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                <title>Online Desk - Rokthok Lekhani News </title>
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                <title>सऊदी की तेल पाइपलाइन ड्रोन हमले से किस कदर हुई तबाह ...</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;">सऊदी अरब ने पाइपलाइन पर हुए हमले के लिए इराक से संचालित ईरान समर्थित मिलिशिया को जिम्मेदार ठहराया है. रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, ड्रोन हमला इराक से शुरू होने की बात सामने आई है, जबकि इराक ने इसकी जांच शुरू की है. कुछ मिलिशिया समूहों ने हमले में अपनी भूमिका से इनकार किया है. यह घटना ऐसे समय हुई है जब यमन में हूती समूह ने भी सऊदी अरब के खिलाफ अपने हमले तेज किए हैं. हूती समूह पर ईरान का समर्थन प्राप्त होने का आरोप है. हाल के हमलों के बाद क्षेत्र में तेल उत्पादन, पाइपलाइन और समुद्री परिवहन से जुड़ी सुरक्षा को लेकर चिंताएं और बढ़ गई हैं.</p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/51858/how-saudis-oil-pipeline-was-destroyed-by-drone-attack"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-09/663.jpg" alt=""></a><br /><p>सऊदी अरब की ईस्ट-वेस्ट तेल पाइपलाइन पर हुए ड्रोन हमले के बाद सामने आई नई सैटेलाइट तस्वीरों ने नुकसान की गंभीरता को लेकर चिंता बढ़ा दी है. तस्वीरों में पाइपलाइन के एक प्रमुख पंपिंग स्टेशन के आसपास बड़े पैमाने पर जले हुए हिस्से और ढांचागत नुकसान दिखाई दे रहा है. एक्सपर्ट का अनुमान है कि पाइपलाइन को पूरी क्षमता से दोबारा चलाने में कई सप्ताह लग सकते हैं. यह पाइपलाइन करीब 1,200 किलोमीटर लंबी है और सऊदी अरब के पूर्वी तेल क्षेत्रों से कच्चे तेल को लाल सागर स्थित यानबू बंदरगाह तक पहुंचाती है. इसका महत्व इसलिए भी बढ़ गया है क्योंकि इसके जरिए सऊदी अरब स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को बायपास करके तेल को दूसरे रास्ते से निर्यात कर सकता है.<br /><br />सैटेलाइट तस्वीरों में हमले के बाद पाइपलाइन से जुड़े पंपिंग स्टेशन के आसपास बड़े जले हुए हिस्से दिखाई दे रहे हैं. पहले और बाद की तस्वीरों की तुलना करने पर इस क्षेत्र में आग और ढांचागत नुकसान साफ नजर आता है. सैटेलाइट एनालिसिसमें 10 सितंबर के आसपास इस इलाके में धुएं और गर्मी से जुड़ी असामान्य गतिविधियां भी दर्ज की गई थीं. रिपोर्टों के अनुसार, नुकसान के कारण सऊदी अरब ने पाइपलाइन को अस्थायी रूप से बंद कर दिया. इसके चलते यानबू के रास्ते होने वाले तेल निर्यात पर भी असर पड़ा है. रॉयटर्स के अनुसार, सऊदी अरब ने यूरोप के लिए कुछ तेल शिपमेंट भी रोक दिए हैं और यानबू बंदरगाह से सितंबर के कुछ कार्गो लोडिंग प्रभावित हुई हैं.<br /><br />पाइपलाइन की मरम्मत में कितना समय लगेगा, इस पर अलग-अलग अनुमान सामने आए हैं. कुछ जानकारों ने इसे कुछ सप्ताह का काम बताया है, जबकि अन्य अनुमानों में पांच से छह सप्ताह तक का समय बताया गया है. केप्लर के एक्सपर्ट होमायूं फलकशाही के अनुसार, स्पेयर पार्ट्स की उपलब्धता और सप्लाई चेन में रुकावट को देखते हुए मरम्मत में 4 से 6सप्ताह लग सकते हैं. हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि इतने पूरे समय तक पाइपलाइन में तेल का प्रवाह पूरी तरह बंद ही रहेगी. कुछ रिपोर्टों में आंशिक संचालन पहले शुरू होने की संभावना भी बताई गई है. इसलिए वास्तविक नुकसान और बहाली का समय अभी पूरी तरह स्पष्ट नहीं है.<br /><br />ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन की क्षमता बहुत बड़ी है. अलग-अलग रिपोर्टों के अनुसार, इसके जरिए करीब 4 से 5 मिलियन बैरल कच्चा तेल प्रतिदिन भेजा जा सकता है. यह मात्रा दुनिया की कुल तेल आपूर्ति का लगभग 4 फीसदी है. इसलिए लंबे समय तक पाइपलाइन बंद रहने पर अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार पर दबाव बढ़ सकता है. पाइपलाइन बंद होने की खबरों के बीच ब्रेंट क्रूड की कीमत 108 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच गई. हालांकि 16 सितंबर को अमेरिकी कच्चे तेल के भंडार बढ़ने की खबर के बाद कीमतों में कुछ नरमी भी देखी गई और ब्रेंट करीब 107.82 डॉलर प्रति बैरल पर आया.<br /><br />सऊदी अरब ने पाइपलाइन पर हुए हमले के लिए इराक से संचालित ईरान समर्थित मिलिशिया को जिम्मेदार ठहराया है. रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, ड्रोन हमला इराक से शुरू होने की बात सामने आई है, जबकि इराक ने इसकी जांच शुरू की है. कुछ मिलिशिया समूहों ने हमले में अपनी भूमिका से इनकार किया है. यह घटना ऐसे समय हुई है जब यमन में हूती समूह ने भी सऊदी अरब के खिलाफ अपने हमले तेज किए हैं. हूती समूह पर ईरान का समर्थन प्राप्त होने का आरोप है. हाल के हमलों के बाद क्षेत्र में तेल उत्पादन, पाइपलाइन और समुद्री परिवहन से जुड़ी सुरक्षा को लेकर चिंताएं और बढ़ गई हैं.<br /><br />सऊदी अरब के खमीस मुशैत के पास स्थित किंग खालिद एयर बेस को भी हाल के हूती हमलों में नुकसान पहुंचने की रिपोर्ट है. सैटेलाइट तस्वीरों में एयर बेस के कम से कम तीन एयरक्राफ्ट हैंगर या शेल्टर क्षतिग्रस्त दिखाई देने की बात सामने आई है. इस बेस पर अमेरिका में बने F-15 लड़ाकू विमान तैनात रहते हैं. सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन ने कहा है कि हूती मिसाइल और ड्रोन हमलों में 13 लोग घायल हुए. दूसरी ओर, हूती समूह ने दावा किया है कि उसने सऊदी सैन्य ठिकानों और अन्य लक्ष्यों को निशाना बनाया. इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि हर मामले में उपलब्ध नहीं है.<br /><br />तेल पाइपलाइन पर हमले के साथ ही लाल सागर क्षेत्र में हूती गतिविधियां भी बढ़ी हैं. रिपोर्टों के अनुसार, हूती लड़ाकों ने बाब अल-मंदाब के आसपास रणनीतिक इलाकों पर अपना कंट्रोल बढ़ाया है. यह जलमार्ग वैश्विक समुद्री व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति के लिए महत्वपूर्ण है. ऐसे में सऊदी अरब के सामने एक साथ दो तरह की चुनौती दिखाई दे रही है. एक तरफ स्ट्रेट ऑफ के रास्ते तेल परिवहन में पहले से परेशानी है, वहीं दूसरी तरफ उसे बायपास करने वाली ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन और लाल सागर मार्ग भी सुरक्षा जोखिमों से घिर गए हैं.<br /><br />अगर पाइपलाइन की मरम्मत में लंबा समय लगता है और यानबू के तेल भंडार कम होते हैं तो सऊदी अरब को अपने ग्राहकों को तेल पहुंचाने के लिए दूसरे रास्तों पर ज्यादा निर्भर होना पड़ सकता है. इससे ग्लोबल ऑयल मार्केट में सप्लाई  को लेकर चिंता बनी रह सकती है. हालांकि, अभी यह कहना जल्दबाजी होगी कि पाइपलाइन बंद रहने से तेल की कीमतें कितनी बढ़ेंगी. इसकी वास्तविक अवधि, सऊदी अरब के वैकल्पिक निर्यात इंतजाम और होर्मुज व लाल सागर में आगे की स्थिति पर बाजार की दिशा काफी हद तक निर्भर करेगी.</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>National</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 16 Sep 2026 12:27:25 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Online Desk]]></dc:creator>
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                <title>बिहार : पप्पू यादव का सरकार पर हमला...  बोले- मैं 500 दे सकता हूं तो सरकार क्या कर रही?</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;">शिवराज सिंह चौहान आज 16 सितंबर को बिहार पहुंचे हैं और बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का हवाई सर्वेक्षण करने के साथ अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक कर रहे हैं. पप्पू यादव ने कहा कि उन्होंने आठ जिलों में एंबुलेंस भेजी हैं और प्रभावित इलाकों में जरूरतमंदों के लिए एंबुलेंस उपलब्ध कराई जा रही हैं. उन्होंने दावा किया कि बाढ़ के करीब 16 दिन बाद भी बड़ी संख्या में लोगों को राहत की जरूरत है. सांसद ने अपने स्तर पर राशन, अनाज और आर्थिक मदद पहुंचाने की बात भी कही.</p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/51856/bihar-pappu-yadav-attacked-the-government-and-said-if"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-09/dsadde.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>बिहार : </strong>बिहार में बाढ़ की स्थिति का जायजा लेने केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान के दौरे के बीच पूर्णिया के निर्दलीय सांसद पप्पू यादव ने राज्य सरकार की राहत व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं. उन्होंने कहा कि बाढ़ प्रभावित लोगों के बीच वह अपनी ओर से राहत पहुंचा रहे हैं, जबकि सरकार को बड़े स्तर पर राहत और बचाव अभियान चलाना चाहिए.</p>
<p style="text-align:justify;">शिवराज सिंह चौहान आज 16 सितंबर को बिहार पहुंचे हैं और बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का हवाई सर्वेक्षण करने के साथ अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक कर रहे हैं. पप्पू यादव ने कहा कि उन्होंने आठ जिलों में एंबुलेंस भेजी हैं और प्रभावित इलाकों में जरूरतमंदों के लिए एंबुलेंस उपलब्ध कराई जा रही हैं. उन्होंने दावा किया कि बाढ़ के करीब 16 दिन बाद भी बड़ी संख्या में लोगों को राहत की जरूरत है. सांसद ने अपने स्तर पर राशन, अनाज और आर्थिक मदद पहुंचाने की बात भी कही.<br /><br />पप्पू यादव ने कहा कि वह बाढ़ प्रभावित लोगों को 500-500 रुपये की आर्थिक सहायता दे रहे हैं. इससे पहले भी उनके बाढ़ प्रभावित इलाकों में लोगों को 500 रुपये की मदद देने की रिपोर्ट सामने आई है. सांसद ने सवाल उठाया कि जब वह अपने स्तर पर लोगों तक 500 रुपये पहुंचा सकते हैं तो सरकार की राहत व्यवस्था किस तरह काम कर रही है. उन्होंने विपक्ष की भूमिका को लेकर भी सवाल उठाए और कहा कि विपक्ष से सेवा करने की अपेक्षा की जा रही है तो सरकार की जिम्मेदारी भी स्पष्ट होनी चाहिए.</p>
<p style="text-align:justify;">पप्पू यादव ने सोनपुर, राघोपुर और छपरा जैसे बाढ़ प्रभावित इलाकों का जिक्र करते हुए वहां राहत पहुंचाने को लेकर सवाल उठाए. उनका बयान ऐसे समय आया है जब बिहार में बाढ़ से करीब 50 लाख लोग प्रभावित होने की खबर है.</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>National</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 16 Sep 2026 12:19:43 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Online Desk]]></dc:creator>
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                <title>महाराष्ट्र में हलचतल तेज, परमिशन नहीं, पर जालना से मुंबई की ओर बढ़े मनोज जरांगे... देवेंद्र फडणवीस का आया बयान</title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;">मनोज जरांगे मंगलवार रात करीब साढ़े आठ बजे गोदावरी नदी के पुल से होते हुए बीड जिले में पहुंचे। इसके बाद गेवराई और बीड शहर में जगह-जगह उनका स्वागत किया गया। काफिला रात्रि विश्राम के लिए तय पड़ाव पाटोदा पहुंचा। शारीरिक रूप से कमजोर नजर आ रहे जरांगे अपने चिर-परिचित सफेद कमीज-पायजामे में कार की अगली सीट पर बैठे हुए थे। उन्होंने बॉम्बे हाई कोर्ट के फैसले का हवाला देते हुए कहा कि अदालत ने भी उन्हें मुंबई में प्रदर्शन से रोकने से इनकार कर दिया है।</p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/51854/there-is-a-stir-in-maharashtra-due-to-lack-of"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-09/89gf.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>जालना : </strong>मुंबई में प्रदर्शन करने की पुलिस से अनुमति न मिलने के बावजूद, अनशन पर बैठे मराठा आरक्षण कार्यकर्ता मनोज जरांगे ने जालना जिले के अंतरवाली सराटी गांव से मुंबई के लिए कूच किया। कुनबी जाति की वंशावली वाले मराठा समुदाय के सदस्यों के लिए अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) आरक्षण की मांग को लेकर पिछले 17 दिन से अनशन पर बैठे जरांगे को मुंबई पुलिस ने गणेश उत्सव के दौरान कानून-व्यवस्था की चिंताओं का हवाला देते हुए आजाद मैदान में विरोध प्रदर्शन करने की अनुमति देने से इनकार कर दिया था। वहीं मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने मनोज जरांगे के आंदोलन पर सवाल उठाए हैं। मनोज जरांगे अपने रुख पर कायम हैं। उन्होंने महाराष्ट्र के विभिन्न हिस्सों से मराठा समुदाय के लोगों को मुंबई में जुटाने की अपनी पहले की योजना में बदलाव किया। अब जरांगे ने कड़ी सुरक्षा के बीच केवल पांच से 10 सहयोगियों के एक छोटे समूह के साथ जाने का फैसला किया।<br /><br />मनोज जरांगे मंगलवार रात करीब साढ़े आठ बजे गोदावरी नदी के पुल से होते हुए बीड जिले में पहुंचे। इसके बाद गेवराई और बीड शहर में जगह-जगह उनका स्वागत किया गया। काफिला रात्रि विश्राम के लिए तय पड़ाव पाटोदा पहुंचा। शारीरिक रूप से कमजोर नजर आ रहे जरांगे अपने चिर-परिचित सफेद कमीज-पायजामे में कार की अगली सीट पर बैठे हुए थे। उन्होंने बॉम्बे हाई कोर्ट के फैसले का हवाला देते हुए कहा कि अदालत ने भी उन्हें मुंबई में प्रदर्शन से रोकने से इनकार कर दिया है।<br /><br />मनोज जरांगे ने उनकी हत्या की साजिश रचने के आरोपों को दोहराया। आरक्षण कार्यकर्ता ने कहा, ‘क्या (मुख्यमंत्री) देवेंद्र फडणवीस मुझे गोली मरवाना चाहते हैं? मैं अकेला आ रहा हूं। उन्होंने मुझे मारने की साजिश रची है। भले ही वे मुझे मार डालें, मैं मराठा समुदाय के साथ विश्वासघात नहीं होने दूंगा।’ देवेंद्र फडणवीस और राज्य मंत्रिमंडल के अन्य मंत्रियों ने मनोज जरांगे से बार-बार अनशन खत्म करने की अपील करते हुए कहा था कि सरकार चर्चा के लिए तैयार है और कानूनी रूप से वैध मांगों को स्वीकार करेगी।<br />अहिल्यानगर, पुणे और रायगढ़ से होते हुए मुंबई पहुंचेंगे मनोज जरांगे<br />जरांगे का काफिला बीड के पाटोदा, अहिल्यानगर के श्रीगोंदा, पुणे के हडपसर और रायगढ़ जिले के खोपोली से होते हुए 19 सितंबर को मुंबई के आजाद मैदान पहुंचेगा। इससे पहले सुबह जरांगे की स्वास्थ्य जांच की गई। उन्होंने छत्रपति शिवाजी महाराज को नमन किया और गांव के दो मंदिरों में माथा टेका। अंतरवाली सराटी-शाहगढ़ मार्ग पर कड़े सुरक्षा प्रबंध किए गए हैं।<br /><br />अधिकारियों ने कहा कि तैनात किए गए सुरक्षाबल में तीन उपविभागीय पुलिस अधिकारी, 10 निरीक्षक, 30 सहायक/उप-निरीक्षक, 300 पुलिसकर्मी, 265 होमगार्ड आदि शामिल हैं। विभिन्न संवेदनशील बिंदुओं पर सुरक्षा व्यवस्था मजबूत की गई है। जरांगे के काफिले में दो एसयूवी और दो एम्बुलेंस शामिल हैं। जालना पुलिस द्वारा दिए गए दो बॉडीगार्ड्स के साथ-साथ छत्रपति संभाजीनगर की अतिरिक्त विशेष सुरक्षा इकाई (एसपीयू) के कर्मियों के साथ जरांगे की सुरक्षा भी बढ़ा दी गई है।<br /><br />मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि सरकार को उम्मीद है कि लोगों को कोई परेशानी नहीं होगी और विरोध-प्रदर्शनों के कारण गणेशोत्सव में कोई बाधा नहीं आएगी। यह मुंबई और पुणे में बहुत बड़ा त्योहार है और इसे सबसे बड़े हिंदू त्योहारों में से एक के रूप में सार्वजनिक तौर पर मनाया जाता है। जरांगे का काफिला 19 सितंबर को मुंबई के आजाद मैदान पहुंचने से पहले बीड, अहिल्यानगर के श्रीगोंदा, पुणे के हडपसर और रायगढ़ के खोपोली से होकर गुजरेगा। इस दौरान काफिला 400 किलोमीटर से अधिक की दूरी तय करेगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Maharashtra</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 16 Sep 2026 12:08:12 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Online Desk]]></dc:creator>
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                <title>वर्धा : किसान परिवार को मिलेगी राहत, बारह महीने सिंचाई का मिलेगा दोगुना मुआवजा- बॉम्बे हाईकोर्ट   </title>
                                    <description><![CDATA[<p style="text-align:justify;">बॉम्बे हाई कोर्ट के इस निर्णय से वर्धा जिले की देवली तहसील के कोलोना गांव के चिचटे परिवार को बड़ी राहत मिली है। अदालत ने अधिग्रहित जमीन के लिए कुल 5.04 लाख रुपये का मुआवजा निर्धारित किया। पहले मिल चुकी 2.46 लाख रुपये की राशि को घटाने के बाद किसान परिवार को 1.68 लाख रुपये अतिरिक्त मुआवजा देने का आदेश दिया गया है। इसके साथ ही कानून के तहत मिलने वाले सभी वैधानिक लाभ भी देने के निर्देश दिए गए हैं।</p>]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.rokthoklekhani.com/article/51852/wardha-farmer-family-will-get-relief-will-get-double-compensation"><img src="https://www.rokthoklekhani.com/media/400/2026-09/fgdgfd.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>वर्धा : </strong>बारहमाही सिंचाई की सुविधा वाली कृषि जमीन को केवल बंजर जमीन मानकर कम मुआवजा देना उचित नहीं है। खेत में पक्का कुआं, बाग और सालभर फसल लेने की सुविधा जैसे ठोस प्रमाण मौजूद हों तो जमीन को बारहमाही सिंचित माना जाएगा और नियमानुसार सूखी जमीन की तुलना में दोगुनी दर से मुआवजा देने का आदेश हाई कोर्ट ने दिया। बॉम्बे हाई कोर्ट के इस निर्णय से वर्धा जिले की देवली तहसील के कोलोना गांव के चिचटे परिवार को बड़ी राहत मिली है। अदालत ने अधिग्रहित जमीन के लिए कुल 5.04 लाख रुपये का मुआवजा निर्धारित किया। पहले मिल चुकी 2.46 लाख रुपये की राशि को घटाने के बाद किसान परिवार को 1.68 लाख रुपये अतिरिक्त मुआवजा देने का आदेश दिया गया है। इसके साथ ही कानून के तहत मिलने वाले सभी वैधानिक लाभ भी देने के निर्देश दिए गए हैं।<br /><br />वर्धा जिले की देवली तहसील के मौजा कोलोना का है। चिचटे परिवार की सर्वे नंबर 175 में कुल 3.90 हेक्टेयर कृषि जमीन थी। लोअर वर्धा परियोजना के तहत कोलोना नहर के निर्माण के लिए इस जमीन में से 0.58 हेक्टेयर क्षेत्र 25 नवंबर 2010 को अधिग्रहित किया गया था। भूमि अधिग्रहण अधिकारी ने अधिग्रहित जमीन के लिए केवल 89,900 रुपए मुआवजा मंजूर किया था। किसानों को यह राशि बेहद कम लगी। उन्होंने जमीन की वास्तविक स्थिति और उस पर उपलब्ध सिंचाई सुविधाओं को देखते हुए अधिक मुआवजे की मांग की और वर्धा के दिवानी न्यायालय स्थित रेफरेंस कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। रेफरेंस कोर्ट ने किसानों की मांग को आंशिक रूप से स्वीकार करते हुए मुआवजे की राशि बढ़ाकर 2.46 लाख रुपये कर दी लेकिन चिचटे परिवार इससे संतुष्ट नहीं हुआ।<br /><br />बॉम्बे हाई कोर्ट ने मामले में उपलब्ध साक्ष्यों और लागू नियमों का परीक्षण करने के बाद कहा कि जमीन की वास्तविक सिंचाई क्षमता को नजरअंदाज करके केवल सूखी जमीन के आधार पर मुआवजा तय नहीं किया जा सकता। बारहमाही सिंचित जमीन का कृषि उत्पादन और आर्थिक मूल्य सूखी जमीन की तुलना में अधिक होता है, इसलिए लागू नियमों के अनुसार ऐसी जमीन के लिए सूखी जमीन के मूल्य की तुलना में दोगुना मुआवजा निर्धारित किया जाना चाहिए।</p>
<p style="text-align:justify;"> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>Maharashtra</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 16 Sep 2026 12:04:32 +0530</pubDate>
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