<?xml version="1.0" encoding="utf-8"?>        <rss version="2.0"
            xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/"
            xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/"
            xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom">
            <channel>
                <atom:link href="https://www.rokthoklekhani.com/tag/10053/not" rel="self" type="application/rss+xml" />
                <generator>Rokthok Lekhani News  RSS Feed Generator</generator>
                <title>not - Rokthok Lekhani News </title>
                <link>https://www.rokthoklekhani.com/tag/10053/rss</link>
                <description>not RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>मुंबई: पश्चिम रेलवे के 80 फीसदी कोच में नहीं हैं सीसीटीवी, लोकल के डिब्बों में टॉकबैक तो लगे, ज्यादातर हैं खराब</title>
                                    <description><![CDATA[<p>लोकल ट्रेन में हुए मर्डर के बाद यात्री सुरक्षा का विषय एक बार फिर से गरमा गया है। करीब 30 लाख यात्री प्रतिदिन लोकल से यात्रा करते हैं, लेकिन उनकी सुरक्षा आज एक बड़ा विषय बन चुका है। इसी कड़ी में महिलाओं की सुरक्षा को समझने के लिए एनबीटी की प्रतिनिधि ने स्वयं महिलाओं के डिब्बे में यात्रा कर टॉक बैक सिस्टम का जायजा लिया। यह चेकिंग 5 ट्रेनों में की गई, जिनमे से 3 ट्रेनों में कोई रिप्लाई नहीं आया, 1 ट्रेन में रिप्लाई आया पर कुछ मदद नहीं मिली। वही 1 लोकल में रिप्लाई के साथ -साथ मदद भी मिली। इसी के साथ ही करीब 80% लोकल के डिब्बों में (जनरल और महिला) में सीसीटीवी भी नहीं लगे है। </p><p><br /></p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/50400/80-percent-coaches-of-western-railways-do-not-have-cctv"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-06/cameras-to-keep-eye-on_d.webp" alt=""></a><br /><p><strong>मुंबई:  </strong>लोकल ट्रेन में हुए मर्डर के बाद यात्री सुरक्षा का विषय एक बार फिर से गरमा गया है। करीब 30 लाख यात्री प्रतिदिन लोकल से यात्रा करते हैं, लेकिन उनकी सुरक्षा आज एक बड़ा विषय बन चुका है। इसी कड़ी में महिलाओं की सुरक्षा को समझने के लिए एनबीटी की प्रतिनिधि ने स्वयं महिलाओं के डिब्बे में यात्रा कर टॉक बैक सिस्टम का जायजा लिया। यह चेकिंग 5 ट्रेनों में की गई, जिनमे से 3 ट्रेनों में कोई रिप्लाई नहीं आया, 1 ट्रेन में रिप्लाई आया पर कुछ मदद नहीं मिली। वही 1 लोकल में रिप्लाई के साथ -साथ मदद भी मिली। इसी के साथ ही करीब 80% लोकल के डिब्बों में (जनरल और महिला) में सीसीटीवी भी नहीं लगे है। <br /><strong></strong></p><p><strong><br /></strong></p><p><strong>1. 60 % टॉकबैक नहीं किया काम </strong><br />चर्चगेट से विरार जाने वाली ट्रेन शामिल: शाम के समय चर्चगेट से रवाना होने वाली 5: 12 की विरार फ़ास्ट में चढ़ने के बाद जांच के लिए टॉक बैक पर लगातार क्लिक करके मदद मांगी गई। लेकिन गॉर्ड की तरफ से मुंबई सेंट्रल आने तक कोई रिप्लाई नहीं किया गया - ऐसा ही 2 और लोकल में देखा गया। जहां मदद के तौर कोई हेल्प नहीं मिली। यहां तक की 'टॉक' का लाइट भी नहीं जल रहा था।<br /><strong></strong></p><p><strong>2. टॉकबैक पर गार्ड ने किया कनेक्ट</strong><br />रात 9 बजे का समय था। एसी लोकल चर्चगेट से रवाना हुई। इसी दौरान करीब चरनी रोड के एक मेंटली इल औरत ने ट्रेन में दस्तक दी। सभी महिलाओं को परेशान करने लगी। इस दौरान मुंबई सेंट्रल में टॉक बेक सिस्टम पर क्लिक कर जानकारी दी गई। तुरंत किसी का रिप्लाई नहीं आया, लेकिन दादर स्टेशन पर एक गार्ड की आवाज आई, क्या हुआ - उत्तर में सभी जवाब दिए गए। हालांकि मदद के रूप में कोई नहीं आया। यानी 20 फीसदी ऐसे मामले मिले।<br /><strong></strong></p><p><strong>3. 20% टॉक बैक ने किया काम, मिली मदद</strong><br />शाम की मलाड से चर्चगेट आ रही फास्ट लोकल में टॉक बैक ने किया काम साथ ही जरूरी मदद भी मिली। पड़ताल के दौरान प्रतिनिधि ने मुंबई सेंट्रल से यह ट्रेन 5 :22 बजे पकड़ी। टॉक बैक पर मदद के लिए जानकारी दी। वहां से रिप्लाई भी आया। गॉर्ड ने जानकारी ली और उसे कंट्रोल रूम तक पहुंचाया। अगले स्टेशन तक मदद मिल गई।<br /><strong></strong></p><p><strong>कैसे करता है टॉक बैक काम </strong><br />पश्चिम रेलवे के गार्ड (ट्रेन मैनेजर)अशोक अवघाड़े ने बताया कि, जब कोई टॉक बैक सिस्टम पर दिए गए बटन पर क्लिक करता है, तब गौरब केबिन में एक अलार्म बजता है और लाइट दिखती है। गॉर्ड भी अपने सिस्टम से यात्री से कनेक्ट करता है। समस्या जानने के बाद सीधे कंट्रोल रूम से कनेक्ट किया जाता है और जीआरपी और आरपीएफ अगले स्टेशन पर मदद के लिए पहुंचती है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Mumbai</category>
                                    

                <link>https://www.rokthoklekhani.com/article/50400/80-percent-coaches-of-western-railways-do-not-have-cctv</link>
                <guid>https://www.rokthoklekhani.com/article/50400/80-percent-coaches-of-western-railways-do-not-have-cctv</guid>
                <pubDate>Fri, 26 Jun 2026 11:04:27 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.rokthoklekhani.com/media/2026-06/cameras-to-keep-eye-on_d.webp"                         length="75754"                         type="image/webp"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Online Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>पुणे: शिंदे सेना MLA सीट पर बच्चू कडू: गठबंधन मुद्दों पर आधारित होगा, पदों के लिए नहीं</title>
                                    <description><![CDATA[<p>एक जाने-माने नेता बच्चू कडू ने शिंदे सेना से लेजिस्लेटिव काउंसिल सीट के लिए अपनी संभावित उम्मीदवारी को लेकर चल रही चर्चाओं पर अपना रुख साफ किया। जबकि मीडिया रिपोर्टों में कहा गया था कि उन्हें मर्जर अरेंजमेंट के तहत सीट ऑफर की जाएगी, कडू ने कहा कि उन्हें इस मामले पर शिंदे सेना से कोई ऑफिशियल न्योता या चर्चा नहीं मिली है।</p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/49587/bachchu-kadu-alliance-on-pune-shinde-sena-mla-seat-will"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-04/images-(62).jpg" alt=""></a><br /><p><strong>पुणे: </strong>एक जाने-माने नेता बच्चू कडू ने शिंदे सेना से लेजिस्लेटिव काउंसिल सीट के लिए अपनी संभावित उम्मीदवारी को लेकर चल रही चर्चाओं पर अपना रुख साफ किया। जबकि मीडिया रिपोर्टों में कहा गया था कि उन्हें मर्जर अरेंजमेंट के तहत सीट ऑफर की जाएगी, कडू ने कहा कि उन्हें इस मामले पर शिंदे सेना से कोई ऑफिशियल न्योता या चर्चा नहीं मिली है। मीडिया से बात करते हुए, कडू ने ज़ोर दिया कि उनका फोकस पद पाने के बजाय असली मुद्दों को सुलझाने पर रहता है। उन्होंने कहा, “हम ऐसे लोग हैं जो मुद्दों के लिए लड़ते हैं। किसानों, विकलांगों, लोन माफी और सैलरी हाइक से जुड़े पेंडिंग मामले हैं जिन पर तुरंत ध्यान देने की ज़रूरत है।” उन्होंने आगे कहा कि शिंदे सेना के लिए अलायंस या सपोर्ट पर तभी विचार किया जाएगा जब इन ग्रुप्स को प्रभावित करने वाले मुद्दों को सुलझाया जाएगा।</p>
<p> </p>
<p>कडू ने साफ किया कि वह सिर्फ चुनावी पदों के लिए पॉलिटिकल अलायंस नहीं बनाते हैं। उन्होंने कहा, “हम ऐसे लोग नहीं हैं जो पदों या चुनावों के लिए अलायंस बनाते हैं। हमारा सपोर्ट हमेशा मुद्दों पर आधारित होगा। अगर कोई सही समस्या या मांग है, तो हम एक कदम आगे बढ़ाएंगे।” MLA सीट के लिए मर्जर के शिंदे सेना के सुझाव के बारे में, कडू ने प्रस्ताव को माना लेकिन कोई वादा नहीं किया, और ज़ोर दिया कि किसानों और दिव्यांग नागरिकों की भलाई उनकी पहली चिंता है। उन्होंने कहा, “लोन माफ़ी और सैलरी हाइक जैसे कुछ और ज़रूरी मुद्दे भी हैं। लोगों के साथ एकजुटता, पोस्ट से ज़्यादा मायने रखती है।”</p>
<p>कडू की यह टिप्पणी आने वाले लेजिस्लेटिव काउंसिल चुनावों और शिंदे सेना की अंदरूनी स्ट्रैटेजी पर अटकलों के बीच आई है। जबकि पॉलिटिकल हलकों में उन्हें MLA सीट देने की चर्चा जारी है, कडू का रुख यह दिखाता है कि वह पर्सनल पॉलिटिकल फ़ायदे के बजाय पॉलिसी और वकालत पर ज़्यादा ध्यान देते हैं। यह रुख बातचीत में शिंदे सेना के नज़रिए पर असर डाल सकता है, क्योंकि कडू ने इस बात पर ज़ोर दिया है कि कोई भी सहयोग चुनावी फ़ायदे के बजाय ज़रूरी मुद्दों पर आधारित होगा। मुद्दों पर आधारित पॉलिटिक्स पर उनका ज़ोर, पार्टी की पोस्ट से ज़्यादा सामाजिक चिंताओं को प्राथमिकता देने वाले नेता के तौर पर उनकी पब्लिक इमेज से मेल खाता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Maharashtra</category>
                                    

                <link>https://www.rokthoklekhani.com/article/49587/bachchu-kadu-alliance-on-pune-shinde-sena-mla-seat-will</link>
                <guid>https://www.rokthoklekhani.com/article/49587/bachchu-kadu-alliance-on-pune-shinde-sena-mla-seat-will</guid>
                <pubDate>Thu, 30 Apr 2026 12:13:25 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.rokthoklekhani.com/media/2026-04/images-%2862%29.jpg"                         length="5742"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Online Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>नई दिल्ली : संपत्ति धोखाधड़ी मामले में सिर्फ खरीदारी ही मुकदमे के लिए काफी नहीं: सुप्रीम कोर्ट</title>
                                    <description><![CDATA[<p>सुप्रीम कोर्ट ने तमिलनाडु के दशकों पुराने एक जाली वसीयत और संपत्ति धोखाधड़ी मामले में आरोपी एक खरीदार के खिलाफ चल रही आपराधिक कार्यवाही को रद्द कर दिया है। कोर्ट ने कहा कि विवादित संपत्ति को किसी कीमती चीज के बदले में सिर्फ खरीद लेना, बिना किसी ठोस सबूत के जो दिखाए कि वह जालसाजी या साजिश में शामिल था, उसके खिलाफ आपराधिक मुकदमा चलाने का आधार नहीं बन सकता।</p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/49556/new-delhi-mere-purchase-is-not-enough-for-trial-in"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-04/download---2026-04-28t182741.806.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>नई दिल्ली : </strong>सुप्रीम कोर्ट ने तमिलनाडु के दशकों पुराने एक जाली वसीयत और संपत्ति धोखाधड़ी मामले में आरोपी एक खरीदार के खिलाफ चल रही आपराधिक कार्यवाही को रद्द कर दिया है। कोर्ट ने कहा कि विवादित संपत्ति को किसी कीमती चीज के बदले में सिर्फ खरीद लेना, बिना किसी ठोस सबूत के जो दिखाए कि वह जालसाजी या साजिश में शामिल था, उसके खिलाफ आपराधिक मुकदमा चलाने का आधार नहीं बन सकता। जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की एक बेंच ने मद्रास हाई कोर्ट के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें अपीलकर्ता एस. आनंद के खिलाफ 2004 की एक एफआईआर के संबंध में चल रही कार्यवाही को रद्द करने से इनकार कर दिया गया था। </p>
<p> </p>
<p>इस एफआईआर में करूर जिले में एक वसीयत को जाली बनाने और पुश्तैनी संपत्ति की धोखाधड़ी से बिक्री करने का आरोप लगाया गया था। सर्वोच्च न्यायालय ने अपील को स्वीकार करते हुए कहा कि 'सबूत का एक कण भी' ऐसा नहीं था, जिससे संकेत मिले कि अपीलकर्ता ने 12 सितंबर, 1988 की विवादित वसीयत की कथित मनगढ़ंत रचना में कोई भूमिका निभाई थी या खरीद के समय उसे कथित जालसाजी की जानकारी थी। न्यायमूर्ति नाथ की अध्यक्षता वाली पीठ ने यह टिप्पणी की कि अपीलकर्ता एक मूल्यवान प्रतिफल के बदले विचाराधीन संपत्ति का क्रेता है। उसे वर्तमान मामले के तथ्यों के आधार पर, ऐसा व्यक्ति नहीं माना जा सकता, जिसने कपटपूर्ण प्रलोभन दिया हो।</p>
<p>यह मामला शिकायतकर्ता के उन आरोपों से जुड़ा है कि उसके दिवंगत भाई ने अन्य आरोपियों के साथ मिलकर साजिश रचते हुए, उनके पिता की वसीयत को जाली बनाया और उसका इस्तेमाल करके खरीदारों (जिनमें अपीलकर्ता भी शामिल है) के पक्ष में बिक्री विलेख (सेल डीड) निष्पादित किए। इस प्रकार, उसने वैध वारिसों को उनके संपत्ति अधिकारों से वंचित कर दिया। पुलिस ने जांच के बाद एक चार्जशीट दायर की, जिसमें संपत्ति के खरीदारों सहित कई आरोपियों पर भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 467, 468, 471, 420 और 120-बी के तहत अपराधों का आरोप लगाया गया।</p>
<p>सुप्रीम कोर्ट ने रिकॉर्ड पर मौजूद सामग्री की जांच करते हुए यह दर्ज किया कि अपीलकर्ता का न तो कथित जाली वसीयत बनाने से कोई संबंध था और न ही वह उन पिछली लेन-देन में कोई पक्षकार था, जो अभियोजन पक्ष के षड्यंत्र सिद्धांत का आधार बनी थीं। शीर्ष अदालत ने संपत्ति विवादों में आपराधिक दायित्व को नियंत्रित करने वाले स्थापित सिद्धांतों को दोहराते हुए यह माना कि किसी 'बोना फाइड' (सद्भावपूर्ण) खरीदार के खिलाफ धोखाधड़ी के लिए आपराधिक मुकदमा आमतौर पर तब तक नहीं चलाया जा सकता, जब तक कि धोखाधड़ी के इरादे या सक्रिय साजिश का कोई स्पष्ट सबूत न हो।</p>
<p>इसमें कहा गया कि न तो एफआईआर और न ही विवादित आदेश से ऐसा कोई ठोस सबूत सामने आता है, जिससे आरोप की पुष्टि हो सके कि अपीलकर्ता ने कथित जाली वसीयत तैयार करने की साजिश रची थी। सुप्रीम कोर्ट ने आगे कहा कि जहां कोई व्यक्ति स्वामित्व का दावा करते हुए किसी संपत्ति को बेचता है, वहां धोखाधड़ीपूर्ण गलतबयानी के मामलों में आमतौर पर पीड़ित पक्ष खरीदार होता है, न कि कोई तीसरा पक्ष, सिवाय उन मामलों के जहां प्रत्यक्ष रूप से धोखा देना साबित हो जाए। पीठ ने कहा कि असल में, भले ही यह आरोप कि वसीयत जाली थी सही साबित हो जाए, तब भी संपत्ति के खरीदार ही पीड़ित पक्ष होंगे, क्योंकि ऐसी परिस्थितियों में विचाराधीन संपत्ति पर उनका मालिकाना हक विवादों में घिर जाएगा। यह मानते हुए कि अपील करने वाले के खिलाफ क्रिमिनल कार्रवाई जारी रखना प्रोसेस का गलत इस्तेमाल होगा, सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि आगे केस चलाना 'पूरी तरह से गलत' होगा और यह 'कोर्ट के प्रोसेस का बहुत ज्यादा गलत इस्तेमाल' होगा। इसके अनुसार, उसने पेंडिंग क्रिमिनल केस में अकेले अपील करने वाले के खिलाफ सभी कार्रवाई रद्द कर दी, और यह साफ किया कि बाकी आरोपियों के खिलाफ ट्रायल जारी रहेगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>National</category>
                                    

                <link>https://www.rokthoklekhani.com/article/49556/new-delhi-mere-purchase-is-not-enough-for-trial-in</link>
                <guid>https://www.rokthoklekhani.com/article/49556/new-delhi-mere-purchase-is-not-enough-for-trial-in</guid>
                <pubDate>Tue, 28 Apr 2026 18:28:55 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.rokthoklekhani.com/media/2026-04/download---2026-04-28t182741.806.jpg"                         length="13193"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Online Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>मुंबई में ऑटो रिक्शा और टैक्सी चालकों के लिए मराठी बोलना जरूरी नहीं, सरकार ने 6 महीने के लिए टाला फैसला</title>
                                    <description><![CDATA[<p>1 मई से ऑटो रिक्शा और टैक्सी चालकों के लिए मराठी बोलना जरूरी नहीं होगा। महाराष्ट्र सरकार ने पहले ऐलान किया था कि मुंबई में ऑटो-रिक्शा या टैक्सी चलाने वाले सभी लोगों के लिए 1 मई से मराठी बोलना जरूरी होगा। हालांकि, विरोध के बाद इस फैसले को 6 महीने के लिए टाल दिया गया है। हालांकि, इस दौरान मराठी बोलने वाले और गैर मराठी ऑटो-रिक्शा ड्राइवरों का वेरिफिकेशन जारी रहेगा। महाराष्ट्र के परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक ने कहा था कि मुंबई में रिक्शा चालकों के लिए मराठी भाषा सीखना अनिवार्य किया जाएगा।</p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/49525/it-is-not-necessary-for-auto-rickshaw-and-taxi-drivers"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-04/download---2026-04-27t174737.088.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>मुंबई : </strong>1 मई से ऑटो रिक्शा और टैक्सी चालकों के लिए मराठी बोलना जरूरी नहीं होगा। महाराष्ट्र सरकार ने पहले ऐलान किया था कि मुंबई में ऑटो-रिक्शा या टैक्सी चलाने वाले सभी लोगों के लिए 1 मई से मराठी बोलना जरूरी होगा। हालांकि, विरोध के बाद इस फैसले को 6 महीने के लिए टाल दिया गया है। हालांकि, इस दौरान मराठी बोलने वाले और गैर मराठी ऑटो-रिक्शा ड्राइवरों का वेरिफिकेशन जारी रहेगा। महाराष्ट्र के परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक ने कहा था कि मुंबई में रिक्शा चालकों के लिए मराठी भाषा सीखना अनिवार्य किया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा था कि यदि रिक्शा चालकों को मराठी नहीं आती, तो उनके परमिट रद्द कर दिए जाएंगे। इसके बाद मराठी बनाम गैर-मराठी विवाद दोबारा उभर गया था।</p>
<p> </p>
<p>इस मुद्दे पर कई नेताओं ने विवादित बयान भी दिए थे। महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना के प्रमुख राज ठाकरे के बेटे अमित ठाकरे भी इनमें से एक थे। अमित ठाकरे ने कहा था कि जो मराठी भाषा अनिवार्य करने का विरोध कर रहे हैं। अगर उनके आंदोलन से किसी मराठी व्यक्ति को परेशानी हुई तो उसे सड़क पर ही पीटेंगे।</p>
<p><strong>विपक्ष के नेताओं ने गुंडागर्दी का किया था विरोध</strong><br />गैर मराठीभाषी लोगों के अलावा विपक्ष के नेताओं ने भी मराठी के नाम पर गुंडागर्दी का विरोध किया था। एआईएमआईएम के नेता इम्तियाज जलील ने कहा था कि महाराष्ट्र में रहने वाले सभी लोगों को मराठी बोलनी चाहिए। जिन लोगों को नहीं आती है, उन्हें मराठी सिखाई जानी चाहिए, लेकिन भाषा के नाम पर गुंडागर्दी नहीं होनी चाहिए। उन्होंने कहा था कि लोगों को मराठी सिखाने का बेहतर तरीका अपनाया जाना चाहिए। अब संभवतः महाराष्ट्र सरकार भी इसी दिशा में आगे बढ़ रही है।</p>
<p><strong>सरकार तैयार करेगी सिलेबस</strong><br />महाराष्ट्र सरकार पहले ही कह चुकी है कि ऑटो-रिक्शा चलाने वाले लोगों को मराठी में पढ़ना या लिखना जरूरी नहीं है, उन्हें सिर्फ आम बोलचाल की भाषा सीखने की जरूरत है। परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक ने बताया कि सरकार राज्य में ऑटो और टैक्सी चालकों को मराठी सिखाने के लिए एक प्रशिक्षण पाठ्यक्रम तैयार करेगी। वहीं, मनसे कार्यकर्ताओं ने पहले ही उन ऑटो-रिक्शा पर स्टीकर लगाने शुरू कर दिए हैं, जिनके चालकों को मराठी आती है। </p>
<p><strong>मुंबई मराठी साहित्य संघ सिखाएगा भाषा</strong><br />महाराष्ट्र के ट्रांसपोर्ट मिनिस्टर ने कहा, "मुंबई मराठी साहित्य संघ ने राज्य भर में अपनी अलग-अलग ब्रांच में ऑटो रिक्शा ड्राइवरों और टैक्सी ड्राइवरों को मराठी सिखाने की जिम्मेदारी ली है। इससे मराठी को बढ़ावा मिलेगा। कोंकण मराठी साहित्य परिषद भी मिलकर कोंकण इलाके में मराठी सिखाएगी।</p>
<p><strong>एक मई से लागू होने वाला था फैसला</strong><br />परिवहन मंत्री सरनाईक ने कहा था कि सरकार ने महाराष्ट्र दिवस (एक मई) से इस निर्णय को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए ठोस कदम उठाए हैं, जिसके तहत ऑटो, टैक्सी और ओला, उबर तथा ई-बाइक जैसी ऐप आधारित सेवाओं के चालकों के लिए यात्रियों से मराठी में संवाद करना अनिवार्य होगा। उन्होंने कहा था कि इस पहल के तहत गैर-मराठी चालकों को भाषा सिखाने के लिए प्रशिक्षण पाठ्यक्रम तैयार करने पर विशेष जोर दिया जाएगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Mumbai</category>
                                    

                <link>https://www.rokthoklekhani.com/article/49525/it-is-not-necessary-for-auto-rickshaw-and-taxi-drivers</link>
                <guid>https://www.rokthoklekhani.com/article/49525/it-is-not-necessary-for-auto-rickshaw-and-taxi-drivers</guid>
                <pubDate>Mon, 27 Apr 2026 17:49:23 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.rokthoklekhani.com/media/2026-04/download---2026-04-27t174737.088.jpg"                         length="13626"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Online Desk]]></dc:creator>
                            </item>

            </channel>
        </rss>
        