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                <title>costlier - Rokthok Lekhani News </title>
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                <title>मुंबई : मनोरंजन महंगा करने की तैयारी... रंगभूमि कर में भारी बढ़ोतरी का प्रस्ताव, मल्टीप्लेक्स पर 400 रुपए तक कर</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;">मनपा के अनुसार, वर्ष 2010-11 के बाद से रंगभूमि कर की दरों में कोई संशोधन नहीं हुआ है। वर्ष 2015-16 में भी कर बढ़ाने का प्रस्ताव राज्य सरकार के नगर विकास विभाग को भेजा गया था, लेकिन उस पर निर्णय नहीं हुआ। मनपा के अनुसार, मल्टीप्लेक्स में टिकट की कीमतें सिंगल स्क्रीन सिनेमाघरों की तुलना में काफी अधिक हैं। ऐसे में दोनों के लिए समान कर दर उचित नहीं है। प्रस्ताव मंजूर होने पर बढ़े हुए कर का असर सिनेमा और नाटक के टिकटों की कीमतों पर पड़ने की संभावना है।</p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/51942/mumbai-preparation-to-make-entertainment-expensive-proposal-for-huge-increase"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-09/898dsfd.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>मुंबई :</strong> मुंबई महानगरपालिका ने सिनेमा, नाटक, सर्कस और अन्य मनोरंजन कार्यक्रमों पर लगने वाले रंगभूमि कर में बढ़ोतरी का प्रस्ताव तैयार किया है। नई दरें वित्तीय वर्ष 2027-28 से लागू करने की तैयारी है। प्रस्ताव फिलहाल अंतिम मंजूरी के लिए मनपा आयुक्त के पास है। प्रस्ताव के अनुसार, मल्टीप्लेक्स पर प्रति शो 400 रुपए रंगभूमि कर लगाने का प्रस्ताव है।</p>
<p style="text-align:justify;">वातानुकूलित सिंगल स्क्रीन सिनेमा हॉल में कर 60 से बढ़ाकर 200 रुपये, जबकि गैर-वातानुकूलित हॉल में 45 से बढ़ाकर 90 रुपये किया जाएगा। इसी तरह नाटक और तमाशा पर कर 25 से बढ़ाकर 100 रुपये प्रति शो, अन्य मनोरंजन कार्यक्रमों पर 30 से बढ़ाकर 75 रुपये प्रति शो और सर्कस व आनंद मेले पर 50 से बढ़ाकर 100 रुपये प्रतिदिन करने का प्रस्ताव है।<br /><br />मनपा के अनुसार, वर्ष 2010-11 के बाद से रंगभूमि कर की दरों में कोई संशोधन नहीं हुआ है। वर्ष 2015-16 में भी कर बढ़ाने का प्रस्ताव राज्य सरकार के नगर विकास विभाग को भेजा गया था, लेकिन उस पर निर्णय नहीं हुआ। मनपा के अनुसार, मल्टीप्लेक्स में टिकट की कीमतें सिंगल स्क्रीन सिनेमाघरों की तुलना में काफी अधिक हैं। ऐसे में दोनों के लिए समान कर दर उचित नहीं है। प्रस्ताव मंजूर होने पर बढ़े हुए कर का असर सिनेमा और नाटक के टिकटों की कीमतों पर पड़ने की संभावना है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Mumbai</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 23 Sep 2026 12:55:34 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Online Desk]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>मुंबई : 115 रुपये महंगी हुई एलपीजी गैस, घरेलू सिलेंडर के दाम 60 रुपये बढ़े, जानें दिल्ली-मुंबई में कीम</title>
                                    <description><![CDATA[<p>मिडिल ईस्ट में ईरान और इजरायल के बीच चल रहे युद्ध का असर देशभर में देखने मिल रहा है. इस बीच ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद कर दिया. जिसके बाद आयात होने वाले तरल पदार्थों की कीमतों में बढ़ोतरी हुई है. इस बीच भारत में एलपीजी गैस के सिलेंडर के दाम भी बढ़ गए हैं. भारत के कई राज्यों में एलपीजी सिलेंडर अब महंगा हो गया है. भारत में 14.2 किलोग्राम के घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमत में 60 रुपये की बढ़ोतरी की गई है. दिल्ली में 14.2 किलोग्राम के घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमत 853 रुपये से बढ़कर 913 रुपये हो गई है. सूत्रों के अनुसार, नई दर 7 मार्च से प्रभावी होगी. </p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/48247/mumbai-lpg-gas-became-costlier-by-rs-115-domestic-cylinder"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-03/download---2026-03-07t121640.531.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>मुंबई : </strong>मिडिल ईस्ट में ईरान और इजरायल के बीच चल रहे युद्ध का असर देशभर में देखने मिल रहा है. इस बीच ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद कर दिया. जिसके बाद आयात होने वाले तरल पदार्थों की कीमतों में बढ़ोतरी हुई है. इस बीच भारत में एलपीजी गैस के सिलेंडर के दाम भी बढ़ गए हैं. भारत के कई राज्यों में एलपीजी सिलेंडर अब महंगा हो गया है. भारत में 14.2 किलोग्राम के घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमत में 60 रुपये की बढ़ोतरी की गई है. दिल्ली में 14.2 किलोग्राम के घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमत 853 रुपये से बढ़कर 913 रुपये हो गई है. सूत्रों के अनुसार, नई दर 7 मार्च से प्रभावी होगी. </p>
<p> </p>
<p><strong>इतने रुपये का मिलेगा दिल्ली में सिलेंडर</strong><br />दिल्ली में 19 किलो वाले कमर्शियल एलपीजी गैस सिलेंडर की कीमत में भी 115 रुपये की बढ़ोतरी की गई है, जो आज 7 मार्च से प्रभावी हो गई है. दिल्ली में अब 19 किलो वाले कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की कीमत 1883 रुपये हो गई है. सिलेंडर की कीमतों में यह नया बदलाव अप्रैल 2025 की कीमतों के बाद हुआ है. <br />वहीं देश की आर्थिक राजधानी मुंबई में कमर्शियल एलपीजी गैस सिलेंडर 1835 रुपये मिलेगा. सिलेंडर की कीमतों में उछाल के बाद लोगों में हड़कंप मच गया है. अपूर्ति को लेकर इतने बड़े बदलाव से आम जनता की जेब पर इसका सीधा असर देखने को मिल रहा है.  </p>
<p><strong>इस वजह से हुई गैस के दामों में बढ़ोतरी</strong><br />पश्चिम एशिया में जारी सैन्य तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य के रास्ते आयात होने वाली तरल प्राकृतिक गैस (एलएनजी) की आपूर्ति प्रभावित होने के बाद घरेलू सिलेंडर के दामों में बढ़ोतरी हो गई है. होर्मुज के जरिये एलएनजी की आपूर्ति 28 फरवरी से ही रुक गई है.  <br />इससे लगभग 20 प्रतिशत वैश्विक एलएनजी आपूर्ति अस्थायी रूप से प्रभावित हुई है और एशियाई आयात बाजारों में चिंता बढ़ गई है. भारत की एलएनजी आपूर्ति का एक बड़ा हिस्सा कतर और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) से होर्मुज जलडमरूमध्य के रास्ते ही आता है. </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>National</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 07 Mar 2026 12:17:53 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Online Desk]]></dc:creator>
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                <title>मुंबई : कांग्रेस का आरोप, राज्य में बिजली 16% महंगी होगी</title>
                                    <description><![CDATA[<p>राज्य में बिजली ग्राहकों को सस्ती मिले, इसका ऐलान मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने किया था। कहा गया था कि 5 साल में बिजली के रेट कुल 50 परसेंट कम किए जाएंगे और पहले साल में 10 परसेंट की कमी होगी, लेकिन असलियत इसके उलट है। बड़ा दावा यह है कि बिजली के रेट कम नहीं होंगे, बल्कि 16 परसेंट महंगे हो जाएंगे। कांग्रेस के सीनियर प्रवक्ता अतुल लोंढे ने यह बात कही है। </p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/47669/mumbai-congress-alleges-electricity-will-be-16-more-expensive-in"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-02/download---2026-02-12t110014.915.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>मुंबई : </strong>राज्य में बिजली ग्राहकों को सस्ती मिले, इसका ऐलान मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने किया था। कहा गया था कि 5 साल में बिजली के रेट कुल 50 परसेंट कम किए जाएंगे और पहले साल में 10 परसेंट की कमी होगी, लेकिन असलियत इसके उलट है। बड़ा दावा यह है कि बिजली के रेट कम नहीं होंगे, बल्कि 16 परसेंट महंगे हो जाएंगे। कांग्रेस के सीनियर प्रवक्ता अतुल लोंढे ने यह बात कही है। </p>
<p> </p>
<p>एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में बोलते हुए अतुल लोंढे ने कहा कि ऐलान किया गया था कि पांच साल में बिजली के रेट कम किए जाएंगे और किसानों का कर्ज माफ किया जाएगा। लेकिन महाराष्ट्र इलेक्ट्रिसिटी रेगुलेटरी कमीशन ने बिजली के रेट में 20 से 40 परसेंट बढ़ोतरी का प्रस्ताव महाराष्ट्र इलेक्ट्रिसिटी रेगुलेटरी कमीशन को दिया है।</p>
<p>इस बारे में नागपुर में एक पब्लिक हियरिंग हुई थी। इससे राज्य के आम बिजली ग्राहकों और छोटे, मीडियम और माइक्रो बिजनेस की कमर टूट जाएगी। पहले से ही महंगाई और बेरोजगारी से जूझ रहे लोगों पर बिजली के रेट में बढ़ोतरी का बोझ डाल दिया गया है। </p>
<p>पड़ोसी राज्यों गुजरात, कर्नाटक और तेलंगाना में बिजली के रेट महाराष्ट्र से कम हैं। गुजरात में घरेलू बिजली का रेट 3.0 से 5.2 रुपये प्रति यूनिट, कर्नाटक में 3.7 से 7.3 रुपये प्रति यूनिट, तेलंगाना में 2 से 10 रुपये प्रति यूनिट है, जबकि महाराष्ट्र में यही रेट 4.4 से 12.8 रुपये प्रति यूनिट है। जब सभी राज्यों में बिजली बनाने का खर्च एक जैसा है, तो महाराष्ट्र में बिजली महंगी क्यों है?, अतुल लोंधे ने यह सवाल उठाया है। <br /> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Mumbai</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 12 Feb 2026 11:01:09 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Online Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>दिल्ली और मुंबई एयरपोर्ट्स से सफर करना अब यात्रियों के लिए पड़ सकता है महंगा ; 50,000 करोड़ का नुकसान</title>
                                    <description><![CDATA[<p>दिल्ली और मुंबई एयरपोर्ट्स से सफर करना अब यात्रियों के लिए महंगा पड़ सकता है। इन एयरपोर्ट्स पर यूजर चार्जेस में भारी बढ़ोतरी हो सकती है। यह बढ़ोतरी 22 गुना तक हो सकती है। टेलीकॉम डिस्प्यूट्स सेटलमेंट एंड अपीलेट ट्रिब्यूनल के एक आदेश के बाद यह नौबत आई है। इस आदेश ने 2009 से 2014 तक के पांच साल के लिए टैरिफ यानी यात्रियों से वसूले जाने वाले शुल्कों की गणना का तरीका बदल दिया है। </p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/45890/travelling-from-delhi-and-mumbai-airports-may-now-be-costlier"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2025-12/download---2025-12-01t113501.161.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>नई दिल्ली: </strong>दिल्ली और मुंबई एयरपोर्ट्स से सफर करना अब यात्रियों के लिए महंगा पड़ सकता है। इन एयरपोर्ट्स पर यूजर चार्जेस में भारी बढ़ोतरी हो सकती है। यह बढ़ोतरी 22 गुना तक हो सकती है। टेलीकॉम डिस्प्यूट्स सेटलमेंट एंड अपीलेट ट्रिब्यूनल के एक आदेश के बाद यह नौबत आई है। इस आदेश ने 2009 से 2014 तक के पांच साल के लिए टैरिफ यानी यात्रियों से वसूले जाने वाले शुल्कों की गणना का तरीका बदल दिया है। </p>
<p> </p>
<p>इस नए तरीके से पता चला है कि इस दौरान एयरपोर्ट्स को 50,000 करोड़ रुपये से ज्यादा का नुकसान हुआ है। इस नुकसान की भरपाई यात्रियों से ली जाने वाली फीस, लैंडिंग और पार्किंग चार्जेस के जरिए की जाएगी। इससे हवाई टिकटों के दाम बढ़ जाएंगे, जो यात्रियों की संख्या पर असर डाल सकता है। इस फैसले के खिलाफ एयरपोर्ट्स इकनॉमिक रेगुलेटरी अथॉरिटी, घरेलू एयरलाइंस और लुफ्थांसा, एयर फ्रांस और गल्फ एयर जैसी विदेशी एयरलाइंस ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है। इसकी सुनवाई बुधवार को होगी।</p>
<p><strong>कितनी बढ़ सकती है फीस?</strong><br />सूत्रों का कहना है कि अगर यह आदेश लागू हुआ तो दिल्ली एयरपोर्ट पर घरेलू यात्रियों से लिया जाने वाला यूजर डेवलपमेंट फीस (UDF) 129 रुपये से बढ़कर 1,261 रुपये हो सकता है। वहीं, अंतरराष्ट्रीय यात्रियों के लिए यह 650 रुपये से बढ़कर 6,356 रुपये हो सकता है। मुंबई एयरपोर्ट पर भी घरेलू यात्रियों के लिए यह फीस 175 रुपये से बढ़कर 3,856 रुपये हो सकती है। अंतरराष्ट्रीय यात्रियों को मुंबई में यह 615 रुपये के बजाय 13,495 रुपये तक देने पड़ सकते हैं। </p>
<p>TDSAT एक अपीलेट ट्रिब्यूनल है जो टेलीकॉम और एयरपोर्ट से जुड़े आर्थिक नियमों के मामलों में विवादों और अपीलों को सुनता है। सरकारी अधिकारी इस बात को लेकर चिंतित हैं कि चार्जेज में इतनी बड़ी बढ़ोतरी से यात्रियों की संख्या पर बुरा असर पड़ेगा। एक सरकारी अधिकारी ने कहा कि एयरपोर्ट और एयरलाइंस के बीच चल रहे कानूनी झगड़ों से यात्रियों को नुकसान नहीं होना चाहिए। </p>
<p><strong>क्या है मामला?</strong><br />उन्होंने कहा कि यह यात्रियों के लिए एक बड़ा झटका होगा क्योंकि रातोंरात टिकट की कीमतों में भारी बढ़ोतरी होगी। एयरलाइंस के पास इन चार्जेज को यात्रियों पर डालने के अलावा कोई और विकल्प नहीं होगा। यह विवाद लगभग दो दशक पहले शुरू हुआ था, जब 2006 में एयरपोर्ट्स के निजीकरण का पहला दौर चला था। AERA हर पांच साल के लिए एयरपोर्ट्स के चार्जेज तय करता है। यह तय करते समय ऑपरेटरों के निवेश और कमाई को ध्यान में रखा जाता है। <br />लेकिन यह रेगुलेटर अप्रैल 2009 में बना था। यानी एयरपोर्ट्स की ओनरशिप एयरपोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया से DIAL और MIAL को सौंपे जाने के लगभग तीन साल बाद इसका गठन हुआ था। DIAL, GMR ग्रुप का हिस्सा है, जबकि MIAL उस समय GVK के पास था। MIAL अब Adani Group चला रहा है। जब एयरपोर्ट्स का मालिकाना हक बदला, तब एसेट्स और इनवेस्टमेंट का डेटा भरोसेमंद नहीं था। इसलिए, 2006 में सरकार और दो निजी ऑपरेटरों के बीच एक समझौता हुआ था, जिसमें 'हाइपोथेटिकल रेगुलेटरी एसेट बेस' (HRAB) का प्रावधान था।</p>
<p><strong>किस बात की है लड़ाई?</strong><br />इससे 1 अप्रैल 2008 से 31 मार्च 2009 तक की अवधि के लिए संपत्ति का मूल्य तय किया गया। HRAB, संपत्ति का एक काल्पनिक मूल्य है जिसका उपयोग रेगुलेटर टैरिफ या शुल्क तय करने के लिए करता है, जब वास्तविक राशि उपलब्ध नहीं होती है। FY09-14 के लिए टैरिफ तय करते समय, AERA ने केवल 'एरोनॉटिकल एसेट्स' के मूल्य को ही ध्यान में रखा था। एरोनॉटिकल एसेट्स वे इन्फ्रास्ट्रक्चर और सुविधाएं हैं जो सीधे उड़ान संचालन और यात्रियों के प्रबंधन के लिए जरूरी होती हैं, जैसे रनवे, टर्मिनल और चेक-इन काउंटर। </p>
<p>लेकिन, DIAL और MIAL ने TDSAT में याचिका दायर की। उन्होंने कहा कि AERA को 'नॉन-एरोनॉटिकल एसेट्स' के मूल्य को भी ध्यान में रखना चाहिए। इन संपत्तियों में ड्यूटी फ्री दुकानें, कार पार्किंग और लाउंज जैसी चीजें शामिल हैं। AERA के तरीके को 2018 में ट्रिब्यूनल और 2022 में सुप्रीम कोर्ट ने बरकरार रखा था। इसके बाद दोनों एयरपोर्ट ऑपरेटरों ने सुप्रीम कोर्ट में एक आवेदन दायर किया, जिसमें नागरिक उड्डयन मंत्रालय के 2011 के एक पत्र का हवाला देते हुए मामले को फिर से खोलने की मांग की गई।<br /> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>National</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 01 Dec 2025 11:36:00 +0530</pubDate>
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