्रयोग को समझा जा सकता है, लेकिन यहां जिस तरह की हिंसा दिखाई दे रही है, वह प्रतिशोध जैसी प्रतीत हुई। सामने आए वीडियो में केवल प्रदर्शनकारी छात्र ही नहीं, बल्कि वहां मौजूद आम लोग भी बेरहमी से पीटे जाते और रौंदे जाते दिखाई दे रहे हैं। पुलिस ऐसी कार्रवाई बिना ऊपर से मिले स्पष्ट आदेश के नहीं कर सकती।</p>
<p><strong>4 - क्या आदेश देने वाले संविधान से ऊपर:</strong><br />ऐसे में सवाल उठता है कि उन्हें पीटने का औचित्य क्या था? और पुलिस को ऐसा करने का अधिकार किसने दिया? जिस तरह शिक्षकों को छात्रों को पीटने की अनुमति नहीं है, उसी तरह पुलिस को भी नहीं होनी चाहिए। फिर ऐसा क्यों हुआ ? चाहे महाराष्ट्र पुलिस हो या देश की कोई अन्य पुलिस, कई बार पुलिसकर्मियों के पास आदेशों का पालन करने के अलावा कोई विकल्प नहीं होता। इसलिए पूरी जिम्मेदारी केवल उन पर नहीं डाली जा सकती। असली सवाल यह है कि इतनी बेरहमी से छात्रों को पीटने के आदेश देने का अधिकार किसने दिया? क्या आदेश देने वाले खुद को संविधान से ऊपर मानते हैं?</p>
<p><strong>5 -सुप्रीम कोर्ट पर भी सवाल :</strong><br />अब सवाल यह है कि यह सुनिश्चित कौन करेगा? एक ओर देश के मुख्य न्यायाधीश कथित रूप से इन युवाओं को "कॉकरोच" कहकर संबोधित करते हैं, वहीं दूसरी ओर सर्वोच्च न्यायालय यह कहता है कि उसके पास पिटाई के वीडियो देखने का समय नहीं है। यदि ऐसा है, तो फिर उसके पास समय किस बात के लिए है? आज नौजवान इसलिए सड़कों पर उतरने को मजबूर हैं क्योंकि उन्हें मौजूदा सरकार से कोई उम्मीद नहीं बची है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Mumbai</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 25 Jul 2026 12:39:44 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Online Desk]]></dc:creator>
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                <title>मुंबई :  महिला आरक्षण मुद्दे पर सियासी बयानबाजी तेज</title>
                                    <description><![CDATA[<p>महिला आरक्षण विधेयक का विरोध करने वाली एनसीपी की सांसद सुप्रिया सुले और कांग्रेस सांसद प्रणिती शिंदे पर शिवसेना नेता नीलम गोऱ्हे ने हमला बोला है। उन्होंने कहा कि इन दोनों का महिला आरक्षण केवल दिखावटी है। पार्टी कार्यालय में आयोजित पत्रकार परिषद को संबोधित करते हुए गोऱ्हे ने कहा कि इन दोनों नेताओं को राजनीति में स्थान परिवारवाद की विरासत से मिला है।</p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/49431/mumbai-political-rhetoric-intensifies-on-womens-reservation-issue"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-04/congress-worker-protesting.webp" alt=""></a><br /><p><strong>मुंबई : </strong>महिला आरक्षण विधेयक का विरोध करने वाली एनसीपी की सांसद सुप्रिया सुले और कांग्रेस सांसद प्रणिती शिंदे पर शिवसेना नेता नीलम गोऱ्हे ने हमला बोला है। उन्होंने कहा कि इन दोनों का महिला आरक्षण केवल दिखावटी है। पार्टी कार्यालय में आयोजित पत्रकार परिषद को संबोधित करते हुए गोऱ्हे ने कहा कि इन दोनों नेताओं को राजनीति में स्थान परिवारवाद की विरासत से मिला है। महिला आरक्षण का लाभ सामान्य महिलाओं को मिलने वाला था, लेकिन सुले और शिंदे ने जो भूमिका अपनाई है, वह आरक्षण विरोधी है। नीलम गोऱ्हे ने नारी शक्ति वंदन विधेयक का विरोध करने वाले कांग्रेस सांसदों की भी आलोचना की।</p>
<p> </p>
<p>उन्होंने कहा कि शाहबानो प्रकरण में मुस्लिम महिलाओं के अधिकारों पर राष्ट्रीय स्तर पर व्यापक चर्चा हुई थी। राजीव गांधी ने मुस्लिम महिला संरक्षण विधेयक पेश किया था, लेकिन यह सुनिश्चित किया गया कि तलाकशुदा मुस्लिम महिलाओं को भरण-पोषण का अधिकार न मिले। उन्होंने आरोप लगाया कि राजीव गांधी ने मुस्लिम महिलाओं के न्यायिक अधिकारों पर स्थायी आघात किया। </p>
<p>नीलम गोऱ्हे ने आगे कहा कि वर्ष 2018 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कानून में संशोधन कर तलाक पीड़ित मुस्लिम महिलाओं को भरण-पोषण का अधिकार दिलाने का काम किया। उन्होंने कांग्रेस की एक महिला सांसद के उस बयान का भी खंडन किया जिसमें कहा गया था कि महिला आरक्षण की आवश्यकता नहीं है क्योंकि राजीव गांधी ने 1986-87 में ही आरक्षण दे दिया था। उन्होंने इसे असत्य बताया और सवाल किया कि यदि आरक्षण पहले ही दिया गया था, तो फिर 1996 में संसद में महिला आरक्षण विधेयक लाने की आवश्यकता क्यों पड़ी। राजीव गांधी ने 1986-87 में कोई महिला आरक्षण विधेयक नहीं लाया था। महिला आरक्षण का पहला विधेयक 1996 में लाया गया।</p>
<p>यदि कांग्रेस को महिला आरक्षण की आवश्यकता नहीं है तो फिर नगरपालिकाओं में आरक्षित सीटों पर महिला उम्मीदवार क्यों उतारती है। यदि महिला आरक्षण विधेयक लागू होता है, तो इसका बड़ा श्रेय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और एनडीए सरकार को मिलेगा। इसी वजह से कांग्रेस ने निर्वाचन क्षेत्र पुनर्गठन के साथ-साथ महिला आरक्षण विधेयक का भी विरोध किया, ताकि सामान्य महिलाएं राजनीतिक रूप से सशक्त न हो सकें। वैश्विक आंकड़ों का हवाला देते हुए गोऱ्हे ने कहा कि दुनिया की संसदों में महिलाओं का प्रतिनिधित्व 27.5 प्रतिशत है, जबकि भारत में यह 10 प्रतिशत से भी कम है। संयुक्त राष्ट्र संघ की एक रिपोर्ट के अनुसार, वर्तमान गति से अवसरों में समानता वर्ष 2063 तक ही संभव होगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Mumbai</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 23 Apr 2026 19:57:25 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Online Desk]]></dc:creator>
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                <title>मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे पर जाम के मुद्दे पर चर्चा; मुख्यमंत्री फडणवीस ने जवाब दिया</title>
                                    <description><![CDATA[<p>पुणे-मुंबई एक्सप्रेसवे पर अडोशी टनल के पास ज्वलनशील केमिकल गैस ले जा रहा एक टैंकर पलट गया। टैंकर से गैस लीक होने की वजह से हाईवे 30 घंटे तक बंद रहा। इस वजह से पुराने मुंबई-पुणे हाईवे के साथ एक्सप्रेसवे भी प्रभावित हुआ, जिससे 25 किलोमीटर तक गाड़ियों की कतारें लग गईं। इस बारे में विधानसभा में सवाल उठाया गया था। मंत्री प्रताप सरनाइक और मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने जवाब दिया। मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे पर हुई घटना और उसके बाद लगे ट्रैफिक जाम पर हम सभी ने अपनी राय रखी।</p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/48086/discussion-on-the-issue-of-jam-on-mumbai-pune-expressway-chief"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-03/download---2026-03-01t121838.006.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>मुंबई : </strong>पुणे-मुंबई एक्सप्रेसवे पर अडोशी टनल के पास ज्वलनशील केमिकल गैस ले जा रहा एक टैंकर पलट गया। टैंकर से गैस लीक होने की वजह से हाईवे 30 घंटे तक बंद रहा। इस वजह से पुराने मुंबई-पुणे हाईवे के साथ एक्सप्रेसवे भी प्रभावित हुआ, जिससे 25 किलोमीटर तक गाड़ियों की कतारें लग गईं। इस बारे में विधानसभा में सवाल उठाया गया था। मंत्री प्रताप सरनाइक और मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने जवाब दिया। मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे पर हुई घटना और उसके बाद लगे ट्रैफिक जाम पर हम सभी ने अपनी राय रखी। मेरा सवाल है कि क्या भविष्य में भी ऐसी घटनाएं हो सकती हैं? ऐसी कंपनियां अलग-अलग शहरों से काम करती हैं। ऐसे हादसे के बाद, क्या हमारा एमएसआयडीसी और होम डिपार्टमेंट हैज़मैट और फायर एक्सटिंग्विशर तैयार करेगा और क्या उपाय किए जाएंगे, यह सवाल उद्धव सेना के एक सदस्य आदित्य ठाकरे ने पूछा। इस पर बोलते हुए प्रताप सरनाइक ने कहा कि यह एक सच्चाई है और संबंधित डिपार्टमेंट को ऐसा सिस्टम बनाने के निर्देश दिए गए हैं। </p>
<p> </p>
<p>इसके बाद मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने इस बारे में और जानकारी दी। उन्होंने कहा, "इस घटना के बाद सबसे ज़रूरी बात यह है कि हमारे पास जो कंपनियाँ हैं जो इस तरह से ट्रांसपोर्ट करती हैं, उनके पास भी ऐसी टेक्नोलॉजी नहीं है कि ऐसी घटना होने पर क्या करना है। हमने इस घटना से यह सबक सीखा है। हमारे पास ऐसी दुर्घटना के बाद क्या करना है, इसके लिए कोई एसओपी नहीं है। न तो उन कंपनियों के पास है और न ही हमारे पास। इसलिए, हमने कंपनियों को आदेश दिए हैं और बताया है," फडणवीस ने कहा।</p>
<p>इस बीच, इस तरह का ट्रांसपोर्ट करने वाली ज़्यादातर कंपनियाँ केंद्र सरकार की हैं। इन कंपनियों के पास ऐसी दुर्घटना होने पर क्या करना है, इसके लिए समाधान और उपकरण होने चाहिए। हमने उन्हें यह तय करने का आदेश दिया है कि अगर कोई टैंकर लीक होता है तो क्या करना है, उसे तुरंत कैसे छोड़ना है, ऐसी घटना होने पर एसओपी क्या होना चाहिए," उन्होंने कहा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Mumbai</category>
                                    

                <link>https://www.rokthoklekhani.com/article/48086/discussion-on-the-issue-of-jam-on-mumbai-pune-expressway-chief</link>
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                <pubDate>Sun, 01 Mar 2026 12:19:39 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Online Desk]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>मुंबई : हाई कोर्ट ने गायब पेड़ों के मामले में राज्य सरकार को नोटिस जारी किया</title>
                                    <description><![CDATA[<p>नगर निगम ने शहर में अलग-अलग डेवलपमेंट प्रोजेक्ट्स के लिए 6,300 से ज़्यादा पेड़ काटने की इजाज़त दी है; हालांकि, इसके बदले में संबंधित लोगों ने 89,000 से ज़्यादा नए पेड़ नहीं लगाए हैं। इस वजह से शहर की हरियाली 31 प्रतिशत से घटकर सिर्फ़ 12 प्रतिशत रह गई है। इसके अलावा, शहर में 2011 के बाद से पेड़ों की गिनती नहीं हुई है।</p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/47492/mumbai-high-court-issues-notice-to-state-government-in-case"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-02/download---2026-02-05t124129.865.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>मुंबई :</strong> नगर निगम ने शहर में अलग-अलग डेवलपमेंट प्रोजेक्ट्स के लिए 6,300 से ज़्यादा पेड़ काटने की इजाज़त दी है; हालांकि, इसके बदले में संबंधित लोगों ने 89,000 से ज़्यादा नए पेड़ नहीं लगाए हैं। इस वजह से शहर की हरियाली 31 प्रतिशत से घटकर सिर्फ़ 12 प्रतिशत रह गई है। इसके अलावा, शहर में 2011 के बाद से पेड़ों की गिनती नहीं हुई है।</p>
<p> </p>
<p>मुंबई हाई कोर्ट की नागपुर बेंच ने इस जानकारी पर ध्यान देते हुए मंगलवार को राज्य सरकार और नगर आयुक्त को नोटिस जारी किया और उन्हें चार हफ़्ते के अंदर जवाब देने का निर्देश दिया। इस संबंध में एक सामाजिक संगठन, स्वच्छ एसोसिएशन ने जनहित याचिका दायर की है। इस पर जस्टिस अनिल किलोर और राज वाकोडे की बेंच के सामने सुनवाई हुई।</p>
<p>नगर निगम की ट्री अथॉरिटी गैर-कानूनी तरीके से काम कर रही है। अथॉरिटी में कोई एक्सपर्ट सदस्य नहीं हैं। इसलिए, पेड़ काटने के लिए मशीनी तरीके से परमिट दिए जा रहे हैं। डेवलपमेंट प्रोजेक्ट्स को प्राथमिकता देते हुए, बदले में पेड़ लगाने की ड्यूटी को नज़रअंदाज़ किया जा रहा है।</p>
<p>याचिकाकर्ताओं का कहना है कि महाराष्ट्र वृक्ष संरक्षण और परिरक्षण अधिनियम को केले की टोकरी की तरह दिखाया जा रहा है। याचिकाकर्ताओं की ओर से एडवोकेट कृष्णा अग्रवाल ने बहस की।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Mumbai</category>
                                    

                <link>https://www.rokthoklekhani.com/article/47492/mumbai-high-court-issues-notice-to-state-government-in-case</link>
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                <pubDate>Thu, 05 Feb 2026 12:42:20 +0530</pubDate>
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