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                <title>Maharashtra - Rokthok Lekhani News </title>
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                <description>Maharashtra RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>छात्र प्रदर्शनों के बीच PM मोदी और पीयूष गोयल के AI फेक वीडियो पर FIR दर्ज: महाराष्ट्र साइबर पुलिस का एक्शन</title>
                                    <description><![CDATA[<p dir="ltr"><strong>छात्र प्रदर्शनों के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल को निशाना बनाकर बनाए गए एआई (AI Deepfake) और छेड़छाड़ किए गए वीडियो सोशल मीडिया पर प्रसारित होने के बाद महाराष्ट्र साइबर पुलिस ने मामला दर्ज किया है। भाजपा महिला मोर्चा की शिकायत पर पुलिस ने बीएनएस और आईटी एक्ट की धाराओं के तहत फर्जी वीडियो फैलाने वाले खातों की जांच शुरू कर दी है।</strong></p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/51084/maharashtra-cyber-police-action-filed-against-ai-fake-video-of"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-08/untitled-design-2026-08-01t105131.861.jpg" alt=""></a><br /><p dir="ltr"><strong>मुंबई:</strong> छात्र प्रदर्शनों के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल को निशाना बनाकर बनाए गए एआई (AI Deepfake) और डॉक्टर्ड (छेड़छाड़ किए गए) वीडियो के सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद <strong>महाराष्ट्र साइबर पुलिस</strong> ने एफआईआर (FIR) दर्ज कर ली है।</p>
<p dir="ltr">​यह कार्रवाई भाजपा महिला मोर्चा महाराष्ट्र की सोशल मीडिया सह-संयोजक बीना गोगरी (Beena Gogri) की शिकायत के आधार पर की गई है। शिकायतकर्ता का आरोप है कि ये वीडियो और तस्वीरें गलत सूचना फैलाने, जनता को भड़काने और संवैधानिक पदों पर बैठे व्यक्तियों की छवि धूमिल करने की नीयत से प्रसारित किए गए थे।</p>
<h6 dir="ltr">​<strong>मामले के मुख्य बिंदु:</strong></h6>
<ul>
<li dir="ltr">​<strong>फर्जी दावा और AI वीडियो:</strong> 'महाराष्ट्र धर्म' नामक फेसबुक पेज और अन्य सोशल मीडिया खातों पर एक एआई-जनरेटेड/मॉर्फ्ड वीडियो शेयर किया गया, जिसमें केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल को कथित तौर पर प्रदर्शनकारी छात्रों के खिलाफ आपत्तिजनक/भड़काऊ टिप्पणी करते दिखाया गया था।</li>
<li dir="ltr">​<strong>सच का खुलासा:</strong> मूल न्यूज़ एजेंसी के वीडियो से तुलना करने पर पता चला कि पीयूष गोयल के बाइट (बयान) को एआई टूल की मदद से बदला गया था।</li>
<li dir="ltr">​<strong>PM मोदी पर आपत्तिजनक पोस्ट:</strong> शिकायत में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मॉर्फ्ड तस्वीरें और उनके खिलाफ इस्तेमाल की गई अभद्र टिप्पणियों वाली वीडियो पोस्ट का भी उल्लेख किया गया है।</li>
<li dir="ltr">​<strong>कानूनी कार्रवाई:</strong> महाराष्ट्र साइबर पुलिस ने <strong>भारतीय न्याय संहिता (BNS)</strong> की मानहानि और <strong>सूचना प्रौद्योगिकी (IT) अधिनियम</strong> की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस ऐसे हैंडल और अकाउंट्स को ट्रैक कर रही है।</li>
</ul>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Maharashtra</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 01 Aug 2026 13:56:17 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Rokthok Lekhani]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title> मुंबई: महाराष्ट्र सरकार ने मंत्रियों के लिए ई-पेपर की अनिवार्यता हटाई</title>
                                    <description><![CDATA[<p>महाराष्ट्र सरकार ने शुक्रवार को अपने उस फैसले में बदलाव कर दिया, जिसमें डिप्टी चीफ मिनिस्टर और मंत्रियों के लिए अखबारों और पत्रिकाओं का केवल ऑनलाइन ई-पेपर सब्सक्रिप्शन अनिवार्य किया गया था। सरकार ने अब यह व्यवस्था कर दी है कि मंत्री अपनी सुविधा के अनुसार ऑनलाइन या फिजिकल यानी प्रिंट सब्सक्रिप्शन में से किसी एक विकल्प का चयन कर सकते हैं।</p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/51078/mumbai-maharashtra-government-removed-the-requirement-of-e-paper-for-ministers"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-08/istock-1490992198.webp" alt=""></a><br /><p><strong>मुंबई: </strong>महाराष्ट्र सरकार ने शुक्रवार को अपने उस फैसले में बदलाव कर दिया, जिसमें डिप्टी चीफ मिनिस्टर और मंत्रियों के लिए अखबारों और पत्रिकाओं का केवल ऑनलाइन ई-पेपर सब्सक्रिप्शन अनिवार्य किया गया था। सरकार ने अब यह व्यवस्था कर दी है कि मंत्री अपनी सुविधा के अनुसार ऑनलाइन या फिजिकल यानी प्रिंट सब्सक्रिप्शन में से किसी एक विकल्प का चयन कर सकते हैं। जनरल एडमिनिस्ट्रेशन डिपार्टमेंट ने यह संशोधन उस आदेश के एक दिन बाद जारी किया, जिसमें कहा गया था कि 1 सितंबर से राज्य के मंत्रियों को अखबारों और पत्रिकाओं के लिए केवल डिजिटल माध्यम का उपयोग करना होगा। नए निर्देश के अनुसार, अब डिजिटल के साथ-साथ पारंपरिक प्रिंट संस्करण की सुविधा भी जारी रहेगी।</p>
<p> </p>
<p>एक दिन में बदला फैसला महाराष्ट्र सरकार का पहला आदेश सामने आने के बाद राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में इसकी चर्चा शुरू हो गई थी। आदेश में कहा गया था कि मंत्रियों को अखबार और पत्रिकाओं के लिए ऑनलाइन सब्सक्रिप्शन लेना होगा और इसका खर्च उन्हें खुद उठाना होगा। इस फैसले का उद्देश्य सरकारी खर्च को कम करना और डिजिटल माध्यमों को बढ़ावा देना बताया गया था। हालांकि, आदेश जारी होने के अगले ही दिन सरकार ने इसमें बदलाव करते हुए मंत्रियों को विकल्प देने का फैसला किया।</p>
<p>अब मंत्री अपनी जरूरत और सुविधा के अनुसार यह तय कर सकेंगे कि वे अखबारों और पत्रिकाओं को ऑनलाइन पढ़ना चाहते हैं या फिर उनकी भौतिक प्रतियां मंगवाना चाहते हैं। डिजिटल व्यवस्था को बढ़ावा देने की कोशिश सरकार की ओर से पहले जारी किए गए निर्देश को डिजिटल गवर्नेंस और कागज की खपत कम करने की दिशा में एक कदम माना गया था। प्रशासन में डिजिटल सेवाओं के इस्तेमाल को बढ़ावा देने के लिए केंद्र और राज्य सरकारें लगातार प्रयास कर रही हैं।</p>
<p>ई-पेपर के इस्तेमाल से कागज की बचत, रिकॉर्ड को आसानी से सुरक्षित रखने और कहीं से भी समाचार पढ़ने की सुविधा मिलती है। इसी उद्देश्य से सरकार ने मंत्रियों के लिए ऑनलाइन सब्सक्रिप्शन व्यवस्था लागू करने की योजना बनाई थी। हालांकि, नए संशोधन के बाद डिजिटल विकल्प जारी रहेगा, लेकिन इसे अनिवार्य नहीं रखा गया है। मंत्रियों को खुद उठाना होगा खर्च सरकार के नए निर्देशों के अनुसार, अखबार और पत्रिकाओं के सब्सक्रिप्शन का खर्च मंत्रियों को स्वयं वहन करना होगा। पहले सरकारी स्तर पर मंत्रियों के कार्यालयों में कई अखबार और पत्रिकाएं उपलब्ध कराई जाती थीं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Maharashtra</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 01 Aug 2026 11:55:09 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Online Desk]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>विरार : सात माह की गर्भवती मदद के लिए चीखती रही, स्ट्रेचर तक नहीं दिया; फर्श पर गिरने से मासूम की हालत गंभीर</title>
                                    <description><![CDATA[<p>विरार-पश्चिम के एक निजी प्रसूति अस्पताल में कथित चिकित्सकीय लापरवाही का भयावह मामला सामने आया है। आरोप है कि प्रसव पीड़ा से तड़प रही महिला को समय पर सहायता, स्ट्रेचर या व्हीलचेयर नहीं दी गई। उसे पैदल प्रसूति कक्ष तक ले जाने के दौरान ही बच्चे का जन्म हो गया और नवजात ढाई से तीन फीट की ऊंचाई से सीधे फर्श पर जा गिरा।</p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/51074/virar-seven-months-pregnant-kept-screaming-for-help-not-even"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-08/bacteria-and-premature-birth.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>विरार :</strong> विरार-पश्चिम के एक निजी प्रसूति अस्पताल में कथित चिकित्सकीय लापरवाही का भयावह मामला सामने आया है। आरोप है कि प्रसव पीड़ा से तड़प रही महिला को समय पर सहायता, स्ट्रेचर या व्हीलचेयर नहीं दी गई। उसे पैदल प्रसूति कक्ष तक ले जाने के दौरान ही बच्चे का जन्म हो गया और नवजात ढाई से तीन फीट की ऊंचाई से सीधे फर्श पर जा गिरा।</p>
<p> </p>
<p>घटना विरार-पश्चिम स्थित जोगलेकर मैटरनिटी होम की बताई गई है। महिला की गर्भावस्था का सातवां महीना शुरू हुए केवल दो दिन हुए थे, तभी गुरुवार को उसे तेज प्रसव पीड़ा होने लगी। परिजन उसे तत्काल अस्पताल लेकर पहुंचे। महिला और उसके रिश्तेदारों का दावा है कि उन्होंने डॉक्टरों तथा नर्सों से बार-बार कहा कि बच्चा बाहर आ रहा है और तत्काल सहायता की जरूरत है, लेकिन उनकी गुहार को गंभीरता से नहीं लिया गया। परिवार के अनुसार, अत्यधिक दर्द के कारण महिला ठीक से खड़ी भी नहीं हो पा रही थी, फिर भी उसे स्ट्रेचर उपलब्ध कराने के बजाय चलने को कहा गया।</p>
<p>प्रसूति कक्ष के दरवाजे तक पहुंचते-पहुंचते अचानक प्रसव हो गया और नवजात कठोर फर्श पर गिर पड़ा। उसके सिर और शरीर पर गंभीर चोटें आने का दावा किया गया है। बच्चे की हालत बिगड़ने पर उसे ठाणे के एक बाल अस्पताल की एनआईसीयू में भर्ती कराया गया, जहां उसकी स्थिति नाजुक बताई जा रही है। परिवार ने संबंधित डॉक्टरों तथा नर्सों के खिलाफ मामला दर्ज करने और अस्पताल पर कठोर कार्रवाई की मांग की है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Maharashtra</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 01 Aug 2026 11:49:16 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Online Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>पुणे: खाद्य सुरक्षा उल्लंघन पर फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन सख्त, लाइसेंस निलंबित</title>
                                    <description><![CDATA[<p>महाराष्ट्र के फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन ने खाद्य सुरक्षा नियमों के उल्लंघन और खराब साफ-सफाई व्यवस्था के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की है। एफडीए की पुणे डिवीजन टीम ने पुणे, सतारा और कोल्हापुर जिलों में जांच अभियान चलाकर 21 फूड एस्टेब्लिशमेंट के लाइसेंस निलंबित कर दिए हैं। यह कार्रवाई 'सेफ फूड, सेफ ड्रग, सेफ महाराष्ट्र' अभियान के तहत की गई। अधिकारियों ने बताया कि 23 जुलाई से 28 जुलाई के बीच चलाए गए विशेष निरीक्षण अभियान में कई खाने-पीने की जगहों पर खाद्य सुरक्षा मानकों की अनदेखी पाई गई। इसके बाद संबंधित प्रतिष्ठानों के खिलाफ कार्रवाई की गई। </p>
<p> </p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/51066/pune-food-and-drug-administration-suspends-strict-license-over-food"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-07/lc2rle3s_fda_625x300_24_july_26.webp" alt=""></a><br /><p><strong>पुणे: </strong>महाराष्ट्र के फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन ने खाद्य सुरक्षा नियमों के उल्लंघन और खराब साफ-सफाई व्यवस्था के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की है। एफडीए की पुणे डिवीजन टीम ने पुणे, सतारा और कोल्हापुर जिलों में जांच अभियान चलाकर 21 फूड एस्टेब्लिशमेंट के लाइसेंस निलंबित कर दिए हैं। यह कार्रवाई 'सेफ फूड, सेफ ड्रग, सेफ महाराष्ट्र' अभियान के तहत की गई। अधिकारियों ने बताया कि 23 जुलाई से 28 जुलाई के बीच चलाए गए विशेष निरीक्षण अभियान में कई खाने-पीने की जगहों पर खाद्य सुरक्षा मानकों की अनदेखी पाई गई। इसके बाद संबंधित प्रतिष्ठानों के खिलाफ कार्रवाई की गई। </p>
<p> </p>
<p>एफडीए अधिकारियों के अनुसार, अभियान का मुख्य उद्देश्य लोगों को सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण भोजन उपलब्ध कराना था। इसके लिए होटल, रेस्टोरेंट, बेकरी, फूड डिलीवरी और अन्य खाद्य प्रतिष्ठानों की जांच की गई। जांच के दौरान साफ-सफाई की स्थिति, खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता, स्टोरेज व्यवस्था और खाद्य सुरक्षा नियमों के पालन की जांच की गई। अधिकारियों ने बताया कि जिन प्रतिष्ठानों में गंभीर कमियां पाई गईं, उनके लाइसेंस को अस्थायी रूप से निलंबित किया गया है। एफडीए ने स्पष्ट किया है कि जब तक संबंधित प्रतिष्ठान निर्धारित खाद्य सुरक्षा मानकों का पालन नहीं करते, तब तक उनके खिलाफ कार्रवाई जारी रहेगी।</p>
<p>पुणे शहर और आसपास के क्षेत्रों में कई प्रमुख खाद्य प्रतिष्ठानों पर कार्रवाई की गई। इनमें विमान नगर स्थित ब्लिंकइट कॉमर्स प्राइवेट लिमिटेड, प्रभात रोड स्थित होटल लक्ष्मण, मुंधवा स्थित पंजाबी शेफ, भवानी पेठ स्थित मदीना फैमिली रेस्टोरेंट, सिंहगढ़ रोड स्थित हिना बेकरी, मुंधवा स्थित माधव बिरयानी और नर्हे स्थित इंडियन बेकरी शामिल हैं। एफडीए की टीम ने इन प्रतिष्ठानों में निरीक्षण के दौरान पाई गई कमियों के आधार पर लाइसेंस निलंबन की कार्रवाई की। अधिकारियों ने कहा कि खाद्य कारोबारियों को नियमों का पालन करना अनिवार्य है और किसी भी तरह की लापरवाही को नजरअंदाज नहीं किया जाएगा।</p>
<p>विशेषज्ञों के अनुसार, बड़े शहरों में बाहर खाना खाने और ऑनलाइन फूड डिलीवरी का चलन तेजी से बढ़ा है। ऐसे में खाद्य सुरक्षा मानकों को बनाए रखना और भी महत्वपूर्ण हो गया है। थोड़ी सी लापरवाही भी लोगों के स्वास्थ्य पर गंभीर असर डाल सकती है। एफडीए ने आम लोगों से भी अपील की है कि वे खाने-पीने की जगहों पर साफ-सफाई और गुणवत्ता पर ध्यान दें। यदि किसी प्रतिष्ठान में खराब भोजन, गंदगी या खाद्य सुरक्षा से जुड़ी कोई समस्या नजर आती है तो इसकी शिकायत संबंधित विभाग से करें। अधिकारियों ने यह भी संकेत दिया है कि आने वाले दिनों में इस तरह के निरीक्षण अभियान जारी रहेंगे। केवल लाइसेंस निलंबन तक सीमित रहने के बजाय नियमों का उल्लंघन करने वाले प्रतिष्ठानों पर आगे भी सख्त कार्रवाई की जा सकती है। एफडीए की यह कार्रवाई खाद्य सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। विभाग का कहना है कि अभियान का उद्देश्य किसी व्यवसाय को नुकसान पहुंचाना नहीं, बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि लोगों को सुरक्षित और स्वच्छ भोजन मिले। फिलहाल 21 प्रतिष्ठानों के लाइसेंस निलंबित किए गए हैं और संबंधित संचालकों को खाद्य सुरक्षा नियमों का पालन करने के निर्देश दिए गए हैं। एफडीए की जांच और कार्रवाई आगे भी जारी रहने की संभावना है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Maharashtra</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 31 Jul 2026 10:42:26 +0530</pubDate>
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